हिन्दुस्तान का मुसलमान बाइ चांस नहीं बाइ च्वाइस हिन्दुस्तानी है : मुजीब अशरफ

हमारे खून का कतरा-कतरा हिन्दुस्तान के जर्रे-जर्रे में शामिल है। हम इसी मिट्टी से बने : मुफ्ती मो. मुजीब अशरफ रज़वी

गोरखपुर । अंजुमन गुलामाने मुस्तफा नौजवान कमेटी की ओर से शुक्रवार को मिर्जापुर पचपेड़वा गोरखनाथ में जश्न-ए-असहाबे रसूल बनाम बेदारी-ए-उम्मत कांफ्रेंस हुई। अध्यक्षता मौलाना इम्तियाज अहमद ने व संचालन घोसी के मौलाना मो. राशिद अमजदी ने किया। मरहूम कारी अब्दुल वली की रुह को इसाले सवाब किया गया।

मुख्य अतिथि मुफ्ती-ए-आज़म महाराष्ट्रा मुफ्ती मो. मुजीब अशरफ रज़वी ने कहा कि हिन्दुस्तान का मुसलमान बाइ चांस नहीं बाइ च्वाइस हिन्दुस्तानी है। हमारे खून का कतरा-कतरा हिन्दुस्तान के जर्रे-जर्रे में शामिल है। हम इसी मिट्टी से बने। इंशाअल्लाह इसी मिट्टी में दफ़्न होंगे। कयामत में इसी मिट्टी से फिर उठाये जायेंगे। हमें न डराया जाए, हमें न सताया जाए। हमारे बुजुर्गों ने हिन्दुस्तान में पूरी जिंदगी गुजारी है, यहां मस्जिदें, खानकाहें, मदरसे बनाये हैं।

उस हिन्दुस्तान को भला हम कैसे छोड़ सकते हैं। हिन्दुस्तान व यहां के आईन (संविधान) से हमें बेपनाह मोहब्बत है। इस पर हम कभी कोई आंच नहीं आने देंगे। हमने बड़े जालिम हाकिमों का भी दौर देखा है। न ही दीन-ए-इस्लाम मिट सकता है और न ही कलमा पढ़ने वाले मिट सकते हैं। मैं मौलाना मोहम्मद अली जौहर की बात दोहराता हूं ‘जहां तक अल्लाह के अहकाम का ताल्लुक है, तो मैं पहले मुसलमान हूं, बाद में मुसलमान हूं, आखिर में मुसलमान हूं, लेकिन जब हिन्दुस्तान की आजादी का मसला आता है, तो मैं पहले हिन्दुस्तानी हूं, बाद में हिन्दुस्तानी हूं, आखिर में हिन्दुस्तानी हूं। मुल्क में अमन कायम रहे यही हम सबकी दुआ है।

विशिष्ट अतिथि घोसी (मऊ) के मौलाना इफ्तेखार नदीम ने कहा कि हालात से मायूस होने के बजाय जरूरी है कि उसे बदला जाए। ये तभी संभव है जब मुस्लिम कौम के नौजवान आगे आएं और अपने किरदार को बदलें। मुसलमानों को चाहिए कि वह अपनी जिंदगी पैगंबर-ए-आज़म हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम की सुन्नतों पर चलकर गुजारें।

विशिष्ट अतिथि मुफ्ती मो. अजहर शम्सी ने कहा कि दीन का इल्म हासिल कर दीन-ए-इस्लाम के साथ रिश्ता मजबूत किया जाए। दीनी तालीम हासिल करने पर जोर दीजिए। दुनियावी तालीम भी हासिल  कीजिए। हलाल कमाई से खुद की और बच्चो की परवरिश कीजिए। कांफ्रेंस का आगाद कुरआन-ए-पाक की तिलावत से कारी आबिद अली निज़ामी ने किया। आजमगढ़ के एहसान शाकिर ने नात पेश की। अंत में दरुदो सलाम पढ़कर हिन्दुस्तान में अमनो सलामती की दुआ मांगी गई। शीरीनी बंटी।

इस मौके पर आदिल उर्फ गुड्डू, हाफिज जमालुद्दीन, मौलाना हारुन, मौलाना अब्दुल खालिक, मौलाना अमीरुद्दीन, हाफिज फरोग अख्तर, मो. शादाब, आदिल, मो. अब्दुल्लाह, मो. शब्बीर, मो. रफीक, शहनवाज अहमद, अलाउद्दीन, राशिद अली, दानिश उर्फ गोलू, शिब्लू, सोनू, मो.कलीम अशरफ, रमजान अली, मनोव्वर अहमद, मुनाजिर हसन, हाफिज अजीम यारलवी आदि मौजूद रहे।