हजरत आयशा की बारगाह में पेश किया गया खिराजे अकीदत

नार्मल स्थित दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद मस्जिद में हजरत आयशा की जिन्दगी पर बयान करते मौलाना मकसूद 

गोरखपुर। नार्मल स्थित दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद मस्जिद में रविवार को पैगम्बर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम की शरीक-ए-हयात (पत्नी) हजरत आयशा सिद्दीका रजियल्लाहु अन्हा के यौम-ए- विसाल (वफात) की याद में आयोजित कार्यक्रम में खिराजे अकीदत पेश किया गया।

इस मौके पर मस्जिद के इमाम मौलाना मकसूद आलम मिस्बाही ने कहा कि उम्मुल मोमिनीन (मोमिनों की मां) हजरत आयशा सिद्दीका रजियल्लाहु अन्हा पैगम्बर-ए-इस्लाम की शरीक-ए-हयात (पत्नी) व इस्लाम के पहले खलीफा हजरत अबुबक्र रजियल्लाहु अन्हु की पुत्री हैं। आपकी पैगम्बर-ए-इस्लाम से शादी 16 साल की उम्र में व 19 साल की उम्र में रुखसती हुई। आप बहुत बड़ी विद्वान थीं। आप पैगम्बर-ए-इस्लाम से बहुत सी हदीस रिवायत करने वाली हैं। आप इल्म का चमकता हुआ आफताब हैं। आपकी जिंदगी का हर पहलू दुनिया की तमाम औरतों के लिए प्रेरणास्रोत है। आप नारी सशक्तिकरण की सशक्त पहचान हैं। आप पूरी जिंदगी महिलाओं के हक की अलमबरदार रहीं। हजरत आयशा रजियल्लाहु अन्हा की सीरत पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि तकवा परेहजगारी में आपका कोई सानी नहीं हैं। कुरआन शरीफ में आपकी पाकीजगी अल्लाह बयान करता है। पैगम्बर-ए-इस्लाम -की निजी जिंदगी की तर्जुमान हजरत आयशा हैं। आपने 17 रमजानुल मुबारक को इस फानी दुनिया को अलविदा कहा। उम्मुल मोमिनीन हजरत आयशा तमाम मुसलमानों की मां हैं। अंत में सलातो-सलाम पढ़ कौमों मिल्लत की भलाई के लिए दुआएं मांगी गयी और अहले बैत व सहाबा-ए-किराम के नक्शे कदम पर चलने का अहद किया गया।