बिना भेदभाव के इस समाज सेवा के जज़्बे को हमारा सलाम

समाज सेवाडॉ सलीम अहमद और नबील अहमद ने दिन रात ड्यूटी कर रहे पुलिस कर्मियों को बिस्कुट के पैकेट बांटे

हमारी एकता, प्रेम भाइचारे, गंगा जमुनी तहज़ीब इंसानियत और देश प्रेम के जज़्बे के आगे हरेगा कोरोना वाॅयरस

लखनऊ। कोविड 19 यानी कोरोना वाॅयरस कि दहशत और इस वाॅयरस को रोकने और लड़ने के लिए सरकार द्वारा 22 मार्च को जानता कर्फ्यू लागू होने के बाद 23 मार्च को 21 दिनों का लॉकडाउन घोषित कर दिया गया जिसके चलते लोग अपने घरों में क़ैद हो गए। सारे बाज़ार मॉल ही पूरा शहर ही बन्द कर दिया गया मगर खाने पीने के सामान सब्ज़ी, अनाज, दवा और रोज़ कि ज़रूरत का सामान सुबह 7 बजे से रात के 11 बजे तक बेचने की इजाज़त दे दी गई।

आएसे में कुछ दुकानदार ज़्यादा मुनाफ़ा कमाने के लिए दामों में बढ़ोतरी करने लगे और मन मानी क़ीमत पर सामान बेचने लगे जिन लोगों के पास ज़्यादा पैसा था उन लोगों ने ज़रूरत से ज़्यादा सामान खरीद कर बाज़ार को ख़ाली कर दिया। सरकारी और मल्टी नेशनल कंपनी में काम करने वाले लोगों को घर बैठे तनख्वाहें मिल जाएंगीं मगर रोज़ ख़ाने कमाने वाले लोग कपड़ा दुकानदार, पटरी दुकानदार, जुता चप्पल बेचने और बनाने वाले, पंचर बनाने वाले, गाड़ी मेकैनिक, इ रिक्शा, टैक्सी, रिक्शा चालक कपड़े सिलने वाले प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन, फेरीवाले, चूडी वाले कोस्मेटिक का सामान बेचने वाले, सोने चांदी का काम करने वाले दुकानदार, कारीगर, मज़दूर, मिस्त्री, दिहाड़ी वाले, पल्लेदार दूसरे गाँव शहर से आने वाले शिक्षक, छात्र, छात्राएँ, सेल्समैन, सब काम ना होने की वजह से सब बेकार हो गए।

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होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, खाने पीने की दुकाने ठेले, बाटी चोखा, पूरी सब्ज़ी, छोला भटूरा, सब बन्द होने के कारण सब को खाने पीने के लाले पढ़ गए किसी के पास पैसे हैं मगर बाहर खा नहीं सकता किसी के पास पैसे नहीं हैं सामान खरीदने के लिए, राशन खरीद भी ले तो चूल्हा गैस नहीं है राशन पकाने के लिए ईधन नहीं है सब रोज़ कमाने खाने वाले हैँ जब 21 दिनों तक कोई काम नहीं है तो पैसा कहां से आएगा कैसे खाएंगे कहाँ से पैसे लाएँगे ये समस्या मध्यम वर्ग के लोगों और ग़रीबों सताने लगी।

लॉकडाउन के बाद लोग घरों, कमरों, फुटपाथ, पर भूख से बिलखने लगे रोने लगे आएसे हालत में सलाम उन इंसानों को जिन्होंने अपने परिवार के साथ साथ इन कि भूख प्यास तड़प और मजबूरी का ख्याल रखा और एक जुट होकर शहर के अलग अलग क्षेत्रों में सामाजिक संस्थाएं, समाज सेवियों, और आम इंसान जिसमें इंसानों की मदद का जज़्बा एहसास ज़िंदा था उन सभी लोगों ने अपने तौर से पास जो कुछ था और बाकी ने मिल कर एक दूसरे की मदद ले उनके लिए आगे बढ़ कर आए तथा अपने परिवार की तरह ही सब के लिए पके हुए भोजन से लेकर कच्चे राशन, दवा by का इंतेज़ाम करने लगे भीड़ न लगे और दूरी बनी रहे इसका ध्यान रखते हुए खाने के पैकेट बनाकर बांटने शुरू किए कच्चा राशन ज़रूरत मंदों को फोन के माध्यम से उनके घर पहुंचाने का काम करने लगे धीरे धीरे शहर में रहने वाले ग़रीबों के खाने की व्यवस्था होने लगी है।

