बजट के आने के बाद सोना हुआ महंगा,जानिए सोने की नई कीमत

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सरकार ने सोने और अन्य बहुमूल्य धातुओं पर आयात शुल्क को बढ़ाकर 12.5 फीसदी करने का प्रस्ताव किया

स्थानीय सर्राफा बाजार में शुक्रवार को सोना 590 रुपये की तेजी के साथ 34,800 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ. सोने के भाव में यह तेजी आम बजट 2019-20 में सोना व अन्य बहुमूल्य धातुओं पर आयात शुल्क 10 फीसदी से बढ़ाकर 12.5 फीसदी किए जाने की घोषणा के बाद देखी गई. सरकार ने सोने व अन्य बहुमूल्य धातुओं पर आयात शुल्क को बढ़ाकर 12.5 फीसदी करने का प्रस्ताव किया है. इससे घरेलू बाजार में सोना एवं अन्य आभूषण महंगे हो जाएंगे

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एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आयात शुल्क में बढ़ोतरी से सोने की कीमतें बढ़ेंगी जिससे सोने का उपभोग भी प्रभावित होगा. वैश्विक स्तर पर न्यूयॉर्क में सोना भाव 1,413 डॉलर प्रति औंस रहा. जबकि चांदी 15.22 डॉलर प्रति औंस रही.दिल्ली सर्राफा बाजार में 99.9 और 99.5 प्रतिशत की शुद्धता वाला सोना 590-590 रुपये बढ़कर क्रमश: 34,800 और 34,630 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा. सोने की आठ ग्राम वजनी गिन्नी का भाव 200 रुपये बढ़कर 27,000 रुपये प्रति इकाई रहा

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दिल्ली सर्राफा में चांदी हाजिर का भाव 80 रुपये टूटकर 38,500 रुपये प्रति किलोग्राम और साप्ताहिक डिलीवरी वाली चांदी का भाव 75 रुपये बढ़कर 37,225 रुपये प्रति किलोग्राम रहा. चांदी सिक्कों का लिवाल भाव 80,000 रुपये और बिकवाल भाव 81,000 रुपये प्रति सैकड़ा पर ही बना रहा सोना

मात्रा के लिहाज से देखा जाए तो देश ने बीते वित्त वर्ष में 982 टन सोने का आयात किया. वित्त वर्ष 2017-18, 2016-17 और 2015-16 में सोने का आयात क्रमश: 955 टन, 778 टन और 968 टन रहा था. सोने के आयात में गिरावट से चालू खाते के घाटे (CAD) पर अंकुश रखने में मदद मिलती है. वित्त वर्ष 2017-18 में बहुमूल्य धातुओं का कुल आयात 33.7 अरब डॉलर रहा था. 2016-17 मं यह 27.5 अरब डॉलर और 2015-16 में 31.8 अरब डॉलर था

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भारत दुनिया में सोने के सबसे बड़े आयातकों में से है. आयात से मुख्य रूप से घरेलू आभूषण उद्योग की जरूरत को पूरा किया जाता है. बीते वित्त वर्ष में रत्न एवं आभूषणों का निर्यात 5.32 फीसदी घटकर 30.96 अरब डॉलर रह गया. वित्त वर्ष 2018-19 में देश का चालू खाते का घाटा बढ़कर 57.2 अरब डॉलर या सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 2.1 फीसदी हो गया, जो इससे पिछले वित्त वर्ष में 1.8 फीसदी था. चालू खाते में विदेशी मुद्रा के बाह्य प्रवाह और अंत: प्रवाह का अंतर चालू खाते का घाटा कहलाता है.

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