तिरंगे के महत्व को समझाया भागवत ने

आज गणतन्त्र दिवस के 71 वे वर्षगांठ पर पूरे देश में इस पर्व को बड़े ही धूम धाम से मनाया जा रहा है

गोरखपुर । पांच दिवसीय प्रवास के दौरान आज चौथे दिन गणतंत्र दिवस पर सर संघचालक मोहन भागवत ने सलामी लेकर झंडा रोहण कर राष्ट्रगीत गान कर मां भारती के  चित्र पर माल्यार्पण किया। इस अवसर पर मोहन भागवत ने तिरंगे के तीन रंगों की विशेषता के बारे में बताया ।

आज गणतन्त्र दिवस के 71 वे वर्षगांठ पर पूरे देश में इस पर्व को बड़े ही धूम धाम से मनाया जा रहा है, गोरखपुर के लिए आज अद्भुत पल इसलिए भी है, कि क्योकि सर संघचालक मोहन भागवत भी पिछले चार दिनों से सरस्वती शिशु माध्यमिक विद्यालय में प्रवास के दौरान आज गणतन्त्र दिवस पर मोहन भागवत ने ध्वजा रोहण किया और देश के नाम संदेश भी दिया, मोहन भागवत ने कहा कि प्रकाश की उपासना और त्याग करने वाला भारत हमें खड़ा करना है।

भगवा रंग तिरंगे में इसका प्रतीक है. भारत त्याग का प्रतीक है. हम अपनों के लिए जीते हैं. अपने वे हैं जो गरीबी और पीड़ा में हैं. उनके लिए सब कुछ समर्पण करना ही भक्ति है. भारत के नागरिकों का कर्तव्य है कि त्याग का जीवन जीकर दूसरों की सेवा करें।सब लोग देते हैं इसलिए विश्व चलता है। दूसरा रंग सफेद त्याग का प्रतीक है. ज्ञान का प्रतीक है. ज्ञानी तो रावण भी था. लेकिन अच्छाई के साथ ज्ञान का इस्तेमाल करने वाला ही सही है.।

घमंड लेकर नहीं चलना है। हम अपने देश को समृद्ध देश बनाएँगे जो दुनिया को अच्छा बनाने के लिए काम करेंगे। हमें भी देना है. सब कुछ देने के बाद भी देने की इच्छा नहीं जाती है.उसके हिसाब से तंत्र को चलाना है. हम सबको उसको अपना समझकर इसका पालन करना होगा. सरसंघचालक ने कहा कि लोग धर्म को पूजा के साथ जोड़ते हैं. पूजा उसका छोटा सा अंग है.ये प्रजातंत्र है।

हमें इस देश को चलाना है. बाबा साहेब ने कहा था कि हमे इसका पालन करना है।स्वतंत्र में जो स्व जो है मतलब खुद से चलाना है. परोपकारी भारत खड़ा करना इसकी पूर्ति करना है।जिस दिन संविधान को हमने स्वीकार किया वो हमारा स्वभाव है। उदबोधन समाप्त करने के बाद सरसंघचालक मोहन भागवत सरस्वती शिशु मंदिर माध्यमिक विद्यालय के गणतंत्र दिवस के सम्मान में छात्र छात्राओं को संबोधित करने पहुंचे ।