लखनऊ राज गार्डन मैरिज हॉल में छठे रोज़े को तरावीह हुई मुक़म्मल, मांगी मगफिरत की दुआएं

रोज़ेदार तीसो दिन पांचो वक़्त की नमाज़ के साथ-साथ कुरआन की तिलावत और तरावीह की नमाज़ अदा करते है

लखनऊ। रहमत, बरकत और बख्शीस के मुक़द्दस महीने रमज़ान में राजाजीपुरम स्थित टिकैत राय तालाब के पास बने “राज गार्डन मैरिज हॉल” में मंगलवार को अक़ीदत मंदो ने 5 पारो की तरावीह मुक़म्मल की। रमज़ान का महीना शुरू होते ही तरावीह की नमाज़ पढ़ी जानी शुरू हो जाती है। रमज़ान के महीने में रोज़ेदार तीसो दिन पांचो वक़्त की नमाज़ के साथ-साथ कुरआन की तिलावत और तरावीह की नमाज़ अदा करते है, 30 दिन तक यह सिलसिला लगातार चलता रहता है। रमजान के इस मुक़द्दस इबादत के महीने में बड़ों के साथ-साथ बच्चे भी पूरी शिद्दत से अल्लाह की इबादत करते है।

आपको बता दें कि रमज़ान के इस तीस दिन को अल्लाह ने तीन हिस्सों में रखा है। पहला 10 दिनों का हिस्सा “रहमतों का दौर” और दूसरे भाग का 10 दिनों के हिस्से को “माफी का दौर” कहा जाता है इसमें ज्यादा से ज्यादा दुआएं मगफिरत के लिए की जाती है और आखिर के 10 दिनों के हिस्से को “जहन्नुम से बचाने का दौर” कहा जाता है

रोजा अफ्तार से बढ़ता है आपसी प्रेम – आरिफ़ उल हसन (राज गार्डन मैरिज हॉल)

वही क़ुरआन मुक़म्मल होने की खुशी में मैरिज हॉल के मालिक आरिफ़ उल हसन ने रोज़ेदारों को अफ्तार पार्टी भी दी। आरिफ़ उल हसन ने बताया की वो पिछले 5 सालों से इसी तरह से रोज़ेदारों की खिदमत करते आ रहे है, गर्मी की तपिश और तेज़ धूप में बिना किसी एहसास के रोज़ेदार अल्लाह की इबादत करने के लिए रोज़े रखता है ऐसे में उन्हें रोज़ेदारों की खिदमत करने से दिली सुकून मिलता है और साथ ही आपस में आपसी भाईचारा व प्रेम भी बढ़ता है।

वही मस्जिद, “मस्जिद-ए-सैयदा” के इमाम ने कहा कि रमज़ान के इस मुक़द्दस महीने का एक-एक पल बेहद कीमती है और साथ ही रोज़ेदारों को बाक़ी रमज़ान में भी ज़्यादा से ज़्यादा इबादत करने और और तरावीह की नमाज़ पढ़ने की हिदायत भी दी।