आला हज़रत मुसलमानों की आन, बान, शान हैं

102वां उर्स-ए-आला हज़रत

गोरखपुर । मंगलवार को शहर में 14वीं व 15वीं सदी हिजरी के अज़ीम मुजद्दिद आला हज़रत इमाम अहमद रजा खां अलैहिर्रहमां का 102वां उर्स-ए-मुबारक अकीदत व मोहब्बत के साथ मनाया गया। घरों, मस्जिदों व सोशल मीडिया पर आला हज़रत को शिद्दत से याद किया गया।

जामा मस्जिद सुब्हानिया तकिया कवलदह, सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफ़रा बाजार, मोती जामा मस्जिद रसूलपुर, चिश्तिया मस्जिद बक्शीपुर, दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद नार्मल, जामा मस्जिद रसूलपुर, शाही जामा मस्जिद तकिया कवलदह में उर्स-ए-आला हज़रत के मौके पर महफिल सजायी गई। कुरआन ख्वानी, फातिहा ख्वानी व दुआ ख्वानी हुई। नातो मनकबत पेश की गई। तंजीम कारवाने अहले सुन्नत की ओर से यूट्यूब लाइव के नूरी नेटवर्क पर ऑनलाइन महफिल सजी।

मोती जामा मस्जिद रसूलपुर में सजी महफिल में मौलाना जहांगीर अहमद अज़ीज़ी व मुफ्ती खुश मोहम्मद मिस्बाही ने कहा कि आला हज़रत इमाम अहमद रजा खां अलैहिर्रहमां बहुत बड़े मुजद्दिद, मुहद्दिस, मुफ्ती, आलिम, हाफिज़, लेखक, शायर, भाषाविद्, युग प्रवर्तक तथा समाज सुधारक थे। सिर्फ तेरह साल की कम उम्र में मुफ्ती बने। आला हजरत दीन-ए-इस्लाम, विज्ञान, अर्थव्यवस्था, गणित, जीव विज्ञान, भूगोल, दर्शनशास्त्र, शायरी, चिकित्सा, रासायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, भूगर्भ विज्ञान सहित 55 से अधिक विषयों के विशेषज्ञ थे।

चिश्तिया मस्जिद बक्शीपुर में हाफिज महमूद रज़ा कादरी ने कहा कि आला हज़रत ने दीन-ए-इस्लाम, साइंस, अर्थव्यवस्था और कई विषयों पर एक हजार से ज्यादा किताबें लिखीं। आला हज़रत को पचपन से ज्यादा विषयों पर महारत हासिल थी। उनका एक प्रमुख ग्रंथ ‘फतावा रजविया’ इस सदी के इस्लामी कानून का अच्छा उदाहरण है। उर्दू जुबान में कुरआन का तर्जुमा ‘कंजुल ईमान’ विश्वविख्यात है। उलेमा-ए-अरब व अज़म सबने आप की इल्मी लियाकत का लोहा माना। आला हज़रत मुसलमानों की आन, बान, शान हैं।

सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफ़रा बाजार में हाफिज रहमत अली निज़ामी ने कहा कि आला हज़रत चौदहवीं व पंद्रहवीं सदी हिजरी के मुजद्दिद हैं। जिन्हें उस समय के प्रसिद्ध अरब व अज़म के विद्वानों ने यह उपाधि दी। आला हज़रत को अल्लाह व रसूल-ए-पाक हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और गहरा इश्क था। जिसको आपने ‘हदाइके बख्शिश’ में नातो मनकब के जरिए बयान किया है।

दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद नार्मल में कारी अफज़ल बरकाती ने आला हज़रत की शख्सियत पर रोशनी डालते हुए कहा कि आला हज़रत ने तेरह साल की उम्र से ही फतवा लिखना और लोगों को दीन-ए-इस्लाम का सही पैगाम पहुंचाना शुरू कर दिया। पूरी उम्र दीन की खिदमत में गुजारी। आला हज़रत द्वारा किया गया कुरआन पाक का उर्दू में तर्जुमा ‘कंजुल ईमान’ व ‘फतावा रजविया’ बेमिसाल है।

नूरी नेटवर्क की ऑनलाइन महफिल में हाफिज अातिफ रज़ा कादरी ने कहा कि रसूल-ए-पाक अलैहिस्सलाम से सच्ची मोहब्बत आला हज़रत का सबसे अज़ीम सरमाया था। आपकी एक मशहूर किताब जिसका नाम ‘अद्दौलतुल मक्किया’ है। जिसको आपने केवल आठ घंटों में बिना किसी संदर्भ ग्रंथ के मदद से हरम-ए-मक्का में लिखा।

जामा मस्जिद सुब्हानिया तकिया कवलदह, जामा मस्जिद रसूलपुर व शाही जामा मस्जिद तकिया कवलदह में उलेमा-ए-किराम ने कहा कि आज पूरी दुनिया में आला हज़रत का चर्चा है। आला हज़रत ने हिंद उपमहाद्वीप के मुसलमानों के दिलों में अल्लाह और रसूल-ए-पाक अलैहिस्सलाम के प्रति प्रेम भर कर रसूल-ए-पाक की सुन्नतों को जिंदा किया। आप सच्चे समाज सुधारक थे। आप मुल्क से बहुत मोहब्बत करते थे। जंगे आजादी में आपने और आपके पूरे खानदान ने महती भूमिका निभाई।

अंत में कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। दरूदो सलाम पढ़कर मुल्क में अमनो-अमान व कोरोना महामारी से निजात की दुआ मांगी गई। शीरीनी तकसीम हुई। उर्स में हाफिज सद्दाम हुसैन, मौलाना रजीउल्लाह मिस्बाही, मौलाना मो. कैसर रज़ा, सबील गोरखपुरी, मौलाना मो. शादाब, हाफ़िज़ अमीर हुसैन, हाफिज अजीम अहमद, हाफिज नसरुद्दीन, सैफुलवरा, हाफ़िज़ मुज़म्मिल रज़ा, हाफ़िज़ रहमत अली अंसारी, अब्दुल कय्यूम, अब्दुस्समद, मो. सैफ अली, शारिक अली इमरान अली, समीर अली, मुबारक अली, साद अली, आरिफ अली, शमशाद अली, नूर मोहम्मद, इलियास, हाफिज आफताब आलम सहित तमाम अकीदतमंद शामिल रहे।

नूरी मस्जिद तुर्कमानपुर में आज मनाया जायेगा उर्स, बंटेगा लंगर

नूरी मस्जिद तुर्कमानपुर में आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खां अलैहिर्रहमां का 102वां उर्स-ए-मुबारक बुधवार 14 अक्टूबर दोपहर 2:00 बजे से मनाया जायेगा। कुरआन ख्वानी, फातिहा ख्वानी व दुआ ख्वानी की जायेगी। आला हज़रत की दीनी व दुनियावी खिदमात पर उलेमा-ए-किराम रोशनी डालेंगे। कुल शरीफ की रस्म अदा होगी। अंत में लंगर-ए-आला हज़रत बांटा जायेगा। यह जानकारी मस्जिद के सदर अलाउद्दीन निज़ामी ने दी है। नूरी जामा मस्जिद अहमदनगर चक्शा हुसैन में भी बुधवार को उर्स-ए-मुबारक मनाया जायेगा।

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