Alam Ara : पहली बोलती फिल्म आलम आरा कैसे बनी और बनने के बाद कैसे आया फिल्म जगत में बदलाव

भारत में (Talkie film Alam Ara) बोलती फिल्म आलम आरा बनी थी। जिसको अर्देशिर ईरानी ने बनाई थी। जो की एक ईरानी परिवार से थे

Mumbai। आज अरबो रूपए की फिल्म जगत की दुनिया बन चुकी है, सही तरीके में आलम आरा ने भारत में पहली नीव रखी थी। इस फिल्म को बनाने वाले अर्देशिर ईरानी थे, जिनका जन्म 1886 में पुणे में एक ईरानी-पारसी परिवार में हुआ था। धार्मिक उत्पीड़न से बचने के लिए अर्देशिर ईरानी के माता-पिता ईरान से भारत आए। अर्देशिर ईरानी मुंबई में बड़े हुए और उन्होंने संगीत वाद्ययंत्र की दुकान चलाना शुरू किया। वर्ष 1931 में आयी 124 मिनट लंबी इस हिंदी बोलती फिल्म (Talkie film Alam Ara) को अर्देशिर ईरानी ने निर्देशित किया। ‘आलम आरा’ की कहानी दर्शको के दिलो को छू गयी।

अर्देशिर ईरानी द्वारा निर्मित भारत की पहली (Talkie film Alam Ara) बोलती फिल्म ‘आलम आरा’ हिंदी सिनेमा जगत में परिवर्तन लेकर आई। ऐसा कहा जाता है कि ईरानी दूरदर्शी होते थे ,इसके साथ कुछ बड़ा कर गुजरने से पीछे नहीं हटते थे । उन्होंने फिल्म के माध्यम से पूरा करके दिखाया। उनके सपनों ने भारतीय सिनेमा को एक नया रूप दिया। बोलती फिल्म ने ईरानी को भारतीय भाषा में (Talkie film Alam Ara) बोलती फिल्म बनाने के लिए प्रोत्साहित भी किया। यहीं से हिंदी सिनेमा जगत में शानदार संगीत बनाने की विधा शुरू हुई।

फिल्म बनाने में आयी अड़चने फिर भी मिली सफलता

वर्ष 1926 में स्थापित ईरानी की इंपीरियल फिल्म कंपनी नवाचार के मामले में सबसे आगे थी। अपने ऐतिहासिक कास्ट्यूम ड्रामा के लिए प्रसिद्ध इंपीरियल स्टूडियो भारत का पहला स्टूडियो था जिसने फिल्म ‘ख्वाब-ए-हस्ती’ (1929) के दृश्यों के लिए रात में शूटिंग की और बाद में पहली स्वदेशी रंगीन फिल्म ‘किसान कन्या’ (1937) का भी निर्माण किया।इस फिल्म को आने से पहले भारत में मूक फिल्मों का निर्माण होता था जो प्राचीन कहानियों की होती थीं। अर्देशिर ईरानी ने उस लीक से अलग एक लोकप्रिय नाटक को चुनकर बड़ा जोखिम उठाया था। उन्होंने (Talkie film Alam Ara) बोलती फिल्म ‘आलम आरा’ में हिंदी और उर्दू का मिश्रण रखा। उन्हें पता था की ये फिल्म बहुत चलेगी। लोगो के दिलो में राज करेगी। फिल्म में अभिनेता मास्टर विट्ठल और जुबैदा ने मुख्य किरदार निभाया।

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लोगो के दिलो में राज किया

पहली (Talkie film Alam Ara) बोलती फिल्म आलम आरा को लेकर दर्शकों में काफी जोश था। ‘आलम आरा’ की टिकट की कीमतें पहले कम हुई बाद में बढ़ गई। फिल्म के प्रचार और विज्ञापन के दौरान, निर्माताओं ने बहुत मेहनत किया ‘आलम आरा’ के लिए 78 कलाकारों ने अपनी आवाजें रिकार्ड की थीं। फिल्म के सात गाने बहुत हिट हुए। उसके बाद से संगीत, गीत और नृत्य भारतीय फिल्मों के अभिन्न अंग बन गए। मुंबई के मैजेस्टिक सिनेमा में यह फिल्म आने के बाद आठ सप्ताह तक हाउसफुल रही। इस फिल्म में पृथ्वीराज कपूर, महबूब खान और एल. वी. प्रसाद बाद में फिल्म लीजेंड बने।

जन्म हुआ क्षेत्रीय सिनेमा का

बोलती फिल्म आलम आरा (Talkie film Alam Ara) की सफलता ने अर्देशिर ईरानी को साल 1937 में भारत की पहली रंगीन फीचर फिल्म ‘किसान कन्या’ सहित कई और फिल्में बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। ‘आलम आरा’ की सफलता के बीच फिल्म उद्योग में परिवर्तन हुआ । फिल्मों के लिए अच्छी बोलचाल और मधुर गायन आवाज वाले मंच कलाकारों की खोज शुरू हुई । कई स्टूडियो जो ध्वनि के इस्तेमाल का उपयोग नहीं कर पाए उन्हें बंद होना पड़ा। समय के साथ, क्षेत्रीय सिनेमा को जन्म देते हुए देशभर की प्रमुख भाषाओं में बोलती फिल्मों का निर्माण शुरू हुआ। फिल्मों की अत्यधिक लोकप्रियता के कारण सिनेमा हाल की संख्या में काफी बढ़त हुई ।

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