ईद मिलादुन्नबी की खुशियों में सबको शामिल कीजिए : कारी शराफत

महफिल-ए-सीरतुन्नबी’ का अंतिम दिन

गोरखपुर । दीन-ए-इस्लाम का असली मिशन अमन व शांति है। दीन-ए-इस्लाम हमें अपने वतन से मोहब्बत का पैगाम देता है। किसी भी मुल्क की तरक्की अमन, भाईचारा व आपसी प्रेम के माहौल में ही हो सकती है। रसूल-ए-पाक हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम की बताई राह पर चलकर ही मुल्क, कौम और समाज को खुशहाल बनाया जा सकता है। ईद मिलादुन्नबी की खुशियों में सबको शामिल कीजिए। ईद मिलादुन्नबी पर अर्श से लेकर फर्श तक खुशियां मनायी जाती है। जुलूस-ए-मोहम्मदी के दौरान ऐसा कोई काम न करें जिससे किसी को भी जर्रा बराबर तकलीफ हो। हलाल रिज्क कमाएं, हराम से सख्ती के साथ बचें। 10 नवंबर को निकलने वाले जुलूस-ए-मोहम्मदी को शांतिपूर्ण एवं अदबो एहतराम से निकालेें। पटाखा-फुलझड़ी बिल्कुल न फोड़ें।

उक्त बातें शनिवार को कारी शराफत हुसैन कादरी ने तंजीम उलेमा-ए-अहले सुन्नत की ओर से नार्मल स्थित हजरत मुबारक खां शहीद मस्जिद में आयोजित ‘महफिल-ए-सीरतुन्नबी’ के दसवें दिन कहीं।

ईद मिलादुन्नबी पर अर्श से लेकर फर्श तक खुशियां मनायी जाती है

मौलाना मकसूद आलम मिस्बाही ने कहा कि कुरआन-ए-पाक में है कि “बेशक अल्लाह का बड़ा एहसान हुआ मुसलमानो पर कि उनमें उन्हीं में से एक रसूल हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम भेजा जो उन पर उसकी आयतें पढ़ते हैं और उन्हें पाक करते हैं और उन्हें किताब और हिक़मत सिखाते हैं। अल्लाह ने हमें करोड़ों नेमत दी लेकिन एहसान नहीं जताया, मगर जब अपने महबूब रसूल-ए-पाक को बन्दों के दरमियान भेजा तब एहसान जताया है। जिस नेमत को देने पर अल्लाह खुद फरमा रहा है कि “मैंने एहसान किया बन्दों पर” तो ज़रा सोचिये कि कैसी ही अज़ीम नेमत है मेरे रसूल-ए-पाक की विलादत (पैदाइश) की खुशी। अल्लाह कुरआन में अपनी दी हुई नेमतों का चर्चा करने का हुक्म दे रहा है। अल्लाह फरमाता है” और अपने रब की नेमत का खूब चर्चा करो।” मुसलमानों के लिए रसूल-ए-पाक से बढ़कर और कोई नेमत नहीं।

इस मौके पर शाह आलम, जमशेद अहमद, मो. अली, सदरे आलम, मो. सुहेल, अब्दुर्रहमान, शाहिद रज़ा, मो. आतिफ रज़ा, हाफिज शहाबुद्दीन, अशरफ, नबी हुसैन सहित तमाम लोग मौजूद रहे।

अल्लाह फरमाता है” और अपने रब की नेमत का खूब चर्चा करो।” मुसलमानों के लिए रसूल-ए-पाक से बढ़कर और कोई नेमत नहीं

शनिवार को तंजीम कारवाने अहले सुन्नत ने बारह रबीउल अव्वल (पैगंबर-ए-आज़म हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम का जन्मदिवस) की पूर्व संध्या पर शहर के अलीनगर, मियां बाजार, बरहुआ नौसढ़, छोटे काजीपुर, गोरखनाथ में आम, अमरुद, नीम, नेबू के 12 पौधे लगाकर पर्यावरण को हराभरा रखने का संकल्प लिया।

इस मौके पर गौसिया मस्जिद छोटे काजीपुर के इमाम मौलाना मोहम्मद अहमद ने कहा कि दीन-ए-इस्लाम में पेड़-पौधों की बड़ी अहमियत बयान की गई है। पैगंबर-ए-आज़म के समय में अरब देश की मरुभूमि में राहगीर सफर में धूप और प्यास से बिलबिला उठते थे। इस पर पैगंबर-ए-आज़म की ओर से हुक्म हुआ कि रास्तों के किनारे छायादार पेड़ लगाए जाएं और वहां कुएं खुदवाए जाएं।

बाद में ऐसा ही हुआ। दीन-ए-इस्लाम में पौधे लगाना बहुत नेकी का काम है। पैगंबर-ए-आज़म ने फरमाया है कि जो बंदा कोई पौधा लगाता है या खेतीबाड़ी करता है, फिर उसमें से कोई परिंदा, इंसान या अन्य कोई प्राणी खाता है तो यह सब पौधा लगाने वाले की नेकी में गिना जाएगा। पेड़ लगाना भी एक प्रकार का सदका हैं। पैगंबर-ए-आज़म ने फ़रमाया जो शख्स पौधा लगाता है फिर उस पेड़ से जितना फल पैदा होता है अल्लाह फल की पैदावार के बक़द्र पौधा लगाने वाले के लिए नेकी लिख देता है।

अलीनगर, मियां बाजार, बरहुआ नौसढ़, छोटे काजीपुर, गोरखनाथ में आम, अमरुद, नीम, नेबू के 12 पौधे लगाकर पर्यावरण को हराभरा रखने का संकल्प लेते ।
अलीनगर, मियां बाजार, बरहुआ नौसढ़, छोटे काजीपुर, गोरखनाथ में आम, अमरुद, नीम, नेबू के 12 पौधे लगाकर पर्यावरण को हराभरा रखने का संकल्प लेते ।

इस मौके पर कारी शमसुद्दीन, मखदूम हुसैन, नूर मोहम्मद दानिश, मो. नाज़िम, सैयद शहाबुद्दीन, अब्दुल अंसारी, मो. पारसा, शमसुल कमर, वसीम अंसारी, अली हसन, अब्दुल कादिर, मारुफ, सलमान, अयान जैद, मो. अज़लान सहित तमाम लोग मौजूद रहे।

बस 1 क्लिक पर जानें देश-दुनिया की ताजा-तरीन खबरें Download करें संस्कार न्यूज़ चैनल की Application नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें या फिर play store पे sanskarnews सर्च करें- लेटेस्ट न्यूज़ अपडेट के लिए लाइक करें हमारा फेसबुक पेज- https://fb.com/sanskarnewslko/
Loading...