दीन-ए-इस्लाम का पैगाम सारी इंसानियत के लिए है : मुफ्तिया रेहाना

 

अलहदादपुर में महिलाओं का जलसा-ए-ईद मिलादुन्नबी

गोरखपुर । मदरसा कादरिया तजवीदुल कुरआन निस्वां की ओर से बेलाल मस्जिद इमामबाड़ा अलहदादपुर के निकट रविवार को महिलाओं का जलसा-ए-ईद मिलादुन्नबी हुअा।संचालन आलिमा कनीज़ फातिमा ने किया।

विशिष्ट अतिथि आलिमा नाज़नीन फातिमा ने कहा कि पैगंबर-ए-आज़म हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम पूरी कायनात के लिए रहमत हैं और मुसलमानों पर तो बहुत मेहरबान हैं। पैगंबर-ए-आज़म की मोहब्बत असल ईमान है। जब तक पैगंबर-ए-आज़म की मोहब्बत मां-बाप, औलाद और सारी दुनिया से ज्यादा न हो आदमी कामिल मुसलमान नहीं हो सकता।

मुख्य अतिथि मुफ्तिया रेहाना फातिमा ने कहा कि पैगंबर-ए-आज़म की ताज़ीम और तौकीर अब भी उसी तरह फर्जे ऐन है जिस तरह उस वक्त थी कि जब पैगंबर-ए-आज़म हमारी जाहिरी आंखों के सामने थे। हमें चाहिए कि हम पैगंबर-ए-आज़म की पैरवी करें। दीन-ए-इस्लाम का पैगाम सारी इंसानियत के लिए है।

विशिष्ट अतिथि आलिमा सैयदा फातिमा ने कहा कि दीन-ए-इस्लाम कहता है कि हमें एक अल्लाह की इबादत करनी चाहिए जो हम सबका मालिक है। दीन-ए-इस्लाम कहता है कि ऐ मुसलमानों जब नमाज पढ़ो तो एक दूसरे से कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहो क्योंकि तुम सब आपस मे बराबर हो तुम में से कोई छोटा या बड़ा नहीं है, लेकिन जो परहेजगार व इबादतगुजार है उसका रुतबा बुलंद है।

विशिष्ट अतिथि आलिमा रूकय्या फातिमा ने कहा कि कुरआन-ए-पाक दुनिया के हर इंसान के लिए हर समाज के लिए सही रास्ते पर चलने का और एक बेहतरीन जिंदगी जीने का रास्ता है। हर इंसान को कुरआन पढ़ना चाहिए और उसे समझना चाहिए। हर दुआ उस वक़्त तक पर्दा-ए -हिजाब (छुपी) में रहती है जब तक पैगंबर-ए-आज़म हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम और आपके अहले बैत पर दरूद ना भेजा जाए।। जो शख्स दरुदो सलाम को ही अपना वजीफ़ा बना लेता है अल्लाह उसके दुनिया और आखिरत के काम अपने ज़िम्मे ले लेता है। दरूदो सलाम मजलिसों की ज़ीनत है। दरूद शरीफ़ तंगदस्ती को दूर करता है। दरूदो सलाम से पैगंबर-ए-आज़म की मोहब्बत का जज़्बा और बढ़ता है। दरूदो सलाम पढ़ने वाले को किसी की मुहताजी नहीं होती।

आखिर में सलातो सलाम पढ़कर दुआ मांगी गई। शीरीनी बांटी गई। जलसे में कासिफा बानो, नौशीन फातिमा, कनीज़ फातिमा सहित तमाम महिलाएं मौजूद रहीं।

दीन-ए-इस्लाम के महान प्रचारक थे हज़रत सैयदना इमाम मालिक

चिश्तिया मस्जिद बक्शीपुर व सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफ़रा बाजार में रविवार को हज़रत सैयदना इमाम मालिक बिन अनस अलैहिर्रहमां, हज़रत अलाउद्दीन अली अहमद साबिर कलियरी अलैहिर्रहमां, हज़रत ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी अलैहिर्रहमां का उर्स-ए-पाक कुरआन ख्वानी, फातिहा ख्वानी व दुआ ख्वानी करके मनाया गया।

उर्स में चिश्तिया मस्जिद के इमाम हाफिज महमूद रज़ा कादरी ने कहा कि दीन-ए-इस्लाम व पैगंबर-ए-आज़म हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम की शिक्षाओं के महान प्रचारक हज़रत सैयदना इमाम मालिक बिन अनस, हज़रत अलाउद्दीन अली अहमद साबिर, हज़रत ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी थे। दीन-ए-इस्लाम व शांति की शिक्षा तीनों के जीवन का मकसद थी। सृष्टि के निर्माता अल्लाह से मिलाना और इंसान को इंसानियत के बारे में बताना और चलाना उनका विशेष कार्य था। उक्त तीनों बुजुर्ग अल्लाह के महबूब बंदे थे, उन्होंने दीन-ए-इस्लाम का पैगाम अवाम तक पहुंचाया। पूरी जिंदगी शरीयत की पाबंदी की।

सब्जपोश मस्जिद के इमाम हाफिज रहमत अली निज़ामी ने कहा कि हज़रत सैयदना इमाम मालिक बिन अनस का विसाल 14 रबीउल अव्वल 179 हिजरी में हुआ। मदीना शरीफ में मजार है। हज़रत मखदूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर कलियरी का विसाल 13 रबीउल अव्वल 690 हिजरी में हुआ। आपका मजार कलियर, रुड़की (उत्तराखंड) में है। हज़रत ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी का विसाल 14 रबीउल अव्वल 633 हिजरी में हुआ। मजार महरौली (नई दिल्ली) में हैं।

सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार में इमाम मालिक का उर्स-ए-पाक मनाया गया।
सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार में इमाम मालिक का उर्स-ए-पाक मनाया गया।

अंत में सलातो सलाम पढ़कर मुल्को मिल्लत के लिए दुआ की गई। इस मौके पर मो. सैफ अली, समीर अली, महबूब आलम, शारिक अली, इमरान अली, इमाम हसन, फैजान, फुजैल, मुख्तार खान, तहसीन आलम, नेहाल आलम, इरफान खान आदि मौजूद रहे।

 

बस 1 क्लिक पर जानें देश-दुनिया की ताजा-तरीन खबरें Download करें संस्कार न्यूज़ चैनल की Application नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें या फिर play store पे sanskarnews सर्च करें- लेटेस्ट न्यूज़ अपडेट के लिए लाइक करें हमारा फेसबुक पेज- https://fb.com/sanskarnewslko/
Loading...