लखीमपुर शहर मे सक्रिय पैथालोजी कर रहे मरीजों के जीवन से खिलवाड़

सत्यम पैथॉलॉजी में जांच की रिपोर्ट दी जा रही है गलत

“सत्यम डायग्नोस्टिक सेंटर” में जांच की रिपोर्ट मिलती है गलत

लखीमपुर-खीरी। होशियार कहीं आप डॉक्टर की सलाह पर अपनी जांचे कराने सत्यम डायग्नोस्टिक सेंटर तो नहीं जा रहे है, अगर जा रहे तो बिल्कुल भी मत जाइए, क्योंकि आपकी जांच की रिपोर्ट जांच करने के बाद गलत दे दी जाएगी, जिसके कारण आप संतुष्ट तो हो जाएंगे पर अंदर ही अंदर आपकी बीमारी भयानक रुप ले लेगी, जिससे आपकी जान भी जा सकती है, क्योंकि यहां ऐसा कई बार हो चुका है, जहां मोटी रकम लेकर जांचें तो की जाती है मगर अक्सर करके रिपोर्ट गलत दे दी जाती है जिसके कई मामले प्रकाश में आ चुके हैं

शहर के सत्यम डायग्नोस्टिक सेंटर के दो मामले अभी हाल ही में अखबार द्वारा प्रकाशित किए गए थे। जहां पहले मरीज को बिल्कुल ठीक-ठाक बताया गया, लेकिन उसके पित्त में पथरी निकली, वहीं दूसरे मामले में पित्त में पथरी बताई गई तो दूसरी जांच में कैंसर निकला। शुक्र था डाक्टरों को जिनकी वजह से मरीज को समय रहते अपनी बीमारी का पता चल गया। वरना इनका अंजाम कितना भयानक होता इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

हाल ही में इसी पैथालॉजी के दो और मामले प्रकाश में आए है

पहला मामला –  डॉक्टर द्वारा ओम वर्मा को पित्त में पथरी होने का अंदेशा जताकर अल्ट्रासाउंड करवाने की सलाह दी थी, किस्मत खराब मरीज की जो वह सत्यम डायग्नोस्टिक सेंटर पहुँच गया। जहां मोटी रकम लेकर अल्ट्रासाउंड तो किया गया लेकिन रिपोर्ट सही नहीं दी गई। जांच के बाद रिपोर्ट सामान्य दे दी गई। नार्मल रिपोर्ट मिलने पर चिकित्सक ने भी उसका इलाज शुरू नहीं किया। कुछ दिन बाद फिर से ओम वर्मा को दर्द शुरू हुआ और उसने फिर चिकित्सक को दिखाने के बाद कहीं अन्यंत्र जांच करवाई तो उसे पता चला कि उसके पित्त में 12.5 एमएम की पथरी है।

दूसरा मामला – ओम वर्मा की तरह राकेश पाण्डेय भी इसी पैथालॉजी के शिकार हुए। राकेश की भी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट नार्मल दे दी गई। दूसरी जगह जांच करवाने पर उसे पता चला कि उसके दोनों गुर्दो में कई पथरियां है।

सत्यम डायग्नोस्टिक सेंटर द्वारा दी जा रही गलत जांच रिपोर्टें लोगो की जिन्दगियो के साथ खिलवाड़ तो कर ही रहीं है, बल्कि उनका मानसिक व आर्थिक शोषण भी कर रही है। इस बाबत जब सत्यम पैथालॉजी के मैनेजर ऋषि कुशवाहा से वार्ता की गई तो उन्होंने बताया कि लोग भोजन करके अल्ट्रासाउंड व सीटी करवाने आते है, जिसके कारण ही उनकी रिपोर्ट सही नहीं आती है, जबकि सवाल यह उठता है कि आखिर क्यों इस तरह के मरीजों का अल्ट्रासाउंड व सीटी किया जाता है, क्यों नहीं बताया जाता है कि वह खाली पेट आकर ही जांच करवाए। इससे तो लगताा है कि उक्त सेंटर अधिक पैसा कमाने के लालच में मरीजों के साथ खिलवाड़ कर रहा है।

इस सम्बन्ध में सीएमओ खीरी मनोज अग्रवाल से वार्ता की गई तो उन्होंने बताया कि “पूरे प्रकरण की जांच करवाई जाएगी और इस तरह चल रहे पैथालॉजी सेंटरों पर सख्त से सख्त करवाई की जाएगी”।