गोरखपुर की बेटी ने दुनिया में किया नाम रोशन, बनाया सबसे चमकीला पदार्थ, कम ऊर्जा मे तेज रौशनी की खोज

दो वॉट की एलईडी मे 20 वॉट की रौशनी, बनाया सबसे चमकीला पदार्थ, कम ऊर्जा मे तेज रौशनी की खोज

गोरखपुर। दो वॉट की एलईडी मे 20 वॉट की रौशनी, कम ऊर्जा मे रडार से शानदार रिज़ल्ट, एमआरआई के और बेहतर नतीजे की खोज को चीन, जापान, अमेरिका व रूस ने नही बल्कि भारत के राज्य उत्तरप्रदेश के गोरखपुर शहर की रहने वाली एक वैज्ञानिक बेटी ने की है। इस उप्लब्धि से उसने अपने परिवार, मेंटर ही नही बल्कि जिले का नाम भी रौशन किया है। गोरखपुर की बेटी की इस बड़ी काम्याबी से लोग फूले नही समा रहे हैं।

गोरखपुर युनिवर्सिटी मे केमेस्ट्री मे रिसर्च कर रही घासीकटरा मोहल्ले के रहने वाले अमीनउल्लाह अंसारी की बेटी इफ्फत अमीन ने प्रो0 अफ़शां सिद्दीकी के निर्देशन मे पांच साल के रिसर्च के बाद दुनिया के सबसे चमकीले कांप्लेक्स (कई तत्वों के मिश्रण) बनाने की खोज करने मे काम्याबी हासिल की है। इसकी चमक क्षमता 91.9 % प्रतिशत है। अब तक सबसे चमकीले कांप्लेक्स की क्षमता 80% प्रतिशत ही है।

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आईआईटी मद्रास, चेन्नई व जापान मे हुआ परिक्षण

इफ्फत ने बताया कि चुंकि संशलेषित कांप्लेक्स की सटीक परिक्षण की सुविधा यहां पर नही थी। इसलिये इन्हें परिक्षण के लिये आईआईटी मद्रास, चेन्नई, सीडीआरआई लखनऊ व जापान के क्यूशू इंस्टीटयूटऑफ टेक्नालॉजी लैब भेजना पड़ा। शोध से होने वाले फायदे ऑर्गैनिक एलईडी बल्ब बनाई जायगी जो महज दो वाट के करंट मे तेज़ रौशनी देगी। वहीं रडार मे ऊर्जा की खपत कम होगी और एमआरआई मे ज़्यादा सटीक नतीजे भी मिलेंगे। दवाओं और बॉयोलॉजिकल सिस्टम की जांच तथा लेवलिंग मे कारगर होंगे।

तेज़ रौशनी का आविष्कार करने वाली इफफ्त अमीन की फाइल तस्वीर।
तेज़ रौशनी का आविष्कार करने वाली इफफ्त अमीन की फाइल तस्वीर।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर छपे इफ्फत के शोध

इफ्फत के रिसर्च से संबंधित चार पेपर अंतर्राष्टीय जर्नल्स मे प्रकाशित हुए हैं। जिनके नाम रॉयल सोसायटी ऑफ कमेस्ट्री (यूके) इंगलैंड समेत कई देशों से प्रकाशित होने वाला एल्वाइज़र व प्रतिष्ठित जर्नल ऑफ टेलर एंड फ्रांसिस हैं। वहीं इफ्फत के रिसर्च को युनिवर्सिटी ने सर्वोत्कृष्ठ शोध माना गया है। गोरखपुर विश्वविद्यालय मे होने वाले आगामी दीक्षांत समारोह मे इफ्फत का गोल्ड मेड्लिस्ट के तौर पर चयन कर लिया गया है।

ऐसे किया शोध

इफ्फत ने दुर्लभ तत्व लैंथेनाइड, सीरियम, प्रोकोडोमियम और नियोडायनिम मे पाइराजुलीन, डाइ थायो कार्बामेट व जेथेट को संस्लेशित किया। कुल 48 कांप्लेक्स बने, उनकी अलग अलग ल्युमिनिसेंस (चमक की क्षमता) जांची गई। शुरूआत के दो साल केवल दुर्लभ तत्व जुटाने व सेश्लेषण के बाद उनके अनुप्रयोग समझने मे ही लग गए। उसके बाद तत्वों को संश्लेषित कर उनका अलग अलग परिक्षण किया। जिसके बाद नतीजे शानदार रहे।

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कुल 48 कांप्लेक्स मे चमक क्षमका 91.9 % प्रतिशत पाई गई। यह अब तक दुनिया मे मौजूद चमकीले मिश्रणों की अपेक्षा कहीं ज़्यादा क्षमतावान है।

पूरी दुनिया में चल रहा रेयर अर्थ एलिमेंट्स पर शोध

रेयर अर्थ एलिमेंट्स पर पूरी दुनिया में शोध हो रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक, ऑयल रिफाइनरी, ग्लास व मेडिकल इंडस्ट्री में इनके प्रयोगों ने चमत्कारिक परिणाम दिए हैं।

इन तत्वों का 70 फीसदी अकेला चीन उत्पादन करता है। शेष तीस फीसदी इस तरह के मिनरल्स का खनन म्यांमार, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, अमेरिका जैसे देशों में किया जाता है। इसी महीने चीन के एक वैज्ञानिक ने दावा किया है कि उन्होंने शत प्रतिशत ल्युमिनिसेंस प्रॉपर्टी वाला कांप्लेक्स तैयार किया है। उनके दावे पर परीक्षण चल रहा है।

इफ्फत अमीन के मेंटर डॉ़ प्रो. उमेश नाथ त्रिपाठी का कहा कि मेरी शिष्या मे काफी उत्साह है और अभी उसे कड़ी मेहनत करनी होगी।

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उन्होने कहा कि कम उम्र मे इस उप्लब्थि को हासिल कर उसने अपने गुरू का नाम रौशन किया है और मुझे पूरा यकीन है कि एक दिन इफ्फत पूरी दुनियां मे मेरा नाम रौशन करेगी। प्रोफेसर ने बताया कि आईआईटी मद्रास व जापान के क्यूशू इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्क्नोलॉजी मे जांच के बाद पदार्थों की दक्षता का दावा किया गया है।

उनकी रिपोर्ट हम जर्नल को भेजते हैं, तभी रिसर्च पेपर छपता है। जर्नल के अलावा हम यह रिपोर्ट किसी अन्य से शेयर नहीं कर सकते। हमें इन शर्तों का अनिवार्य रूप से पालन करना होता है।

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