26 मिनट की फिल्म (पीरियड :एंड ऑफ सेंटेंस) को मिला ऑस्कर अवार्ड

Oscar Award for 26 Minutes (Period: End of Sentences)

गांव में जश्न का माहौल, बांटी जा रही हैं मिठाइयां

लखनऊ।भारत में मासिक धर्म से जुड़ी वर्जनाओं पर आधारित फिल्म ‘पीरियड : एंड ऑफ सेंटेंस’ (Period: End of Sentence) ने 91वें एकेडमी पुरस्कार समारोह में डॉक्यूमेंट्री शॉर्ट सब्जेक्ट की श्रेणी में ऑस्कर पुरस्कार हासिल किया है फिल्म का निर्माण भारतीय फिल्मकार गुनीत मोंगा की सिखिया एंटरटेनमेंट कंपनी द्वारा किया गया है. 26 मिनट की फिल्मय ‘पीरिड : एंड ऑफ सेंटेंस’ (Period: End of Sentence) उत्तरी भारत के हापुड़ की लड़कियों और महिलाओं और उनके गांव में पैड मशीन की स्थापना के ईद-गिर्द घूमती है।

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हापुड़ जिले के गांव काठीखेड़ा में रहने वाली स्नेह को लेकर बनाई गई फिल्म ‘पीरियडः एंड ऑफ सेंटेंस’ (Period End of Sentence) को शॉर्ट डॉक्यूमेंट्री श्रेणी में ऑस्कर अवॉर्ड मिला है।इस फिल्म को ऑस्कर अवॉर्ड मिलने के बाद पूरे भारत में जश्न का माहौल है। हापुड़ की रहने वाली स्नेहा ने इस फिल्म में मुख्य भूमिका निभाई थी और अब उनके गांव में जश्न का माहौल है लोग मिठाईयां बांटकर खुशी का इजहार कर रहे हैं।

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Oscar Award for 26 Minutes (Period: End of Sentences)

फिल्म ‘पीरियड : एंड ऑफ सेंटेंस’ (Period: End of Sentence) भारत में मासिक धर्म से जुड़ी वर्जनाओं के खिलाफ महिलाओं की लड़ाई और असल जिंदगी के ‘पैडमैन’ अरुणाचलम मुरुगनाथम के काम पर बात करती है। ईरानी-अमेरिकी फिल्मकार रेका जेहताबची द्वारा निर्देशित फिल्म का निर्माण लॉस एंजेलिस के ओकवुड स्कूल के विद्यार्थियों के एक समूह और उनकी शिक्षिका मेलिसा बर्टन द्वारा स्थापित द पैड प्रोजेक्ट द्वारा किया गया है. ऑस्कर पुरस्कार के लिए ‘पीरियड : एंड ऑफ सेंटेंस’ का मुकाबला ‘ब्लैक शीप’, ‘एंड गेम’, ‘लाइफबोट’ और ‘ए नाइट एट द गार्डन’ के साथ था।

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फिल्म ‘पीरियड : एंड ऑफ सेंटेंस’ (Period: End of Sentence) को मिले पुरस्कार को लेने के लिए रेका जेहताबची और बर्टन मंच पर पहुंची  रायका जेहताबची ने कहा, “मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि मासिक धर्म पर बनीं फिल्म को ऑस्कर मिला है.” इस जीत से उत्साहित मोंगा ने ट्वीट कर कहा, “हम जीत गए. हमने सिखिया को नक्शे पर उतार दिया है.” बर्टन ने यह पुरस्कार अपने स्कूल को समर्पित करते हुए कहा, “इस परियोजना का जन्म इसलिए हुआ क्योंकि लॉस एंजिलिस के मेरे विद्यार्थी और भारत के लोग बदलाव लाना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “मैं इस पुरस्कार को फेमिनिस्ट मेजोरिटी फाउंडेशन, पूरी टीम और कलाकारों के साथ साझा करती हूं. मैं इसे दुनिया भर के शिक्षकों और विद्यार्थियों के साथ साझा करती हूं।

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