राजा भोज के राज्य में लोक राज की दस्तक देने पहुंचे अखिलेश यादव

मध्य प्रदेश के लोग उत्तर प्रदेश में समाजवादी सरकार के विकासकार्यों से परिचित और प्रभावित हैं।

भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री  अखिलेश यादव की सरगर्म चर्चा है। दिनांक 19 एवं 20 जुलाई 2018 को उनके भोपाल प्रवास से हलचल और बढ़ गई हैं। वे जहां रूके वहां हजारों नौजवान जय करते हुए एक झलक पाने को उतावले थे। वे जिधर चले उधर हजारों की भीड़ चली। मैं उनकी इस यात्रा में उनके साथ था। मैंने देखा कि मध्य प्रदेश के अखबार उनकी चर्चाओं से भरे थे और विभिन्न दलों के बीच चर्चा का यही मुख्य विषय था कि अब समाजवादी पार्टी का हस्तक्षेप प्रभावी होगा।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में दोनों दिन अखिलेश जी से मिलने वालों का तांता लगा रहा। उनके प्रति इस असीम आकर्षण से दो बातें स्पष्ट है। एक तो मध्य प्रदेश के लोग उत्तर प्रदेश में समाजवादी सरकार के विकासकार्यों से परिचित और प्रभावित हैं। दूसरे लगता है कि सत्ता प्रतिष्ठान के विरूद्ध नाराजगी और बदलाव की इच्छा है।

भारत की अर्थव्यवस्था, मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार की स्थिति पर चर्चा हुई।

भोपाल प्रवास के दौरान अखिलेश  कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष  अरूण यादव के आवास पर गए तो वहां पहले से सैकड़ों लोग उनके स्वागत के लिए तैयार थे। वे पार्टी के पूर्व सांसद  मुनव्वर सलीम से भोपाल के चिरायु अस्पताल में स्वास्थ्य का हाल लेने गए जो वहां भर्ती है। मालीपुरा चौक, जो पुराना भोपाल है, में अपने घरों से बाहर लोग स्वागत में खड़े थे। राष्ट्रीय गोंडवाना पार्टी गणतंत्र के राष्ट्रीय अध्यक्ष  हीरा सिंह मरकामा ने भी अखिलेश से भेंट की। उनके साथ भारत की अर्थव्यवस्था, मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार की स्थिति पर चर्चा हुई। उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखण्ड के पूर्व राज्यपाल  अजीज कुरैशी से भी उनकी भेंट हुई।
अखिलेश यादव से युवा नेता  हार्दिक पटेल ने भी गुजरात से आकर भेंट की। वे कई सौ किलोमीटर यात्रा करके विशेषतौर पर मिलने के लिए ही आए थे। उनकी यह भेंट महत्वपूर्ण थी।  हार्दिक पटेल ने कहा कि वह श्री अखिलेश यादव द्वारा उत्तर प्रदेश में किए गए विकासकार्यों से प्रभावित है और उन्हें फालो करते हैं।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से मंदसौर में किसान आंदोलन के प्रभावित परिवारों ने भी भेंट की। मध्य प्रदेश के मंदसौर में किसानों ने जर्बदस्त आंदोलन किया था। इस आंदोलन में कई किसानों की पुलिस की गोली लगने से मौत हो गई थी। मंदसौर के मृतक किसान कन्हैया लाल, बबलू पाटीदार, अभिषेक पाटीदार के परिवार के आश्रित क्रमशः श्री जगदीश भाई पाटीदार, बालाराम पाटीदार और दिनेश पाटीदार मिले और उन्होंने अखिलेश जी को किसानों के साथ मध्य प्रदेश में हो रहे अत्याचारों का ब्यौरा दिया। किसानों का कहना था कि मंदसौर में चना, गेहूं और सोयाबीन के किसानों को फसल का उचित दाम नहीं मिल रहा है। अखिलेश जी ने कहा कि सरकारों को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि किसान की फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य के आधार पर खरीदी जाए।
भोपाल में श्री अखिलेश यादव ने प्रेस प्रतिनिधियों से भी वार्ता की और साक्षात्कार भी दिये। इस मौके पर भी बड़ी तादाद में नौजवान इकट्ठे हो गए थे जिनमें महिलाएं और किसान भी थे। सबमें बड़ा उत्साह झलक रहा था। यह स्थिति उनके एयरपोर्ट से आने-जाने के दौरान रास्ते भर रही।
इन दो दिनों में राष्ट्रीय अध्यक्ष जी ने हजारों कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि कैसी विडम्बना है कि मध्य प्रदेश में 15 वर्षों से भाजपा की सरकार है और 4 वर्षों से केन्द्र में भाजपा सŸाारूढ हैं यानी अब डबल इंजन की सरकार के बाद भी मध्य प्रदेश अपने विकास की बाट जोह रहा है। भाजपा सरकार झूठे सपना दिखा रही है और असली तथ्य छुपा रही है। विकास का बुनियादी ढांचा नहीं है। किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य कहां मिला है?

