ख़ुशख़बरी : नमाज़ व रोजा का सही समय जानना होगा अब आसान

15 जनवरी को आएगी मंजर-ए-आम पर

गोरखपुर। गोरखपुर-बस्ती मंडल के मुसलमानों के लिए तहरीक पासबाने अहले सुन्नत रसूलपुर ने नई जंत्री तैयार की है। जिसके जरिए मुसलमानों को नमाज व रोजा का सही समय पता चल सकेगा।

नई जंत्री में महीना व दिन का विवरण मिलेगा। वहीं सूरज निकलने व डूबने का वक्त भी आसानी से पता चल सकेगा। नई जंत्री का टाइम टेबल अंग्रेजी अंक में होने की वजह से हर आदमी आसानी से समय पता कर सकेगा।

नई जंत्री सालभर की कड़ी मशक्कत से तैयार की गई है। हर रोज सूरज के निकलने व डूबने पर नज़र रखी गई। दावते इस्लामी की जंत्री व माहिर उलेमा-ए-किराम की निगरानी में नई जंत्री तैयार की गई। नई जंत्री सैकड़ों सालों तक काम आएगी।

सालभर की मेहनत से तैयार की नई जंत्री

नई जंत्री पर अलजामियतुल अशरफिया मुबारक यूनिवर्सिटी के उलेमा-ए-किराम के तस्दीक की मुहर लग गई है।

15 जनवरी को बाद नमाज मगरिब उर्स-ए-हाफ़िज़े मिल्लत अल्लामा शाह अब्दुल अज़ीज़ अलैहिर्रहमां के मौके पर जामा मस्जिद रसूलपुर में उलेमा-ए-किराम के जरिए मंजर-ए-आम पर लाया जाएगा।

नई जंत्री तैयार करने में तहरीक के मुफ्ती खुश मोहम्मद मिस्बाही, मौलाना जहांगीर अहमद अज़ीज़ी, मौलाना रजीउल्लाह मिस्बाही व मो. शाकिब खान आदि ने नुमाया किरदार अदा किया है।

नई जंत्री मस्जिदों के इमाम व मोअज़्ज़िन व आमजन के लिए बहुत ज्यादा मुफीद साबित होगी।

मौलाना जहांगीर अहमद अज़ीज़ी ने बताया कि सैकड़ों सालों से नमाज का समय और माह-ए-रमजान में रोजे के लिए सहरी व इफ्तार का समय जानने के लिए दाइमी जंत्री का उपयोग किया जा रहा है।

तहरीक ने मौजूदा समय के साथ नई जंत्री की जरूरत महसूस की। सालभर तक नई जंत्री पर काम किया। दावते इस्लामी की जंत्री व इस विषय के माहिर उलेमा-ए-किराम की मदद से नई जंत्री तैयार की गई। पुरानी जंत्री में जो कमियां थी उसे नई जंत्री में दूर किया गया है।

नई जंत्री में गोरखपुर-बस्ती मंडल के गोरखपुर, महराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, बस्ती, संतकबीरनगर व सिद्धार्थनगर जिले का ख्याल रखा गया है। तहरीक का प्रयास रहेगा कि हर मस्जिद में नई जंत्री फ्रेम करवाकर लगवा दी जाए। लोगों से अपील है नई जंत्री मस्जिद, घरों, दरगाहों व मदरसों में रखें इससे काफी फायदा होगा।

मुफ्ती अख्तर हुसैन मन्नानी (मुफ्ती-ए-शहर) ने कहा कि समय की अहमियत सबके नजदीक तसलीम शुदा है लेकिन इबादत और फराइज की अदायगी की बात आ जाए तो अहमियत और ज्यादा बढ़ जाती है।

कुरआन-ए-मुकद्दस में अल्लाह पाक इरशाद फरमाता है नमाज़ मोमिनीन पर मुकर्रर वक्त में फर्ज है। नई जंत्री तैयार करना नौज़वान उलेमा-ए-किराम की बहुत अच्छी कोशिश है। नई जंतरी मस्जिद, मदरसों, घरों व दरगाहों में जरूर रखी जाए। घरों में औरतों को इससे बहुत ज्यादा फायदा होगा।

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