इमाम हुसैन की याद में छात्रों में बांटी गई नि:शुल्क दीनी किताब

किताब बांटना बहुत नेक काम है। इससे छात्रों को इल्म हासिल करने में फायदा होगा : मुफ्ती मो. अजहर शम्सी

गोरखपुर । हजरत सैयदना इमाम हुसैन रजियल्लाहु अन्हु व शोहदा-ए-कर्बला की याद में तंजीम कारवाने अहले सुन्नत ने शहर के मदरसों में पढ़ने वालों छात्रों के बीच 72 दीनी किताबें बांटने का लक्ष्य रखा है। उसी क्रम में सोमवार को मदरसा जामिया रज़विया मेराजुल उलूम चिलमापुर में ‘ज़दीद फिक्ही मालूमात’ किताब मदरसों के छात्रों में नि:शुल्क बांटी गई। शहर के अन्य मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों के बीच भी जल्द किताबें बांटी जायेगी।

मुफ्ती मो. अजहर शम्सी ने कहा कि किताब बांटना बहुत नेक काम है। इससे छात्रों को इल्म हासिल करने में फायदा होगा। छात्रों को चाहिए कि वह किताबों से गहरी दोस्ती करें। किताबों से दोस्ती करने से इल्म में इज़ाफा होगा। छात्रों में नि:शुल्क किताब बांटना, पौधारोपण, दूसरों की मदद करना, भूखों को खाना खिलाना, मजबूर की मदद करना, जरुरतमंद की हाजत पूरी करना आदि कार्य शहीद-ए-कर्बला की बारगाह में सच्ची खिराजे अकीदत है। मदरसे के प्रधानाचार्य मौलाना शौकत अली नूरी ने इल्म व आलिम की अहमियत बयान की। वहीं तंजीम ने तुर्कमानपुर में हजरत इमदाद शाह व मुबारक खां शहीद कब्रिस्तान में पौधारोपण किया।

इस मौके पर मो. मोदस्सिर रज़ा, मो. अख्लाक, मो. जहांगीर, मो. चांद, मो. दिलकश, मो. जर्रार बारी, अफरोज अहमद, शहादत हुसैन, मो. अरमान, जमालुद्दीन, मो. मुर्तुजा, मौलाना मो. असलम रज़वी, मनोव्वर अहमद, एडवोकेट तौहीद अहमद, एडवोकेट शुएब अहमद, आसिम जमाल आदि मौजूद रहे।

कर्बला दुनिया-ए-इस्लाम की सबसे दर्दनाक दास्तान : मुफ्ती अख्तर

माह-ए-महुर्रम की पहली तारीख से शहर की विभिन्न मस्जिदों में जारी महफिल ‘जिक्रे शोहदा-ए-कर्बला’ के तहत सोमवार को हजरत सैयदना इमाम हुसैन रजियल्लाहु अन्हु की फज़ीलत बयान हुई।

मुकीम शाह जामा मस्जिद बुलाकीपुर में मौलाना रियाजुद्दीन कादरी ने कहा कि हजरत सैयदना इमाम हुसैन ने दीन-ए-इस्लाम के सिद्घांत, न्याय, धर्म, सत्य, अहिंसा, सदाचार और अल्लाह के प्रति अटूट आस्था को अपने जीवन का आदर्श माना था और वे उन्हीं आदर्शों के अनुसार अपना जीवन व्यतीत करते रहे। हजरत सैयदना इमाम हुसैन मक्का से सपरिवार कूफा के लिए निकल पड़े लेकिन रास्ते में यजीद के षडयंत्र के कारण उन्हें कर्बला के मैदान में रोक लिया गया। तब इमाम हुसैन ने यह इच्छा प्रकट की कि मुझे सरहदी इलाके में चले जाने दो, ताकि शांति और अमन कायम रहे, लेकिन जालिम यजीद न माना। आखिर में सत्य के लिए लड़ते हुए हजरत इमाम हुसैन शहीद हुए।

बहादुरिया जामा मस्जिद रहमतनगर में मौलाना अली अहमद ने कहा कि इल्म व फज्ल व तमाम अहले तारीख का एक राय फैसला है कि हजरत सैयदना इमाम हुसैन इल्म व फज्ल में बड़ा मर्तबा रखते थे। आपके दौर के बड़े-बड़े आलिम आपसे फतवा दर्याफ्त करते थे। आपकी तकरीर व तहरीर (लेखनी) की कोई नजीर (उदाहरण) नहीं मिलती। आज भी आपकी तकरीरें व खुत्बात तारीख के सफ़हात (पन्नों) की जीनत (खूबसूरती) बने हुए है। जिन्हें पढ़कर आपके जोरे बयान और फसाहत व बलागत का अंदाजा होता है। हजरत इमाम हुसैन ने भी अपने बड़े भाई हजरत सैयदना इमाम हसन के साथ पच्चीस हज अदा किए।