एक प्रश्न जो राजनीतिक हलको में बार-बार पूछा जा रहा था कि आगामी विधानसभा चुनावों में मध्य प्रदेश में समाजवादी पार्टी की भूमिका क्या होगी। अखिलेश जी ने इसे बहुत हद तक स्पष्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि सन् 2018 के चुनावों में मध्य प्रदेश में राजनीति में काफी बदलाव होगा। देश नया प्रधानमंत्री चाहता है और साथ ही मध्य प्रदेश में 15 सालों के भाजपा वर्चस्व को भी तोड़ना चाहता है। इस बार जनता चुनाव लड़ेगी और वहीं निर्णय करेगी। चुनाव के बाद राष्ट्रीय नेतृत्व तय हो जाएगा। भाजपा की नीति समाज को जोड़ने की जगह तोड़नेवाली हैं। भाजपा के पास झूठ का तंत्र है। इस बार चुनाव में विकास को भावनाओं से जोड़ेंगे। मंहगाई, बेरोजगारी और किसान के साथ आर्थिक न्याय यही इस बार चुनाव के मुद्दे होंगे।
श्री अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा के समक्ष विपक्ष अब ताकतवर होकर उभरा है। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, नूरपुर, कैराना, फूलपुर के उपचुनावों में भाजपा को शिकस्त मिली है। अब समान विचारधाराओं के गठबंधन की आवश्यकता सभी महसूस करने लगे हैं। समाजवादी पार्टी प्रगतिशील और विकास परक राजनीति की पक्षधर है। मध्य प्रदेश में इस नीति को आगे बढ़ाने के लिए साइकिल को गति दी जा रही है। विधानसभा की 230 सीटो पर समाजवादी पार्टी अपनी संगठनात्मक तैयारी कर रही है। हम कमजोरों की आवाज बनना चाहते हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री श्री यादव ने इस बात पर बल दिया कि भाजपा लोकतंत्र के लिए खतरा है। भाजपा जातिवादी पार्टी है, भाजपा सांप्रदायिकता की राजनीति करती है। उसे विकास में रूचि नहीं है। वह कारपोरेट घरानों की पार्टी है। भाजपा राज में महिला उत्पीड़न बढ़ा है। नौकरियां कम हुई है। जीएसटी-नोटबंदी से व्यापार चौपट हुआ है। भाजपा नेतृत्व ने अपने वादे नहीं निभाए है। मध्य प्रदेश में किसान सर्वाधिक उत्पीड़न का शिकार है। अपनी आवाज उठाने पर उसे गोलियों -लाठियों की मार सहनी पड़ती है। नौजवानों को कुचलने का काम हो रहा है।
अखिलेश  वस्तुतः गांधीजी, डाॅ0 लोहिया और चौ चरण सिंह की ग्रामोन्मुख अर्थव्यवस्था के पक्षधर हैं। वे उसके सामाजिक एवं आर्थिक रूपान्तरण के भी प्रतिबद्ध हैं। गांधीजी केवल भारत के ही नहीं बल्कि भारत के प्रत्येक गांव व प्रत्येक व्यक्ति हेतु स्वतंत्रता चाहते थे। उनका मानना था कि राष्ट्र का निर्माण व विकास एक व्यक्ति से शुरू होता है फिर समाज से गांव, फिर शहर, फिर शहर से राज्य और राज्य से देश तक का। इस तरह गांधीजी देश के प्रत्येक व्यक्ति का सर्वांगीण विकास चाहते थे। गांधीजी ग्रामों की आत्मनिर्भरता को ही स्वराज मानते थे। केंद्रीकृत प्रशासन के स्थान पर देश की जनता की प्रशासन की हर स्तर पर नीति निर्माण में सहभागिता पर गांधीजी बल देते थे। गांव व गरीबी दोनों उनके लक्ष्य में थे। अखिलेश जी ने भी बजट का 75 प्रतिशत गांवों के लिए रखा था। किसान को उन्होंने प्राथमिकता दी थी। श्री अखिलेश इस सपने को पूरा करने की क्षमता रखते है। उन्होंने अपने मुख्यमंत्रित्वकाल में इस दिशा में कई कदम उठाए थे।
अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि समाजवादी नीतियों और कार्यक्रमों का ईमानदारी से पालन करते हैं। घोषणा पत्रों के साथ न्याय करना चाहिए यही लोकतंत्र की प्रतिबद्धता है। समाजवादी सामाजिक न्याय और सामाजिक सद्भाव के लिए काम करते हैं। भाजपा झूठ और अफवाहों के सहारे सत्ता में आई हैं। अब उसकी कलई जनता के सामने खुल गई है। कहते हैं काठ की हाण्डी एक ही बार चढ़ती है, भाजपा के दिन बीत चुके हैं। राजनीति में समाजवादी विचारधारा ही एक विकल्प है।
राजाभोज की नगरी और अब मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 24 किमी. के क्षेत्रफल में फैली झील प्रकृति का सुन्दर उपहार है। यहां जन-जन की यह प्रतिक्रिया सुनने को मिली कि मुख्यमंत्री तो अखिलेश यादव जैसा ही होना चाहिए। जिन्होंने 5 वर्ष के कार्यकाल में ही उत्तर प्रदेश को विकास के मामले में ऊंचाईयों पर पहुंचा दिया था उनके विकास कार्यों का कोई मुकाबला नहीं है। इसके उलट मध्य प्रदेश की जनता कुंठित है कि उसकी जिंदगी में खुशहाली नहीं आ पाई है। वहां 15-15 वर्षों से मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के बाद भी विकास दूर तक दिखाई नहीं देता है। जनता अभी तक विकास के दर्शन नहीं कर सकी है। यह एक सच्चाई है। भाजपा को जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा।

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