Draupadi Murmu: जानते है राष्ट्रपति उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के बारे में

Draupadi Murmu

Draupadi Murmu: द्रौपदी मुर्मू देश के सबसे ऊँचे पद के चुनाव लड़ने के लिए पहली आदिवासी महिला होगी। इसके साथ ही देश की पहली आदिवासी महिला राज्यपाल के पद पर इनका नाम आता है।

Draupadi Murmu: प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए NDA उम्मीदवार को घोषित कर दिया है। बीजेपी संसदीय बोर्ड की बैठक में एनडीए के राष्ट्रपति उम्मीदवार पर मुहर लगा दी गई है। NDA ने द्रौपदी मुर्मू को अपना राष्ट्रपति उम्मीदवार घोषित कर दिया है। द्रौपदी मुर्मू झारखंड की राज्यपाल रह चुकी हैं और वह देश के सबसे ऊँचे पद के लिए चुनाव में लड़ने वाली पहली आदिवासी महिला रहेंगी। साथ ही देश की पहली आदिवासी महिला राज्यपाल भी रह चुकी है।

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बिना किसी विवाद के राज्यपाल के पद पर रही कार्यरत

झारखंड में राज्यपाल के पद पर कुल 6 साल एक माह 18 दिन का उनका कार्यकाल बहुत ही अच्छा रहा, राज्य के प्रथम नागरिक और विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति के रूप में उन्होंने अपनी कर्त्तव्य बहुत ही अच्छे से निभाया।
अपना कार्यकाल पूरा होने के बाद वह 12 जुलाई 2021 को झारखंड से राजभवन से उड़ीसा के रायरंगपुर स्थित अपने गांव के लिए प्रस्थान किया था।

विपक्ष की तरफ से यशवंत सिन्हा रहेंगे उम्मीदवार

विपक्षी दलों के मध्य राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर झारखंड के हजारीबाग निवासी कद्दावर नेता यशवंत सिन्हा को भी राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाया गया है। और सत्ताधारी एनडीए की तरफ से झारखंड की पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू उम्मीदवार बनाया गया हैं तो जिसे विचित्र संयोग माना जायेगा। यशवंत सिन्हा के साथ द्रौपदी मुर्मू का नाम राष्ट्रपति पद के लिए सामने आने से झारखंड के सियासत में ख़ुशी का मौसम नज़र आ रहा।

द्रौपदी मुर्मू को 2017 में भी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए नाम रखा गया

रांची में प्रकाशित एक हिंदी दैनिक के लेखक हरिनारायण सिंह का कहना हैं कि वर्ष 2017 में भी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए द्रौपदी मुर्मू के नाम प्रकाश में आया था। एनडीए के नेता नरेंद्र मोदी सियासी मुद्दों में अपना फैसला सुनाने के लिए जाने जाते हैं तो ऐसे में बिना किसी विवाद के राजनीति में अपना समय देने वाली आदिवासी महिला द्रौपदी मुर्मू का नाम आगे आना बिलकुल भी गलत नहीं होगा। क्योंकि द्रौपदी मुर्मू के पास राज्यपाल के पद पर कार्य करने का बहुत ही अच्छा अनुभव है। द्रौपदी मुर्मू का नाम देश में जनजातीय समाज के बीच अपना स्थान बनाने का भाजपा की रणनीति हो सकती है। जिसमे गुजरात के आगामी विधानसभा चुनाव और 2024 में होनेवाले आम चुनाव को देखते हुए जनजातीय समाज के बीच एक बढ़िया संदेश जायेगा।

द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) के बारे में विवरण

18 मई 2015 को झारखंड की राज्यपाल के रूप में शपथ लेने से पहले द्रौपदी मुर्मू उड़ीसा में दो बार विधायक और एक बार राज्यमंत्री के रूप में कार्यरत रह चुकी है। राज्यपाल के पद पर पांच वर्ष की उनकी अवधि 18 मई 2020 को पूरा हो गयी थी, लेकिन कोरोना की वजह से राष्ट्रपति द्वारा नई नियुक्ति नहीं होने पर उनका कार्यकाल अपने आप बढ़ गया था। इसके साथ ही अपने पूरे कार्यकाल में बहुत ही ईमानदारी से अपना कर्त्तव्य निभाया । झारखंड के जनजातीय मामलों, शिक्षा, कानून व्यवस्था, स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर वह हमेशा जागरूक रहीं और लोगो को जागरूक किया । इसके साथ ही कई अवसरों पर उन्होंने राज्य सरकारों के फैसलों में संवैधानिक गरिमा और बड़ी ही विनम्रता के साथ उन्होंने अपना काम किया। साथ ही साथ विश्वविद्यालयों की पद पर कुलाधिपति के रूप में अपने कार्यकाल में राज्य के बहुत से विश्वविद्यालयों में कुलपति और प्रतिकुलपति के रिक्त पदों पर चयन किया गया।

विनोबा भावे विश्वविद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक प्रो. डॉ शैलेश चंद्र शर्मा कहते हैं कि उन्होंने राज्य में उच्च शिक्षा के लिए कदम उठाया था। जिसमें विश्वविद्यालयों शिक्षकों और कर्मचारियों के लगभग पांच हजार मामलों का निस्तारण हुआ था। साथ ही उन्होंने राज्य के विश्वविद्यालयों में और कॉलेजों में नामांकन प्रक्रिया को केंद्रीयकृत कराने के लिए चांसलर पोर्टल बनवाया।

द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) ने 1997 में अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत किया

20 जून 1958 को ओडिशा में एक साधारण संथाल आदिवासी परिवार में जन्मीं द्रौपदी मुर्मू ने 1997 में अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की । वह 1997 में ओडिशा के रायरंगपुर में जिला बोर्ड की पार्षद के रूप में उनका चयन किया गया। राजनीति में आने से पहले वह श्री अरविंदो इंटीग्रल एजुकेशन एंड रिसर्च, रायरंगपुर में मानद सहायक शिक्षक और सिंचाई विभाग में कनिष्ठ सहायक के रूप में कार्यरत रह चुकी। साथ ही उड़ीसा में दो बार विधायक भी रही हैं इसके साथ ही उन्हें नवीन पटनायक सरकार में मंत्री पद पर काम करने का सुनहरा अवसर मिला था। उस समय बीजू जनता दल और बीजेपी के गठबंधन की सरकार थी। ओडिशा विधानसभा ने द्रौपदी मुर्मू को सर्वश्रेष्ठ विधायक के लिए नीलकंठ पुरस्कार से सम्मानित किया।

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