देव्या गिरि ने बताया शिवरात्रि का विशेष महत्व, डालीगंज में शिव बारात का भव्य स्वागत

देव्या गिरि

 महंत देव्या गिरि ने बताया 21 फ़रवरी को मनाई जाएगी महाशिवरात्रि 11 नदियों के जल से होगा मनकामेश्वर महादेव का जलाभिषेक,महाशिवरात्रि पर शुभ संयोग,इस शिव रात्रि पर 117 साल बाद शनि और शुक्र का दुर्लभ योग बन रहा है

ढोल, ताशा, नागफ़नी, डमरू, शंख की ध्वनि एवं हर-हर महादेव के जयकारे के साथ, महादेव के गण, साधु, औघड़, देव-दानव, बग्घियों पर सवार देवगण, भगवान विष्णु, राधा कृष्ण, हनुमान जी, ब्रह्म-सरस्वती एवं शिवगण चल पड़े देवों के देव आदि मनकामेश्वर की बारात को लेकर मार्ग में इस मौके पर बरातियों का लोगों ने स्वागत किया तो वहीं शिव की पूजा कर मन्नत भी मांगी। शिव बरात में पर भगवान शिव व पार्वती की झांकी निकली तो उनके साथ नाचते-गाते भूत-प्रेत और सैकड़ों शिवभक्तों ने जयकारों से माहौल को शिवमय कर दिया! अवसर था आदि मनकामेश्वर शिव महाबारात का।

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लखनऊ के डालीगंज स्थित प्राचीन शिवधाम मनकामेश्वर मठ-मंदिर की ओर से बुधवार को भव्य शिव बारात एवं शिव विवाह का आयोजन मठ-मंदिर की श्रीमहन्त देव्यागिरि के सानिध्य में किया गया। ये बारात अपराह्न 12 बजे मंदिर के मुख्य द्वार से निकल कर मनकामेश्वर चैराहा- डालीगंज, आईटी चौराह से पूर्व होते हुए पुनःमनकामेश्वर मठ-मंदिर पहुँची, जहाँ पर शिव-पार्वती विवाह का आयोजन किया गया। बारात में सबसे प्रथम मनकामेश्वर मठ-मंदिर ध्वज को के लेकर सेवादारों निकले। दिल्ली से आए रिदम अकादमी एवं पीयूष चावला ग्रुप ने भव्य शिव तांडव एवं शिव विवाह प्रस्तुत किया इस प्रस्तुति व बारात में अर्द्धनारीश्वर के रूप में पीयूष चावला बजरंगबली के रूप में मनीष बजरंगी काली जी के रूप में अनिकेत चावला राधा कृष्ण के रूप में क्रमशः आर्यन एवं किरण चावला, शंकर पार्वती के रूप में लकी राज एवं प्रीति सम्मिलित हुए।

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देव्या गिरि

21 फ़रवरी को प्रातः 2:30 बजे भस्म महाआरती एवं 3 बजे मनकामेश्वर महाआरती के बाद खुलेंगे मंदिर के मुख्य कपाट

बारात के समापन कर बाद मंदिर प्रांगण में बनाए गए सनातम संस्कृति के मण्डप और माड़ो के नीचे शिव महा विवाह सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर संपूर्ण मंदिर को फूलों एवं प्राकृतिक रंगों की रंगोली से सजाया गया था। मंदिर की ओर से सेवादार, डब्बू अग्रवाल, शुभम पंत, गजेंद्र सिंह, दीपू ठाकुर, अमित गुप्ता, तरुण जायसवाल, विभव श्रीवास्तव, गौरव मिश्रा, शिवा ठाकुर, नीरज निषात, अमित गुप्ता, जगदीश अग्रहरि, मोहित बाबादीन गीता पाण्डेय, किरण, ममता, माला, उपमा पाण्डेय, पिंकी सेठी, सीमा तिवारी, प्रतिमा श्रीवास्तव, वर्तिका, नीतू सिंह, नैना गिरि, गीता कश्यप, गीता निशात, कमलेश यादव आदि ने अपनी सहभागिता दी।

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देव्या गिरि

समस्त विश्व 21 फ़रवरी को महाशिवरात्रि का पर्व श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाएगा, इस अवसर पर 21 फ़रवरी को प्रातः 2 बजे देश एवं विदेश की नदियों एवं दिव्य जल स्रोतों से लाए गए 11 पवित्र एवं दिव्य जल से भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाएगा। गंगोत्री, यमनोत्री, अलखनंदा, प्रयागराज, अमरनाथ तीर्थ का जल, हर की पौड़ी का जल, कामाख्या देवी शक्तिपीठ का जल, कल्याणी नदी, बदरीनाथ के माणा गांव के निकट सरस्वती नदी का जल, कैलाश मानसरोवर का जल एवं गोमती के जल प्रमुख हैं। क्योंकि मनकामेश्वर महादेव आदि माँ गोमती के तट पर स्थित है इस लिए 51 कलश जल गोमती का होगा, इसके बाद बेसन, शहद, दही एवं भगवान का पूजन एवं स्नान होगा। प्रातः 2:30 बजे भस्मआरती व 3 बजे मुख्यआरती के बाद मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। संध्याकालीन आरती सायं 8 बजे मंदिर बजे होगी।

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देव्या गिरि

इस अवसर पर मनकामेश्वर मठ-मंदिर की महन्त देव्या गिरि ने बताया कि”इस बार महाशिवरात्रि पर कई तरह के शुभ संयोग का निर्माण हो रहा है जिसे बेहत शुभ माना जाता है। इस शिव रात्रि पर 117 साल बाद शनि और शुक्र का दुर्लभ योग बन रहा है। महाशिवरात्रि पर शनि स्वयं की राशि मकर और शुक्र अपनी उच्च राशि मीन में रहेगा। इससे पहले 1903 में इन ग्रहों का ऐसा संयोग बना था।इसके अलावा महाशिव रात्रि पर शनि और चंद्रमा के संयोग से शश योग बन रहा है। इस संयोग में शिव आराधना का विशेष फल मिलता है। चंद्रमा मन का और शनि ऊर्जा का कारक है। महाशिवरात्रि पर सर्वार्थसिद्धि योग भी बन रहा है। इस योग में शिव-पार्वती का पूजन श्रेष्ठ माना गया है।”