तीसरे खलीफा हजरत उस्मान ग़नी की यौमे शहादत पर हुई फातिहा ख्वानी

HAZRAT USMAN GHANI

दीन-ए-इस्लाम के तीसरे खलीफा अमीरुल मोमिनीन हजरत उस्मान गनी (HAZRAT USMAN GHANI) रजियल्लाहु अन्हु की यौमे शहादत पर हुई फातिहा व दुआ ख्वानी

गोरखपुर। तंजीम उलेमा-ए-अहले सुन्नत की ओर से नार्मल स्थित हजरत मुबारक खां शहीद मस्जिद में मंगलवार को दीन-ए-इस्लाम के तीसरे खलीफा अमीरुल मोमिनीन हजरत उस्मान गनी (HAZRAT USMAN GHANI) रजियल्लाहु अन्हु की यौमे शहादत पर फातिहा व दुआ ख्वानी हुई।

इस मौके पर मौलाना मकसूद आलम मिस्बाही ने कहा कि अमीरुल मोमिनीन हज़रत उस्मान ग़नी (HAZRAT USMAN GHANI) ‘पैगंबर-ए-आज़म हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम’ के दामाद व दीन-ए-इस्लाम के तीसरे ख़लीफ़ा हैं, जिन्हें पैगंबर-ए-आज़म ने जिंदगी में ही जन्नती होने की खुशखबरी दी।

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HAZRAT USMAN GHANI
हजरत मुबारक खां शहीद मस्जिद नार्मल में हजरत उस्माने ग़नी की यौमे शहादत मनायी गई व् तकरीर करते मौलाना मकसूद आलम मिस्बाही।

आप पैगंबर-ए-आज़म पर उतरने वाली आयतों को लिखा करते थे। दीन-ए-इस्लाम के पहले खलीफा अमीरुल मोमिनीन हज़रत अबूबक्र रजियल्लाहु अन्हु की दावत पर आप ने दीन-ए-इस्लाम क़ुबूल फ़रमाया। आपके निकाह में पैगंबर-ए-आज़म की दो साहबज़ादियां एक के बाद एक आईं।

आपके जज़्बा-ए-दीन, सख़ावत और अल्लाह की राह में ख़र्च करने के अनगिनत वाक़िअ़ात आज भी तारीख़ में दर्ज है। हदीस में है कि पैगंबर-ए-आज़म ने फरमाया हर नबी का एक रफ़ीक़ (साथी) है और मेरा रफ़ीक़ यानी जन्नत में उस्मान इब्ने अफ़्फ़ान है। आपको कुरआन शरीफ़ की तिलावत के दौरान 18 ज़िलहिज्जा बरोज़ जुमा को शहीद कर दिया गया।

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अंत में इसाले सवाब पेश करते हुए महफिल समाप्त हुई। सलातो सलाम पेश कर दुआ मांगी गई। इस मौके पर जमशेद अहमद, कारी महबूब रज़ा, मौलाना कैसर रज़ा, कुतबुद्दीन, नबी हुसैन, बदरे आलम, हाजी नियाज, मो. अशरफ रज़ा, गुलाम वारिस, अब्दुल अजीज, शाह आलम आदि मौजूद रहे।

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