पीएनबी फ्रॉड: मुख्य भूमिका निभाने वाले गुजरात से, इनकी किसी न किसी स्तर पर मदद की गई- चिदंबरम

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बंगलुरु.पूर्व केन्द्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने पीएनबी फ्रॉड को लेकर रविवार को यहां कहा कि मामले में मुख्य भूमिका निभाने वाले गुजरात से हैं। इनकी किसी न किसी स्तर पर मदद की गई है। मदद किसने और कैसे की, इसके सबूत मेरे पास नहीं हैं। इस दौरान चिदंबरम ने गुजरात चुनाव के नतीजों की ओर इशारा करते हुए यह भी कहा कि गुजरात में कड़े सवाल किए गए। अब कड़े सवाल पूछने का मौका कर्नाटक में मिलने वाला है। बता दें कि पीएनबी में हुए 12,672 करोड़ रुपए के फ्रॉड में हीरा कारोबारी नीरव मोदी और गीतांजलि जेम्स के मालिक मेहुल चौकसी मुख्य आरोपी हैं। दोनों देश छोड़ कर भाग चुके हैं।

फ्रॉड के मुख्य आरोपी गुजरात से
– चिदंबरम ने कहा, “ये सब एक सेक्टर में हो रहा है-ज्वेलरी। मामले में मुख्य भूमिका निभाने वाले एक राज्य से हैं-गुजरात। ये सभी सेक्टरों या सभी राज्यों में नहीं हो रहा है। ये साफ है कि किसी न किसी स्तर पर लोगों की मदद की गई है। किसने और कैसे मदद की है, इसके मेरे पास सबूत नहीं हैं।”

वो पकौड़ा बेचने को नौकरी मान रहे, ये जख्मों पर नमक है

– कर्नाटक में होने जा रहे विधानसभा चुनाव को लेकर चिदंबरम ने कहा, “हमें कड़े सवाल पूछने शुरू करने होंगे। जब तक ज्यादा से ज्यादा लोग सरकार से सवाल करना शुरू नहीं करेंगे, तब तक ये नजरअंदाज किए जाते रहेंगे। उन्हें (सरकार) पता है कि देश में नौकरी की भारी कमी है। वो पकौड़ा बेचने को ही नौकरी मान रहे हैं। ये घाव पर नमक छिड़कने जैसा है।”

2जी स्पेक्ट्रम घोटाला: कैग की रिपोर्ट में बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया

– चिदंबरम ने कहा, “कैग की टेलीकॉम सेक्टर पर रिपोर्ट में सब कुछ बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया था। मुझे लगता है कि हम बिजनेस की समस्या को बिजनेस की समस्या की तरह हल करने में नाकाम रहे। कुछ राजनीतिक दलों के लिए इस मामले को राजनीतिक मोड़ देना तो आसान रहा, लेकिन पूरे देश को इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है।”

– बता दें कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला 2010 में सामने आया था। सीएजी के मुताबिक, इसमें सरकारी खजाने को करीब एक लाख 76 हजार करोड़ रुपयों का नुकसान हुआ।

क्या है पीएनबी घोटाला?
– पीएनबी ने फरवरी में सीबीआई को बैंक में 1,251 करोड़ के फ्रॉड की जानकारी दी। घोटाला मुंबई की ब्रेडी हाउस ब्रांच में हुआ। 2011 से 2018 के बीच हजारों करोड़ की रकम फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoUs) के जरिए विदेशी अकाउंट्स में ट्रांसफर की गई। इसमें हीरा कारोबारी नीरव मोदी और मेहुल चौकसी मुख्य आरोपी हैं। वे देश छोड़कर जा चुके हैं।