सलाम है आएसे जांबाजों पर हमारे देश, प्रदेश और शहर के डॉक्टर्स, नर्स, नागरिक सुरक्षा संगठन, सफाई कर्मचारी, समाज सेवियों, सामाजिक संस्थाओं, और आम आदमी पर जो इस कोरोना वाॅयरस से अपने अपने संसाधनों के साथ लड़ रहे हैं बिना किसी नाम और दाम के लिए बल्कि अपने सच्चे हिन्दुस्तानी होने का फर्ज़ निभाने और इंसानियत के पैग़ाम को उन तक पहुंचाने के लिए जो सिर्फ इस मुश्किल वक़्त एवं हालत में देश और देशवासियों के हित में नहीं बल्कि अपनी पब्लिसिटी, कालाबाज़ारी, ज़्यादा मुनाफा कमाने तथा अपनी जेबें और तिजोरियों को भरने का काम करने के साथ साथ अपने शहर प्रदेश अपने देश एवं देशवासियों के साथ ग़द्दारी कर रहें हैं।

लेकिन हमें गर्व है इन पर ख़ासतौर पे लखनऊ की उम्मीद संस्था, वन फॅमिली सामाजिक संस्था, रहमानी मसीहा फ़ाउंडेशन, कुदरत फाउंडेशन, ऑल इंडिया पयामे इंसानियत फोरम, सलाम लखनऊ दी मिरर ऑफ कल्चर सोसाइटी, आर के पैलेस, कामायनी संस्था, भारत सृजन, प्रसादम संस्था सय्यद सूफ़ी इज़हार अली, सय्यद राशिद अली मीनाई ،सोहेल खान, सय्यद रफत रिज़वी, राजेश जैसवाल, आमिर मुख्तार, डॉ सलीम अहमद, हाजी सईद अहमद, ऋतुराज रस्तोगी, अहमद नबील, ज्ञानेन्द्र दत्त बाजपेई, मोइनुद्दीन इस्लाम सूफ़ी बस्तवी, डॉ उमंग खन्ना, दानिश गुड्डू मेकरानी, मो. सिराजजुद्दीन सैफ फारूख खान चाँद खान, उस्ताद गुलशन भारती, यूनुस खान गौरव निगम, डॉ आरिफ खान, फैज़ अहमद, डॉ फरीद सिद्दीक़ी, इमरान कुरैशी, ललित सिंह पोखरियाल, अर्पित मिश्रा बाबा, सय्यद यासिर रिज़वी, काशीफ़, नावेद, अबदुल्ला खान, भारत सरकार के आदेश का पालन करते हुए जो रात और दिन सिर्फ इंसानों और इंसानियत को बचाने के लिए काम कर रहे हैं।

इनके साथ साथ सभी देशवासियों को धर्म जाती भाषा हर भेदभाव से ऊपर उठकर देश हित के लिए काम करने की ज़रूरत है हर इंसान, शासन, प्रशासन, के पदाधिकारियों, को अपनी ज़िम्मेदारी से अपने काम को पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ करने की आवश्यकता है, इस समय घबराने या डरने की ज़रूरत नहीं है बस कुछ दिन दूरी बनाये रखने और सतर्क रहने की कोशिश करना है। खुद को और दूसरों को जागरूक करने की आवश्यकता है फिर देखियेगा हमारी एकता, प्रेम, भाइचारे, गंगा जमुनी तहज़ीब इंसानियत और देश प्रेम के जज़्बे के आगे हारेगा कोरोना वाॅयरस।

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