Nirbhaya Gangrape Case:’निर्भया’की मां ने क्यूरेटिव पिटीशन पर दिया बड़ा बयान

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Nirbhaya Gangrape Case:निर्भया’की मां ने कहा,मैं उन्हें फांसी पर लटकते हुए देखना चाहती हूं

निर्भया गैंगरेप केस (Nirbhaya Gangrape Case) के गुनाहगारों की क्यूरेटिव पिटीशन (Curative Petition) पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई होनी है। लेकिन उससे पहले ‘निर्भया’ की मां आशा देवी ने गुनाहगारों को लेकर बड़ा बयान दिया है। न्यूज़ एजेंसी एएनआई के मुताबिक उनका कहना है।

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सुप्रीम कोर्ट में ये याचिका पहली नहीं है। जब-जब फांसी (Hanging) की तारीख नजदीक आती है तो वो चाहते हैं कि यह और लंबी खिंच जाए। कोर्ट इससे पहले भी दो बार याचिकाएं खारिज कर चुका है। जिस पर 10 महीने तक सुनवाई चली थी, लेकिन अब मुझे पूरी उम्मीद है कि इन्हें 22 जनवरी को जरूर सजा मिलेगी। कोर्ट की भी अपनी गरिमा होती है। असल में इस तरह की याचिकाओं को दोषी हथियार की तरह से इस्तेमाल करते हैं।Nirbhaya Gangrape Case

‘निर्भया’ मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में दो दोषियों की भूल सुधार याचिका यानी क्यूरेटिव पिटीशन पर सुनवाई होनी है। ये सुनवाई चैंबर में यानी बंद कमरे में दोपहर लगभग पौने दो बजे होगी। इस मामले में दोषी विनय और मुकेश ने याचिका दाखिल की है। भूल सुधार याचिका खारिज होने के बाद बाद दोषियों के पास राष्ट्रपति के पास दया याचिका दाखिल करने का भी विकल्प है। अपनी याचिका में दोषियों ने मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग की है। निचली अदालत ने सभी चार दोषियों को 22 जनवरी की सुबह सात बजे फांसी देने का दिन और वक्त तय कर डेथ वारंट पर साइन कर दिए हैं।

‘निर्भया’ के गुनहगारों की फांसी में अब सिर्फ सात दिन बचे हैं। ऐसे में ‘निर्भया’ की मां आशा देवी ने अपनी ख्वाहिश बताते हुए कोर्ट और तिहाड़ जेल प्रशासन को एक पत्र लिखा है। आशा देवी ने इच्छा जताई है कि वो चारों गुनहगारों को फांसी पर लटकते हुए अपनी आंखों से देखना चाहती। उन्होंने कहा कि जब तक वो उनकी आखिरी सांस निकलते हुए नहीं देखेंगी, उन्हें चैन नहीं मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अब वो लोग कितनी भी पिटीशन फाइल कर लें, बचने वाले नहीं हैं।

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आशा देवी ने कहा कि बेटी के साथ हुई इस वारदात से पहले वो एक घरेलू औरत थींं।घर और बच्चों की जिम्मेदारी के अलावा उन्होंने कुछ देखा ही नहीं। लेकिन बेटी के साथ जो हुआ उसने एक जिम्मेदारी दे। गुनहगारों को अंजाम तक पहुंचाने की और दूसरा कभी ऐसा करने से पहले कोई 100 बार सोचे। वारदात के बाद मैं कभी अपना घर नहीं देख सकी। दिन और रात कोर्ट और कागजी कार्रवाई में लगा दिया। मैं और मेरा भगवान जानता है कि आज तक मैं कभी चैन से सो नहीं सकी। अभी सोऊंगी भी नहीं क्योंकि अभी मैं उन्हें फांसी पर लटकते हुए देखना चाहती हूं।