मुहर्रम में हैरतअंगेज करतब दिखायेंगे गोरखपुर के अखाड़े

सैकड़ों सालों से मुहर्रम के जुलूस की आन, बान, शान तमाम अखाड़ा बेहतरीन करतब दिखाने की तैयारी में जुटे हुए हैं

गोरखपुर । माह-ए-मुहर्रम करीब है। इमामबाड़ा इस्सेट मियां बाजार से लेकर मुस्लिम मोहल्लों में तैयारियां जोर शोर से जारी हैं। सैकड़ों सालों से मुहर्रम के जुलूस की आन, बान, शान तमाम अखाड़ा बेहतरीन करतब दिखाने की तैयारी में जुटे हुए हैं। बकरीद के चांद के बाद अखाड़ों में तमाम तरह के खेल तलवार, फरसा, भाला, लाठी, बरेठी आदि की ट्रेनिंग शुरु हुई जो अब अंतिम पड़ाव में है। अब अवाम के सामने प्रदर्शन का वक्त करीब आ रहा है। तमाम अखाड़ों के बीच कई मोहल्लों में प्रतियोगिताएं भी होंगी और इनामों की बरसात भी होगी।

हैदरी अखाड़ा मौलवी चक बड़गों में रात 9 बजे से काफी रौनक देखने को मिल रही है। काफी भीड़ उमड़ती है। यहां 20-25 नौजवान लाठी, भाला, फरसा, तलवार, बाना (स्टील का पाइप), बरेठी (बांस के दोनों कोनों पर आग जलाकर प्रदर्शन) इतने शानदार तरीके से चलाते हैं कि देखने वाले दांतों तले उंगलियां दबा लेते हैं। हैदरी अखाड़ा पचास साल से भी ज्यादा पुराना है। इस अखाड़े के संचालक व उस्ताद शहादत सिद्दीकी दावा करते हैं कि उनके अखाड़े जैसा प्रदर्शन कहीं देखने को नहीं मिलेगा। वह करीब दस सालों से ट्रेनिंग दे रहे है।

उन्होंने बताया कि उनके अखाड़े में 14 साल से लेकर 30 साल तक के नौजवान हैं। बकरीद के चौथे रोज से अखाड़ा मैदान को साफ किया जाता है। हजरत सैयदना इमाम हुसैन रदियल्लाहु अन्हु के नाम पर फातिहा ख्वानी होती है। फिर ट्रेनिंग शुरु। प्रत्येक दिन रात 9:30 से रात 12 बजे तक ट्रेनिंग होती है। नौजवानों को तमाम तरह का पैतरा उड़ान सिखाया जाता है। यह ट्रेनिंग निशुल्क होती है। चोट वगैरह लगने पर तुरंत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध रहती है। 6वीं मुहर्रम तक ट्रेनिंग चलती है। 7वीं मुहर्रम को जुलूस में शामिल होकर जबरदस्त प्रदर्शन किया जाता है।

घंटाघर में देखने वालों का मज़मा लग जाता है। 10वीं मुहर्रम को भी यह अखाड़ा जुलूस में प्रदर्शन करता है। वहीं 9वीं मुहर्रम को इस अखाड़ा द्वारा फेक प्रतियोगिता आयोजित की जाती है। जिसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को सम्मानित किया जाता है। इस अखाड़ा के नौजवान जुलूस में हरी टी शर्ट, सर पर सफेद टोपी और माथे पर हरी पट्टी लगाकर चलते हैं। जिस पर हैदरी अखाड़ा बड़गो लिखा होता है। इस अखाड़ा की अपनी कमेटी भी है।

वहीं 125 साल पुराने हुसैनी अखाड़ा बहरामपुर के सरपरस्त अब्दुल्लाह है। इनके अखाड़ा में करीब 80 नौजवान ट्रेनिंग ले रहे हैं। जिन्हें बदरे आलम भानू ट्रेनिंग दे रहे हैं। ईदगाह सेहरा बाले के मैदान बहरामपुर के बाहर रात 9 से 12 बजे तक तलवार, भाला, फरसा, पटा (सात फीट तलवार जैसा शस्त्र), लाठी छूट, बाना (स्टील रॉड), बरेठी (आग का खेल), नुमाइशी गतका, बंदिश (शेरों शायरी) आदि खेलों की ट्रेनिंग दी जाती है। विभिन्न पैतरा सिखाया जाता हैं। यहां बकरीद के चांद के बाद ट्रेनिंग शुरु है। यह अखाड़ा अपना प्रदर्शन 7, 8, 9 व 10वीं मुहर्रम के जुलूस में करेगा।

अखाड़ा के संचालक व इमामचौक मुतवल्ली एक्शन कमेटी के अध्यक्ष अब्दुल्लाह
ने बताया कि मुहर्रम के जुलूसों में तमाम अखाड़ा सैकड़ों सालों से प्रदर्शन करते चले आ रहे हैं। शहर में करीब 75 अखाड़ा हैं। सभी पंजीकृत हैं। बड़गो, बहरामपुर, घोसीपुरवा, पिपराइच, इस्माईलपुर तकिया, मियां बाजार, रसूलपुर, बक्शीपुर, छोटे काजीपुर, पहाड़पुर, तुर्कमानपुर, चिंगी शहीद, धम्माल, बसंतपुर, मियां बाजार, चिलमापुर, बिछिया कैंप, नकहा, गोलघर सहित तमाम मोहल्लों में अखाड़ा मौजूद है।

वहीं मोहल्ला बख्तियार, गोरखनाथ, रसूलपुर, बुलाकीपुर आदि में तमाम अखाड़ों के बीच प्रतियोगिता भी होती है। इस्माईल तकिया में करीब 35 सालों से फेक (तलवार, भाला, फरसा, लाठी के जरिए खेल) प्रतियोगिता होती है। जो 6वीं मुहर्रम को रात 9:00 से रात 2:00 बजे तक चलती है। जिसमें विभिन्न मोहल्लों के करीब 20 अखाड़ा शिरकत करते हैं।

प्रतिभागियों को नगद व अन्य इनाम से नवाजा जाता है। यह प्रतियोगिता हाजी कलीम फरजंद की देखरेख में संपन्न होती है। यहां से निकलने वाले जुलूस में नौजवान जबरदस्त बरेठी (आग का खेल) भी भांजते हैं। तुर्कमान व पहाड़पुर के लठिया सालार का जुलूस भी शानदार होता है। बांसों की तडतड़ाहट से पूरा शहर गूंज उठता है।