पूर्वोत्तर रेलवे–अब प्रदुषण नियंत्रण में अहम भूमिका होगा इलेक्टिक इंजन का

गोरखपुर । पूर्वोत्तर रेलवे प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में अहम भूमिका निभाने जा रहा है। आने वाले तीन वर्षों में पूर्वोत्तर रेलवे के क्षेत्रों में निकल रहे कार्बन पर 80 फीसदी तक अंकुश लगाने में इलेक्ट्रिक इंजन मददगार होगा।

यह रिपोर्ट आपको हैरान कर देगी कि वर्तमान में चल छह हजार लीटर डीजल टैंक क्षमता को लेकर चलने वाले डीजल इंजन से एक घंटे में 16 से 18 किलो कार्बन बाहर निकलता है जो खुले वातावरण में मिलकर पर्यावरण को प्रदूषित करता जा रहा है।
प्रदूषण नियंत्रण के क्रम में पूर्वोत्तर रेलवे तेजी से विद्युतीकरण करता जा रहा है ताकि 2021 से पूरे पूर्वोत्तर रेलवे से 15 फीसदी छोड़ बाकी सभी ट्रेनें इलेक्ट्रिक इंजन से फर्राटा भरने लगे।

सीनियर डीएमई, गोण्डा डीजल लोको शेड, ओंकार सिंह ने बताया कि एक डीजल इंजन रनिंग की स्थिति में एक घंटे में 15 से 18 किलो कार्बन निकालता है। एक डीजल इंजन की क्षमता 4000 लीटर है। ऐसे में फुल टैंक का इंजन पूरा डीजल खपा दे तो  करीब 12000 किलो कार्बन उत्सर्जित होगा।
पूर्वोतर रेलवे का 40 फीसदी यानी करीब 882 किलोमीटर रूट इलेक्ट्रिक हो चुका है। इन रूटों पर चलने वाली कुल 410 ट्रेनों में से 210 ट्रेनें इलेक्ट्रिक इंजन से चल रही हैं। अगले तीन सालों में इनकी संख्या बढ़ाकर 340 करने का लक्ष्य रखा गया है। तीन साल एनईआर के अधिकतर रूट पर डीजल इंतन ही चलते थे।
4 से 6 हजार लीडर टैंक की क्षमता वाले हैं इंजन
एक डीजल इंजन से कितना कार्बन से निकलता होगा इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि एक इंजन की डीजल टैंक क्षमता 4 से 6 हजार लीटर तक है। 4000 लीटर क्षमता वाला इंजन पूरा डीजल खपा दे तो एक बार में 12000 किलो के करीब कार्बन पर्यावरण को प्रदूषित करेगा।

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