दीन का इल्म हासिल करना अफजल, आला और बेहतर है : सूफी अब्दुल लतीफ

हजरत मुबारक खां शहीद अलैहिर्रहमां के उर्स-ए-पाक का पहला दिन

गोरखपुर । नार्मल स्थित दरगाह पर हजरत मुबारक खां शहीद अलैहिर्रहमां का सालाना तीन दिवसीय उर्स-ए-पाक रविवार को जलसा-ए-ईद मिलादुन्नबी व दस्तारबंदी के साथ शुरु हुअा। दारुल उलूम अहले सुन्नत फैजान-ए-मुबारक खां शहीद के चार छात्रों हाफिज गुलाम वारिस, हाफिज अरशद रज़ा, हाफिज मो. सैफ अली व हाफिज मो. अबू शहमा की दस्तारबंदी (सनद देने की रस्म) मुख्य अतिथियों द्वारा की गई। अकीदतमंदों ने छात्रों को दुआओं व नजरानों से नवाज़ा। उर्स-ए-पाक में मुस्लिम समुदाय के अलावा अन्य धर्मो के लोगों ने शिरकत कर अमन चैन व खुशहाली की दुआ मांगी। भोर में गुस्ल एवं संदल पोशी हुई। दरगाह पर लगे मेले का सभी ने लुत्फ उठाया।

जलसे में बड़ी संख्या में उलेमा-ए-किराम को तोहफा देकर सम्मानित किया गया। वहीं पत्रकारिता में बहुमूल्य योगदान देने के लिए युवा पत्रकार सैयद फरहान अहमद को भी सम्मानित किया गया। उलेमा-ए-किराम ने प्रदेश सरकार से गोरखपुर में हजरत मुबारक खां शहीद अलैहिर्रहमां के नाम पर हज हाउस खोले जाने की पुरजोर मांग की।

मुख्य अतिथि मुंबई के पीरे तरीकत सूफी अब्दुल लतीफ ने कहा कि पैगंबर-ए-आज़म हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने फरमाया है कि मुसलमान वह है जिस के हाथ और ज़बान से सभी इंसानों को सलामती पहुंचे। सही मुसलमान वो है जो दुनिया को शांति से भर दे, जो ज़ुल्म करे उस पर रहम करे, जो रिश्ता तोड़े उस से रिश्ता जोड़े मगर अफसोस कि आज हम मुसलमान होने का दावा करते हैं लेकिन हमारा पड़ोसी भी हम से खुश नहीं होता।

देशवासियों को कुरआन-ए-पाक पढ़ने की दावत देते हुए कहा कि दीन-ए-इस्लाम व कुरआन-ए-पाक के अध्ययन से, पैगंबर-ए-आज़म के अख्लाक और उनके सच्चे वारिस औलिया, उलेमा के जीवन को समझें। अगर पैगंबर-ए-आज़म हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के दिए हुए नियमों का पालन हो तो भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया भ्रष्टाचार, औरतों की असुरक्षा, भुखमरी और इस प्रकार के रोगों से और सभी तरह की नास्तिकता से और मजहब के नाम पर हिंसा से सुरक्षित हो सकती है।

उन्होंने कहा कि दीन का इल्म हासिल करना इबादत से अफज़ल है। दीन-ए-इस्लाम का एक आलिमे रब्बानी 70 हजार आबिदों (इबादतगुजार बंदे) से अफजल, आला और बेहतर है। आबिदों पर उलेमा की फजीलत ऐसे है जिस तरह सितारों के झुरमुट में चौंदहवीं का चांद चमक रहा हो। पैगंबर-ए-आज़म हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम का हुक्म है कि मेरे उम्मती इस हाल में सुबह कर कि तू आलिम हो, अगर तेरे बस में आलिम होना न हो तो फिर मैं तुझे ताकीद करता हूं कि तू तालिब-ए-इल्म जरुर हो और तू आलिम व तालिब-ए-इल्म न हो तो फिर इन दोनों में से किसी एक की बात सुनने वाला जरुर बन। अगर तू इनका सुनने वाला भी न हो तो इनसे मोहब्बत करने वाला जरुर हो जा।

