इंसानियत की मिसाल बने पूर्व CMO डॉक्टर एस.एन. सोनकर

डॉक्टर एस.एन. सोनकर




डॉक्टर एस.एन. सोनकर (DR. S.N.SONKAR) जैसे लोग हैं जिनकी वजह से चिकित्सा और चिकित्सक दोनों की मर्यादा और स्वाभिमान बरकरार है

लखनऊ। आज विज्ञान ने बहुत तरक्की कर ली है, विज्ञान और चिकित्सा के क्षेत्र में नए-नए आधुनिक संसाधन आ गए है लेकिन इस बदलते दौर में जहां चिकित्सा के क्षेत्र में आधुनिक संसाधनों की भरमार है, हर मर्ज का इलाज पहले के मुकाबले मौजूद है, वैज्ञानिक चिकित्सा के क्षेत्र में एक से एक बेहतरीन और आला दवाएं बना रहे हैं वही धरती के भगवान कहे जाने वाले चिकित्सक अब मरीजों की सेवा के बदले व्यापार करने लगे हैं। चिकित्सक जिस पर धरती के लोगों का विश्वास है अब धीरे-धीरे वह विश्वास खोता जा रहा है, लेकिन आज भी हमारे देश में डॉक्टर एस.एन. सोनकर जैसे लोग हैं जिनकी वजह से चिकित्सा और चिकित्सक दोनों की मर्यादा और स्वाभिमान बरकरार है।

डॉक्टर एस.एन. सोनकर ने एमबीबीएस करने के बाद जनरल सर्जरी के क्षेत्र में अपनी एक पहचान बनाई। डॉ सोनकर पूर्व सीनियर रेजिडेंट ट्रामा सेंटर लखनऊ रहे और उसके बाद डॉक्टर सोनकर पूर्व सीएमओ ट्रामा सेंटर लखनऊ भी रहे। डॉक्टर एस.एन. सोनकर ने हमेशा गरीबों व जरूरतमंदों का इलाज बिना किसी भेदभाव के अपनी जिम्मेदारी समझते हुए किया।

मौजूदा वक़्त में डॉक्टर सोनकर राजधानी लखनऊ में अपना एक निजी हॉस्पिटल न्यू वर्षा हॉस्पिटल एवं ट्रामा सेंटर के नाम से चलाते है। निजी हॉस्पिटल चलाने के बावजूद भी वह मानव सेवा से पीछे नहीं हटे और कभी भी उन्होंने अपने हॉस्पिटल में आने वाले मरीज़ो को यहां तक कि जिन लोगों के पास इलाज के पैसे भी नहीं होते थे उनका भी इलाज़ करने से मना नहीं किया बल्कि हॉस्पिटल में मरीजों के साथ जो तीमारदार आते हैं उनके भी खाने-पीने का इंतजाम कराते साथ ही डॉक्टर सोनकर तीमारदारों को गैस सिलेंडर चूल्हा और खाना पकाने की जगह तक मुहैया कराते हैं।


कोरोना काल में जहां ज्यादातर अस्पताल और पैथोलॉजी लोगों से पैसा वसूलने और अपनी जेब भरने का काम कर रहे थे वही डॉक्टर सोनकर अपने हॉस्पिटल और अपनी चिकित्सा के हुनर से लोगों का मुनासिब पैसो में इलाज कर रहे थे और देशवासियों को कोरोना से जागरूक करते हुए उनका सहयोग कर रहे थे। लॉकडाउन के समय जो जरूरतमंद और परेशान लोग थे उनके घरों तक राशन पहुंचाने का काम भी डॉक्टर सोनकर ने किया।

आज कोरोना योद्धा के नाम पर न जाने कितने लोगों को कोरोना योद्धा सम्मान दिया जा रहा है जो कोरोना काल में कभी घर से बाहर ही नहीं निकले और किसी को एक बिस्कुट का पैकेट तो क्या एक गिलास पानी तक नहीं पिलाया आज ऐसे लोगों को कोरोना योद्धा सम्मान से सम्मानित किया जा रहा है यह बड़े शर्म की बात है।

डॉक्टर सोनकर जैसे लोग ही कोरोना योद्धा सम्मान के काबिल हैं लेकिन डॉक्टर सोनकर ने सम्मान या अवार्ड से प्रेम नहीं किया और ना ही उसकी लालच में कोई काम नहीं किया बल्कि जरूरतमंदों गरीबों और मरीजों के चेहरों पर आई हुई मुस्कुराहट ही उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान सबसे बड़ा अवार्ड है।

डॉक्टर एस.एन. सोनकर

जब तक धरती पर डॉक्टर सोनकर जैसे लोग हैं तब तक चिकित्सा के क्षेत्र में चिकित्सकों की इज्जत और उनकी मान मर्यादा बनी रहेगी और इस प्रोफेशन पर लोगों का भरोसा बना रहेगा। डॉक्टर सोनकर जैसे लोग चिकित्सकों की इज्जत और उनकी मान मर्यादा को बनाए हुए हैं जो भी जरूरतमंद या ग़रीब मरीज डॉक्टर सोनकर के हॉस्पिटल पहुंचता है यदि उसके पास इलाज के पैसे नहीं है या कम है तो भी उसके साथ डॉक्टर सोनकर कोई दुर्व्यवहार नहीं करते या उस पर कोई दबाव नहीं बनाते बल्कि अपना इंसानी फर्ज समझते हुए अपने तौर से जो मदद हो सकती है और जो बेहतर से बेहतर इलाज हो सकता है वह फौरन शुरू कर देते।

चिकित्सा के क्षेत्र में ऐसे ही सुविचार रखने वाले डॉक्टरों को ही इस धरती का भगवान कहा जाता है। हम ईश्वर से कामना करते हैं कि डॉक्टर सोनकर को ईश्वर हमेशा स्वस्थ और खुश रखे और उनको लंबी और दीर्घायु दे ताकि वह इसी तरह गरीबों जरूरतमंदों का इलाज करते रहें और इंसानियत के जज्बे को हमेशा जिंदा रखें।

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