हज़रत मिस्कीन शाह गोरखपुर की ज़मीं पर मोहब्बत के आसमां

अंधियारीबाग में जलसे के साथ तीन रोजा उर्स-ए-पाक शुरू

गोरखपुर। अंधियारीबाग स्थित ख़ानक़ाह मिस्कीनिया पर हज़रत मिस्कीन शाह अलैहिर्रहमां का 81वां तीन रोजा उर्स-ए-पाक गुरुवार से शुरू हुआ। मजार शरीफ का गुस्ल किया गया। संदलपोशी हुई।

जलसा-ए-ईद मिलादुन्नबी का आयोजन हुआ।सदारत अख्तर अली शाह ने की। संचालन मौलाना मकसूद आलम मिस्बाही ने किया।

जलसे के मुख्य अतिथि मौलाना मोहम्मद अहमद निज़ामी ने हज़रत मिस्कीन शाह की जिंदगी व पैगामात पर रोशनी डालते हुए कहा कि हज़रत मिस्कीन शाह मानते थे कि अल्लाह से इश्क तभी हो सकता है जब उसके बंदों से भी इश्क हो।

सूफ़ीवाद की बुनियाद इश्क है। औलिया शब्द का अर्थ हैं ‘अल्लाह वाला’ यानी ‘अल्लाह का दोस्त’। हज़रत मिस्कीन शाह गोरखपुर की ज़मीं पर मोहब्बत के आसमां थे।

उन्होंने कहा कि शिक्षा (तालीम) बहुत जरूरी है। समाज में गिरते शिक्षा के स्तर को लेकर फिक्रमंद होना चाहिए। दीनी तालीम के साथ वर्तमान शिक्षा बहुत जरूरी है। ‘आधी रोटी खाएंगे बच्चों को पढ़ाएंगे’ नारे को घर-घर तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।

कुरआन-ए-पाक की तिलावत कारी नसीमुल्लाह ने की। नात-ए-पाक रईस अनवर, मौलाना अली अहमद ने पेश की। अंत में सलातो सलाम पढ़कर मुल्क में मोहब्बत व भाईचारे की दुआ मांगी गई। शीरीनी बंटी।

जलसे में फिरोज अहमद निहाली, मोहम्मद फर्रुख जमाल, अकील अहमद, वकील अहमद, शकील अहमद, शाहरुख खान, मुस्तकीम, गोलू, ज़ैद, अदनान, शाकिर अली सलमानी, सैयद इरशाद अहमद, मो. अनीस एडवोकेट, अबू नसर सिद्दीकी, शाहिद, शाद रज़ा आदि मौजूद रहे।

आज होगी चादरपोशी

1 जनवरी को कुरआन ख्वानी, नात ख्वानी, सलातो-सलाम व दुआ ख्वानी की जायेगी। रहमतनगर स्थित मरहूम हाजी रहमतुल्लाह निहाली के मकान से सरकारी चादर व गागर का जुलूस निकलेगा। मजार पर चादर पेश की जायेगी। कुल शरीफ की रस्म अदा होगी। महफिले समा होगी।

कल बंटेगा लंगर

2 जनवरी को सुबह कोलकाता के हज़रत सैयद निहाल अहमद शाह अलैहिर्रहमां के यहां से आयी चादर मजार पर पेश की जायेगी। दोपहर 12 से 2 बजे तक लंगर बांटा जायेगा। शाम को कुल शरीफ की रस्म व महफिले समा होगी। अंत में फातिहा ख्वानी व दुआ ख्वानी के साथ उर्स-ए-पाक का समापन होगा।

हज़रत सैयद शाह मारूफ ने हर मजहब के लोगों में बांटा प्यार : नायब काजी

वलियों की जिंदगी इंसान व इंसानियत की हिफाजत के लिए होती है। उनके लिए हर इंसान बराबर होते हैं। उनकी पूरी जिंदगी मानव कल्याण में गुजरती है।

ये बातें नायब काजी मुफ्ती मो. अज़हर शम्सी ने हज़रत सैयद शाह मारूफ अलैहिर्रहमां के सालाना उर्स के अवसर पर अलीनगर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कही।

उन्होंने कहा कि हज़रत सैयद शाह मारूफ ऐसे ही अल्लाह के वली थे जिन्होंने मोहब्बत व भाईचारे का पैगाम देकर दिल से दिल को जोड़ा। उन्होंने तालीम व इंसानियत का पैगाम दिया।

शहर के मशहूर रईसों में रईस बुजुर्ग और शैखे़ तरीकत हज़रत सैयद शाह मारूफ का हसब व नसब 28 वास्ते से हज़रत सैयदना जाफ़र तय्यार रजियल्लाहु अन्हु से जा मिलता है। आपके वालिद हज़रत सैयद शाह अब्दुर्रहमान बादशाह मुअज्जम शाह के शासनकाल में गोरखपुर तशरीफ लाए और यहीं बस गए।

शाह मारूफ मोहल्ले का नाम आपके ही जात से मशहूर व मंसूब है। अवाम को आपके दौर में इस्लाह-ए-बातिन नसीब हुई। इबादत, खिदमते खल्क और खुश खुल्की का आप बेहतरीन नमूना थे। बुजुर्गों के तबर्रुकात आज भी आपके खानदान में बशक्ले खिरका, रूमाल, पगड़ी, जुब्बा वगैरा मौजूद है। आपकी मजार शाह मारूफ मोहल्ले में है।

अंत में सलातो सलाम के बीच बुजुर्गों के तबर्रुकात की जियारत करवाई गई। अमनो अमान की दुआ मांगी गई। शीरीनी बंटी।

उर्स में एडवोकेट नजमुल हक मारूफी, फैजल हक मारूफी, मसीउल्लाह मारूफी, मो. अज़ीम मारूफी, मारूफ समीउल्लाह, रेहान मारूफी, शाकिर अली सलमानी, जफ़र अहमद खान, मौलाना इश्तियाक अहमद, सैयद इरशाद अहमद, जर्रार बारी, अनीस अहमद, मोहम्मद फहीम, मोईनुद्दीन, हुमाम अफसर आदि मौजूद रहे।

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