विशिष्ट अतिथि प्रयागराज के मौलाना शहादत हुसैन ने कहा कि हजरत आदम अलैहिस्सलाम से लेकर आखिर पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम तक जितने भी पैगंबर इस दुनिया में आये, वह सब इंसानों को तौहीद, एकता और इंसानियत की दावत देने के लिए आए। आखिरी पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम पूरी दुनिया के लिए रहमत बनकर आए। हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने इंसानों को उसके हकीकी मालिक अल्लाह से मिलाया। पैगंबर-ए-आज़म पर नाज़िल होने वाली किताब कुरआन-ए-पाक भी एक विशेष क़ौम व मिल्लत के लिए नहीं बल्कि उसमें सभी इंसानों के लिए अल्लाह का संदेश व हिदायत है। पैगम्बर-ए-आज़म ने फ़रमाया है कि कोई इंसान किसी दूसरे इंसान पर कोई श्रेष्ठता नहीं रखता, किसी गोरे को काले, किसी अरबी का अज़मी पर कोई बड़ाई नहीं है, लेकिन केवल अपनी अच्छाईयों, अल्लाह का खौफ, इंसानों में जिसका रिश्ता अल्लाह से मजबूत होगा और बंदों को जिससे अधिक लाभ होगा, वह ही बेहतर इंसान है।

विशिष्ट वक्ता कारी शराफत हुसैन कादरी ने कहा कि पैगंबर-ए-आज़म हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम की शिक्षाओं के सही प्रचारक औलिया व उलेमा हैं, शांति की शिक्षा उनके जीवन का मकसद होती है, सृष्टि के निर्माता अल्लाह से मिलाना और इंसान को इंसानियत के बारे में बताना उनका विशेष कार्य होता है। औलिया का दरवाजा हर आने वाले के लिए खुला रहता है। उनकी शिक्षाओं का पालन करने से ही आज की दुनिया को शांति प्रदान हो सकती है, आज के दौर में उनके शिक्षा का महत्व और जरूरत बढ़ गई है।  उनकी सोहबत में पहले इंसान को इंसानियत की शिक्षा दी जाती है और फिर इंसान को अल्लाह से मिला दिया जाता है। अवाम से अपील किया कि अहकाम-ए-शरीयत का सख्ती के साथ पालन कीजिए। शरीयत से हट कर कोई काम न करें। एक बनें, नेक बनें। आधी रोटी खाकर भी बच्चों को पढ़ाना पढ़े तो भी बच्चों को तालीम जरुर दिलवाइए।

तिलावत-ए-कुरआन पाक से आगाज कारी शादाब रज़ा ने किया। नात-ए-पाक छपरा के कारी अब्दुल वकील, आदिल अत्तारी, एजाज गोरखपुरी ने पेश की। निज़ामत मौलाना मकसूद आलम मिस्बाही ने की।

इस दौरान दरगाह सदर इकरार अहमद, शमशीर अहमद शेरु, मंजूर आलम, मुफ्ती मो. अजहर शम्सी, मुफ्ती अख्तर हुसैन, मुफ्ती खुर्शीद अहमद मिस्बाही, कारी अफजल बरकाती, कारी नूरुल ऐन, कारी मो. अबू हुजैफा, हाफिज रहमत अली निज़ामी, उमर कादरी, सैयद शहाब अहमद, अब्दुल्लाह, हाजी कलीम फरजंद, मनोव्वर अहमद, रमज़ान अली, कुतबुद्दीन, कारी मो. जमील, अरुण सिंह, अनूप राय, गिरिजेश शुक्ल, गोपाल त्रिपाठी, मौलाना मोहम्मद अहमद, मौलाना जहांगीर अहमद अज़ीज़ी, मौलाना असलम रज़वी, नूर मोहम्मद दानिश सहित तमाम लोग मौजूद रहे।

भाजपा सांसद रमापति राम त्रिपाठी ने चढ़ायी चादर, हज हाउस निर्माण में मदद का दिया आश्वासन

भाजपा के देवरिया से सांसद रमापति राम त्रिपाठी ने दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद पर चादर चढ़ा कर अकीदत का नजराना पेश किया। दरगाह के सदर इकरार अहमद ने सांसद से हजरत मुबारक खां शहीद के नाम से हज हाउस निर्माण की गुजारिश की। सांसद रमापति राम ने कहा कि प्रस्ताव भेजिए मैं सरकार से हज हाउस निर्माण के लिए पूरा प्रयास करुंगा। कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी व सीएम योगी आदित्यनाथ की नीतियां सबका साथ-सबका विकास और सबका विश्वास है। अल्पसंख्यकों के हितार्थ जो भी कार्य होगा सरकार उसमें पूरा सहयोग करेगी।

1 जुलाई सोमवार का कार्यक्रम 

उर्स-ए-पाक के दूसरे दिन सोमवार को बाद नमाज फज्र कुरआन ख्वानी होगी। सुबह 11 बजे से कुल शरीफ की रस्म अदा की जायेगी।

बाद नमाज मगरिब सरकारी चादर व गागर का जुलूस बहरामपुर से निकलेगा। बाद नमाज एशा बदायूं के जुनेद सुल्तानी व मुंबई के सुल्तान नाज़ा कव्वाली का कार्यक्रम पेश करेंगे।

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