मस्जिदों के इमाम व मोअज्जिन की तनख्वाह बढ़ाने की अपील

बहादुर शाह जफ़र कालोनी में 12वां सालाना जलसा

गोरखपुर । बहादुर शाह जफ़र कालोनी, बहरामपुर में शनिवार को 12वां सालाना ‘जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी’ जलसा अकीदत व एहतराम के साथ संपन्न हुआ।

मुख्य अतिथि अलजामियतुल अशरफिया मुबारकपुर के मौलाना मसऊद अहमद बरकाती ने कहा कि अल्लाह ने दुनिया में कमोबेश सवा लाख पैगंबरों को भेजा, लेकिन मेराज शरीफ में सिर्फ आखिरी पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम की ही अल्लाह से मुलाकात हुई। पैगंबर-ए-आज़म ने मस्जिद-ए-अक्सा में पैगंबरों व फरिश्तों की इमामत की। उस मुबारक रात में अहकामे खास पैगंबर-ए-आज़म पर नाजिल हुए और आप दीदारे खुदावंदी से सरफराज हुए। तोहफे में नमाज मिली। पचास वक्त की नमाजें अता हुई, लेकिन बाद में अल्लाह ने अपने करम से पांच वक्त की नमाज फर्ज की और यह वादा किया कि जो कोई मुसलमान पांच वक्त की नमाज पढ़ेगा, उसे पचास वक्त की नमाज का सवाब अता किया जायेगा।

नमाज मोमिन की मेराज है। मुसलमान अगर तरक्की चाहते हैं तो नमाज को कायम करें। उन्होंने सभी मस्जिद कमेटियों से इमाम व मोअज्जिन की तनख्वाह बढ़ाने की अपील करते हुए कहा कि महंगाई के इस दौर में ज्यादातर मस्जिदों के इमाम व मोअज्जिन की स्थिति बेहद दयनीय है उन्हें उतनी तनख्वाह पाने का हक है जितने से वह अपने परिवार का भरण पोषण सही ढ़ग से कर सकें।

विशिष्ट अतिथि मौलाना रियाजुद्दीन निज़ामी ने कहा कि अल्लाह और पैगंबर-ए-आज़म की तालीमात पर मुकम्मल बेदारी के साथ अमल कीजिए। मुसलमान सामाजिक कुरीतियों से दूर रहें। बुराईयों के कारण एक मुसलमान पर ही नहीं बल्कि पूरी कौम पर खराब असर पड़ता है। बेटियों को बरकत वाला समझना चाहिए। बेटियों की पैदाइश पर मातम करने की बजाय खुशी जाहिर करने की जरूरत है। दुनिया में इंसान के लिए सबसे बड़ी नेमत जहां उसका दीन व ईमान है वहीं इंसान को मां-बाप की अहमियत को भी समझना चाहिए। मां-बाप का अदबो ऐहतराम जरुरी है।

पांच वक्त की नमाज पर मिलेगा पचास वक्त की नमाज का सवाब : मौलाना मसऊद

विशिष्ट अतिथि मौलाना जमील अख्तर ने कहा कि मुसलमान कुरआन व हदीस की शिक्षा के मुताबिक जीवन गुजारें। तालीम पर मुसलमान ध्यान दें। तालीम के बगैर कोई भी इंसान व कौम तरक्की नहीं कर सकती है। मुसलमानों ने विज्ञान के हर क्षेत्र में अपनी अज़ीम खिदमतों को अंजाम दिया है और विज्ञान को मजबूती प्रदान की है। खुद कुरआन में एक हजार आयतें ऐसी हैं, जिनका सम्बन्ध वैज्ञानिक क्षेत्र से है। विज्ञान का कोई क्षेत्र ऐसा नहीं जिसमें मुसलमानों ने अपनी खिदमतों को अंजाम न दिया हो। मुसलमानों के लिए ज्ञान के क्या मायने हैं, उसे कुरआन-ए-पाक ने अपनी पहली ही आयत में स्पष्ट कर दिया है। कुरआन व हदीस पढ़ने उसके अर्थ को समझने की अपील करते हुए पैगंबर-ए-आज़म हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम से ताल्लुक जोड़ने की बात कही।

जलसे का आगाज तिलावत-ए-कुरआन पाक से कारी नसीमुल्लाह ने किया। नात शरीफ मौलाना कलीमुल्लाह कादरी, एमादुद्दीन व आदिल अत्तारी ने पेश की। अध्यक्षता हाफिज जमील अहमद मिस्बाही व संचालन मौलाना फिरोज अहमद निज़ामी ने किया। अंत में सलातो-सलाम पढ़कर मुल्क में शांति की दुआ मांगी गयी।

 


इस मौके पर मास्टर मुख्तार अहमद, मोईन अहमद, अनीस अहमद, अब्दुल समद, राफे अहमद राजा, अहमद फराज, अलतमश, शादाब अहमद गोलू, मो. अनस, शाहरुफ अहमद, मो. मारूफ, मो. सारिक खान, इम्तियाज अहमद, नौशाद अहमद, शहनवाज, सद्दाम, मो. मोनिस, अहमद फाइज, बब्लू, मो. अर्सलान आदि मौजूद रहे।

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