आला हजरत सच्चे आशिक-ए-रसूल : अमज़द

मदरसा हुसैनिया में मनाया गया उर्स-ए-आला हजरत

गोरखपुर । मदरसा दारुल उलूम हुसैनिया दीवान बाजार में गुरुवार को आला हजरत इमाम अहमद रजा खां अलैहिर्रहमां का 101वां उर्स-ए-पाक अकीदत से मनाया गया। सबसे पहले मदरसे के छात्रों ने कुरआन ख्वानी की। इसके बाद नात शरीफ पढ़ी गई।

तकरीर करते हुए मो. तसव्वुर हुसैन ने कहा कि आला हजरत ने पूरी ज़िन्दगी अल्लाह व रसूल की इताअत व फरमाबरदारी में गुजारी। ‘आला हज़रत’ पैगंबर-ए-आज़म हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम पर जानो दिल से फ़िदा व क़ुर्बान थे।

मो. फैय्याज अहमद ने कहा कि आला हज़रत शरीअत व सुन्नत के जबरदस्त आलिम थे। सहाबा-ए-किराम और अहले बैत के आशिक़-ए-सादिक और वफादार गुलाम थे। आला हज़रत ख़ुलफ़ा-ए-राशिदीन हज़रत अबुबक्र, हज़रत उमर, हज़रत उस्मान ग़नी, हज़रत अली के सच्चे जांनिसार और मदह ख़्वां थे।

मो. इरशाद निज़ामी ने कहा कि आला हजरत ने फि़त्ना और फसाद के जमाने में मुसलमानों को उनका ईमान बचाने में मदद की। आला हजरत अहले सुन्नत वल जमात के सच्चे रहनुमा हैं। जिनकी तालीम ने 14सौ साल से चले आ रहे दीन-ए-इस्लाम को ताकत दी। उनकी किताबें व उनका नातिया कलाम ‘हदाएके बख्शिश’ पूरी दुनिया में मशहूर है।

मो. अब्दुल कय्यूम ने कहा कि मिस्र की विश्वविख्यात अल अज़हर यूनिवर्सिटी द्वारा आला हजरत की किताबों का अनुवाद कराकर पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। पूरी दुनिया में आला हजरत की जिंदगी, किताबों व फतावों पर रिसर्च किया जा रहा है। आज पूरी दुनिया में उर्स-ए-आला हजरत मनाया जा रहा है। जो इस बात का सबूत है कि आज दुनिया के हर कोने में आला हजरत के चाहने वाले मौजूद हैं। आला हजरत का “फतावा रजविया” इस्लामी कानून (फिक्ह हनफ़ी) का इंसाइक्लोपीडिया है।

मो. अमज़द अली ने कहा कि आला हजरत एक सच्चे आशिक-ए-रसूल थे। कभी भी आपने रसूल-ए-पाक हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम, सहाबा और आले रसूल की शान में मामूली से तौहीन को भी पसन्द नहीं किया। आला हजरत ने सदा इत्तेहाद, इत्तेफाक, मेल मोहब्बत का संदेश दिया। आला हजरत मिल्लत में नइत्तेफाकी पसन्द नहीं करते थे। आला हजरत न सिर्फ एक धर्मगुरू थे बल्कि एक महान समाज सुधारक भी थे।

अंत में कुल शरीफ की रस्म हुई। सलातो सलाम पढ़कर दुआ ख्वानी की गई। शीरीनी बांटी गई। इस मौके पर प्रधानाचार्य हाफिज नज़रे आलम कादरी, मौलाना इदरीस निज़ामी, सूफी निसार अहमद, हाफिज इस्हाक, हाफिज मो. मुजम्मिल खान, मौलाना रियाजुद्दीन, शाहिद हुसैन, सद्दाम हुसैन, मो. जुनैद रज़ा, गुलाम एमादुद्दीन, हाफिज महमूद रज़ा, हाफिज रहमत अली निज़ामी, इमाम हसन, सकलैन रज़ा, मो. आज़म, नवेद आलम, रेहान, अजमत अली, नसीम खान आदि मौजूद रहे।

नूरी मस्जिद तुर्कमानपुर में कुल शरीफ आज, बंटेगा लंगर

नूरी मस्जिद तुर्कमानपुर में 25 अक्टूबर शुक्रवार को ‘चौदहवीं सदी हिज़री के मुजद्दिद आला हजरत इमाम अहमद रजा खां अलैहिर्रहमां’ का 101वां उर्स-ए-पाक अदबो एहतराम के साथ मनाया जायेगा। संयोजक शाबान अहमद व अलाउद्दीन निज़ामी ने बताया कि सुबह फज्र की नमाज के बाद कुरआन ख्वानी होगी। दोपहर 2:38 बजे नूरी मस्जिद तुर्कमानपुर में कुल शरीफ की रस्म अदा की जायेगी। इसके बाद अकीदतमंदों में एक कुंतल लंगर बांटा जायेगा। बेलाल मस्जिद इमामबाड़ा अलहदादपुर व मदरसा दारुल उलूम अहले सुन्नत फैजाने मुबारक खां शहीद नार्मल में भी उर्स-ए-आला हजरत मनाया जायेगा।

मदरसा मजहरुल उलूम घोसीपुरवा में जलसा कल

मदरसा दारूल उलूम अहले सुन्नत मजहरूल उलूम घोसीपुरवा में आला हजरत इमाम रजा खां अलैहिर्रहमां का 101वां उर्स-ए-पाक 26 अक्टूबर शनिवार को सुबह 9:00 बजे से मनाया जायेगा।

इस मौके पर जलसा होगा। जिसमें झारखंड के मौलाना मो. ताहिर, मौलाना हारुन मिस्बाही, कारी मो. तनवीर अहमद कादरी तकरीर करेंगे। कुल शरीफ की रस्म दोपहर 2:38 बजे अदा की जायेगी। वहीं नूरी मस्जिद तुर्कमानपुर के निकट रात 8:00 बजे से जलसा होगा। जिसमें पीरे तरीकत मौलाना मो. हबीबुर्रहमान व मौलाना खुर्शीदुल इस्लाम का तकरीर होगी। नात शरीफ कारी सनाउर्रहमान निज़ामी पेश करेंगे।