हजरत उमर व शहीद-ए-कर्बला की याद में खुला मकतब

दीन का इल्म हासिल करना हर मुसलमान मर्द औरत पर फर्ज है। उन्होंने कहा कि मुहर्रम बातिल के ऊपर हक की जीत, जुल्मत (अंधेरा) पर नूर के गालिब आने का महीना है : मुख्य अतिथि गौसिया मस्जिद छोटे काजीपुर के इमाम मौलाना मोहम्मद अहमद निज़ामी

गोरखपुर।  तंजीम कारवाने अहले सुन्नत की ओर से शनिवार को अमीरुल मोमिनीन हजरत सैयदना उमर रजिल्लाहु अन्हु व शहीद-ए-कर्बला की याद में छोटे काजीपुर निकट गौसिया मस्जिद में ‘मकतब इस्लामियात’ की नई शाखा खोली गई।

मुख्य अतिथि गौसिया मस्जिद छोटे काजीपुर के इमाम मौलाना मोहम्मद अहमद निज़ामी ने कहा कि दीन का इल्म हासिल करना हर मुसलमान मर्द औरत पर फर्ज है। उन्होंने कहा कि मुहर्रम बातिल के ऊपर हक की जीत, जुल्मत (अंधेरा) पर नूर के गालिब आने का महीना है। मुहर्रम में जन्नती जवानों के सरदार हजरत सैयदना इमाम हुसैन व आपके साथियों ने तीन दिन भूखे-प्यासे रहकर कर्बला के तपते रेगिस्तान में अज़ीम शहादत पेश कर दीन-ए-इस्लाम का झंडा बुलंद किया।

हजरत उमर की शान बयान करते हुए कहा कि हजरत उमर पर यूरोपीय लेखकों ने कई किताबें लिखी हैं तथा हजरत ‘उमर महान’ की उपाधि दी है। प्रसिद्ध लेखक माइकल एच. हार्ट ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘दि हन्ड्रेड’ में हज़रत उमर को शामिल किया है। हज़रत उमर का जन्म मक्का में हुआ था। आप कुरैश ख़ानदान से थे। अज्ञानता के दिनों में ही लिखना पढ़ना सीख लिया था। इनका क़द बहुत ऊंचा, रौबदार चेहरा और गठीला शरीर था। हजरत उमर का पूरे मक्का में बड़ा दबदबा था। हजरत उमर मक्का में एक समृद्घ परिवार से थे, बहुत बहादुर तथा दिलेर व्यक्ति थे। हजरत उमर ख़ुलफा-ए-राशीदीन में सबसे सफल ख़लीफा साबित हुए। मुसलमान हजरत उमर को फारूक-ए-आज़म तथा अमीरुल मोमिनीन भी कहते हैं।

विशिष्ट अतिथि मौलाना जहांगीर अहमद अजीजी ने तालीम की फज़ीलत बयान करने के बाद कहा कि माह-ए-मुहर्रम बरकत व अजमत वाला है। मुहर्रम की 10वीं तारीख जिसे आशूरा कहा जाता है बहुत ही फज़ीलत वाली है। अल्लाह ने मुहर्रम की 10वीं तारीख को हजरत आदम अलैहिस्सलाम व हजरत हव्वा को अपने करम से वजूद बख्शा (बनाया)। हजरत आदम अलैहिस्सलाम की तौबा तीन सौ साल के बाद 10वीं मुहर्रम को ही कुबूल हुई। इसी तारीख को हजरत नूह अलैहिस्सलाम की कश्ती भी सलामती के साथ जूदी पहाड़ से लगी।

हजरत इदरीस अलैहिस्सलाम व हजरत ईसा अलैहिस्सलाम आसमान पर उठाए गए। इसी दिन हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की पैदाइश हुई। हजरत यूनुस अलैहिस्सलाम मछली के पेट से जिंदा सलामत बाहर आए। अर्श व कुर्सी, लौह व कलम, आसमान व जमीन, चांद व सूरज, सितारे व जन्नत बनाए गए। इसी तारीख को हजरत सैयदना इमाम हुसैन रजियल्लाहु अन्हु ने शहादत पायी।

छोटे काजीपुर में बड़ों के लिए खोला गया मकतब इस्लामियात।
छोटे काजीपुर में बड़ों के लिए खोला गया मकतब इस्लामियात।

तंजीम के सदर मुफ्ती मो. अजहर शम्सी ने कहा कि मकतब इस्लामियात की इस शाखा में बड़ों को दीन-ए-इस्लाम की तालीम दी जायेगी।
कार्यक्रम की शुरुआत तिलावत-ए-कुरआन व नात-ए-पाक से की हुई। अंत में सलातो सलाम पढ़कर दुआ मांगी गई।

इस मौके पर शफकत अली खान, मुफ्ती अख्तर हुसैन, मौलाना असलम रज़वी, मनोव्वर अहमद, अलाउद्दीन निज़ामी, हाफिज अबुल कलाम, हाफिज मो. अज़ीम आदि मौजूद रहे।

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