तंजीम कारवाने अहले सुन्नत ने मदरसा जामिया रजविया मेराजुल उलूम चिलमापुर में हजरत इमाम हुसैन की याद में छात्रों में नि:शुल्क किताब बांटी।
तंजीम कारवाने अहले सुन्नत ने मदरसा जामिया रजविया मेराजुल उलूम चिलमापुर में हजरत इमाम हुसैन की याद में छात्रों में नि:शुल्क किताब बांटी।

गाजी मस्जिद गाजी रौजा में मुफ्ती अख्तर हुसैन ने कहा कि जालिम यजीद के अत्याचार बढ़ने लगे तो उसने पैगंबर-ए-आज़म हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के नवासे हजरत सैयदना इमाम हुसैन से अपने कुशासन के लिए समर्थन मांगा और जब हजरत इमाम हुसैन ने इससे इंकार कर दिया तो उसने इमाम हुसैन को कत्ल करने का फरमान जारी कर दिया। कर्बला के तपते रेगिस्तान में तीन दिन के भूखे प्यासे हजरत इमाम हुसैन व उनके 72 जांनिसारों को शहीद कर दिया गया। अहले बैत पर बेइंतहा जुल्म किए गए। यह दुनिया-ए-इस्लाम की सबसे दर्दनाक दास्तान है। जिसे सुनकर बड़े-बड़े बहादुरों के दिल हैबत से कांप जाते हैं।

कब्रिस्तान मुबारक खां शहीद नार्मल व मजार हजरत इमदाद शाह तुर्कमानपुर में शहीद-ए-कर्बला की याद में लगाये गये पौधे।
कब्रिस्तान मुबारक खां शहीद नार्मल व मजार हजरत इमदाद शाह तुर्कमानपुर में शहीद-ए-कर्बला की याद में लगाये गये पौधे।

अगर इमाम हुसैन की जगह रुस्तम-ए-वक्त भी होता तो यह सदमा बर्दाश्त न कर पाता, लेकिन इमाम हुसैन के कदमों में लग्जिश तक न आई। आपने अपनी व अपने जांनिसारों की कुर्बानी देकर दीन-ए-इस्लाम को बचा लिया। इमाम हुसैन, उनकी औलाद व जांनिसारों की कुर्बानी को रहती दुनिया तक मुसलमान भुला नहीं सकते।

मस्जिदों में बयां की गई हजरत सैयदना इमाम हुसैन की फज़ीलत

इसी तरह नूरी मस्जिद तुर्कमानपुर, एक मीनारा मस्जिद बेनीगंज, बेलाल मस्जिद इमामबाड़ा अलहदादपुर, मक्का मस्जिद मेवातीपुर इमामबाड़ा, दारुल उलूम अहले सुन्नत मजहरुल उलूम घोसीपुरवा, अंधियारी बाग दरगाह मिस्कीन शाह अलैहिर्रहमां, मस्जिद सुप्पन खां (कुरैशिया) खूनीपुर, मस्जिद हरमैन रायगंज, गौसिया मस्जिद छोटे काजीपुर, चिश्तिया मस्जिद बक्शीपुर, दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद मस्जिद नार्मल, सुन्नी जामा मस्जिद सौदागार मोहल्ला, मियां बाजार इमामबाड़ा मर्सिया खाना, इमामबाड़ा पुराना गोरखपुर, कलशे वाली मस्जिद के पास में भी ‘जिक्रे शोहदा-ए-कर्बला’ की महफिल हुई।

कर्बला की याद में जलसा हुआ

शोहदा-ए-कर्बला की याद में सोमवार को बड़गो में जलसा हुआ। तिलावत मौलाना उस्मान बरकाती ने की। मौलाना तालीम रज़ा और सद्दाम रज़ा ने अपनी नात व मनकबत से कर्बला के वाकिए की याद ताज़ा कर लोगों की आँखे नम कर दी। मौलाना आस मोहम्मद ने शहीद-ए-आज़म हजरत सैयदना इमाम हुसैन की शान व अजमत पर रौशनी डाली। इस मौके पर जियाउल्लाह, शहादत, तबरेज़, खालिद, सलमान, जुबेर, सरवर, लल्ली, हबीब, महताब, पप्पू, फैज़ान आदि मौजूद रहे।

अखाड़ों में हुई प्रतियोगिता

माह-ए-मुहर्रम की दूसरी तारीख की रात में रसूलपुर चौक व अन्य अखाड़ों के बीच विभिन्न प्रतियोगिता हुई। मेजबान खिलाड़ियों के उस्ताद हाजी मोहिउद्दीन के साथ-साथ विभिन्न मोहल्लों के अखाड़ा खिलाड़ियों ने अपने हुनर का प्रदर्शन किया। खिलाड़ियों ने लाठी, बल्लम, फरसा, तलवार व बरेठी आदि के जरिए जबरदस्त खेल दिखाया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को सम्मानित किया गया। वहीं मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में बच्चे से लेकर बड़े ऊंट की सवारी का लुत्फ उठाते नज़र आ रहे है। इमामबाड़ों पर ढ़ोल ताशा बजाया जा रहा है।

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