इमाम हुसैन ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ी जंग : मोहम्मद अहमद

इमाम हुसैन आतंकवाद के खिलाफ आंदोलन का नाम : कारी शाबान

गोरखपुर । माह-ए-मुहर्रम की तीसरी तारीख मंगलवार को हजरत सैयदना इमाम हुसैन व शोहदा-ए-कर्बला का जिक्र मस्जिदों व घरों में हुआ। माहौल गमगीन व आंखें अश्कबार हुई। फातिहा नियाज भी हुई। वहीं तंजीम करवाने अहले सुन्नत का पौधारोपण कार्यक्रम मंगलवार को भी जारी रहा।

गौसिया मस्जिद छोटे काजीपुर में मौलाना मोहम्मद अहमद ने कहा कि 1380 वर्ष पहले आखिरी पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के नवासे हजरत सैयदना इमाम हुसैन ने कर्बला के मैदान में आतंकवाद के खिलाफ सबसे बड़ी जंग लड़ी थी और इंसानियत व दीन-ए-इस्लाम को बचाने के लिये अपने 72 साथियों की कुर्बानी दी। शहादत-ए-इमाम हुसैन ने दीन-ए-इस्लाम की अज़मत को कयामत तक के लिए बचा लिया। पूरी दुनिया को पैगाम दिया कि अन्याय व जुल्म के सामने सिर झुकाने से बेहतर है सिर कटा दिया जाए। यह पूरी दुनिया के लिए त्याग व कुर्बानी की बेमिसाल शहादत है। उन्होंने कहा कि अहले बैत (पैगंबर के घराने वाले) से मुहब्बत करने वाला जन्नत में जाएगा। हजरत इमाम हुसैन की शहादत हमें इंसानियत का दर्स देती है। पैगंबर-ए-आज़म ने फरमाया है कि जो शख्स अहले बैत से दुश्मनी रखता है वह मुनाफिक है।

एक मीनारा मस्जिद बेनीगंज में कारी मो. शाबान बरकाती ने कहा कि दीन-ए-इस्लाम की तारीख शहादतों से भरी पड़ी है। ‘इमाम हुसैन’ आतंकवाद के खिलाफ आंदोलन का नाम है। पैगंबर-ए-आज़म के बताए दीन-ए-इस्लाम को समझना है तो पहले कर्बला को जानना बेहद जरूरी है। इमाम हुसैन हक की जंग तभी जीत गए थे जब सिपह-सालार ‘हुर्र’ यजीद की हजारों की फौज छोड़कर मुट्ठी भर हुसैनी लश्कर में अपने बेटों के साथ शामिल हो गए थे। हुर्र जानते थे कि इमाम हुसैन की तरफ जन्नती लोग हैं और यजीद की तरफ जहन्नमी लोग हैं। उन्होंने कहा कि पैगंबर-ए-आज़म ने इरशाद फरमाया कि कोई बंदा मोमिने कामिल तब तक नहीं हो सकता जब तक कि मैं उसको उसकी जान से ज्यादा प्यारा न हो जाऊं और मेरी औलाद उसको अपनी जान से ज्यादा प्यारी न हो और मेरे घराने वाले उसको अपने घराने वालों से ज्यादा महबूब न हों।

बेलाल मस्जिद इमामबाड़ा अलहदादपुर में कारी शराफत हुसैन कादरी ने कहा कि जालिम यजीद को सत्य से हमेशा भय रहा, इसलिए अपनी कूटनीति से उसने कर्बला के मैदान में पैगंबर-ए-आज़म हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के परिवारजन एवं समर्थकों को अपनी फौज से तीन दिनों तक भूखा प्यासा रखने के बाद शहीद करा दिया।

इसी तरह मुकीम शाह जामा मस्जिद बुलाकीपुर, बहादुरिया जामा मस्जिद रहमतनगर, गाजी मस्जिद गाजी रौजा, नूरी मस्जिद तुर्कमानपुर, मक्का मस्जिद मेवातीपुर इमामबाड़ा, दारुल उलूम अहले सुन्नत मजहरुल उलूम घोसीपुरवा, अंधियारी बाग दरगाह मिस्कीन शाह अलैहिर्रहमां, मस्जिद सुप्पन खां (कुरैशिया) खूनीपुर, मस्जिद हरमैन रायगंज, चिश्तिया मस्जिद बक्शीपुर, दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद मस्जिद नार्मल, सुन्नी जामा मस्जिद सौदागार मोहल्ला, मियां बाजार इमामबाड़ा मर्सिया खाना, इमामबाड़ा पुराना गोरखपुर में भी ‘जिक्रे शोहदा-ए-कर्बला’ की महफिल हुई।

रहमतनगर में आज बंटेगा लंगर-ए-हुसैनी

बहादुरिया जामा मस्जिद रहमतनगर में 4 सितंबर बुधवार को बाद नमाज़ एशा लंगर-ए-हुसैनी बांटा जायेगा। यह जानकारी अली गजनफर शाह ने दी है।

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