कोविड-19 एवं प्रशासन की गाइडलाइन के अनुसार अदा की गई परचम कुशाई की रस्म

दरगाह दादा मियाँ

दरगाह दादा मियाँ पर 113वे उर्स की तैयारियां शुरू

लखनऊ। परचम कुशाई का अर्थ है झंडा लहराना हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो वाले वसल्लम को दुनिया में भेजने से पहले फरिश्तों को परचम लगाने का हुक्म दिया गया कि एक काबे की छत पर दूसरे दुनिया के आखिरी हिस्से पर और तीसरा उस घर की छत पर जिस घर में आप सल्लल्लाहो अलैहि सल्लम पैदा होने वाले थे। इस बात से परचम कुशाई की अहमियत और मान का अंदाजा लगाया जा सकता है।

आप सल्लल्लाहो अलैहि सल्लम के बाद आपके खलीफाओं ने इस रस्म को बाकी रखा और परचमे इंसानियत को लहराते रहे। उसके बाद सूफी बुजुर्ग जो हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो सल्लम के सच्चे शैदाई और जनशीन थे उन्होंने इस बात को आगे बढ़ाया और पंचम की बुलंदी को बाकी रखा।

हिंदुस्तान में यह रिवायत सूफी बुजुर्ग हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्ला से शुरू हुई और आज भी गरीब नवाज रहमतुल्लाह के उर्स से पहले परचम कुशाई का आयोजन होता है, जिससे लोगों को यह मालूम हो जाए कि जल्द ही आप का उर्स मुबारक आने वाला है। इसके बाद सूफी बुजुर्ग ख्वाजा रुकनुद्दीन फ़िरदौस ने भी इस रस्म को आगे बढ़ाया।

इसी प्राचीन रस्म व रिवायत को बाकी रखने के लिए सूफी बुजुर्ग हजरत दादा मियां रहमतुल्लाह के उर्स के शुरुआत के मौके पर हर साल परचम कुशाई का आयोजन होता है, जिसमें हर जाति व धर्म के लोग उपस्थित होते हैं और दादा मियां के फैजान से मालामाल होते हैं। हर साल की तरह इस साल भी 21 से 25 रबी अव्वल मुताबिक 9 नवंबर से 13 नवंबर 2020 तक होने वाले 113 वें उर्स मुबारक पर राष्ट्रीय एकता के आधार पर परंपरागत ढंग से परचम कुशाई का आयोजन हुआ। इसी के साथ उसकी सभी तैयारियां भी शुरू हो गई।

दरगाह दादा मियाँ

हर साल की तरह इस साल भी सूफी नूर मोहम्मद फसाहती कानपुर ने अपने मुरीदों के साथ परचम लेकर आए। परचम कुशाई दरगाह के सज्जादा नशीन हजरत मोहम्मद शबाहत हसन शाह की सदारत और फरहत मियां व मिस्बा मियां की मौजूदगी में संपन्न हुई। परचम कुशाई से पहले महफिले समा का आयोजन हुआ, जिसमें कव्वालों ने सूफियाना कलाम पेश किए। इससे पहले दारुल उलूम शाहे रजा के मोहतमिम कारी ज़रीफ जहांगीरी ने परचम कुशाई के महत्व के बारे में लोगों को बताया।

इस अवसर पर दरगाह शरीफ के सज्जादा नशीन हजरत मोहम्मद शबाहत हसन शाह ने खुशी का इजहार करते हुए माहे रबी अव्वल की मुबारकबाद पेश की और शासन व प्रशासन तथा पत्रकार बंधुओं से अपील करते हुए कहा कि सभी कार्यक्रमों में अपना पूरा सहयोग देने की कृपा करें।

इस बार कोविड-19 को ध्यान रखते हुए और प्रशासन की गाइडलाइन के अनुसार उर्स मुबारक के सारे कार्यक्रमों को किया जाएगा, जिससे राष्ट्रीय एकता का प्रतीक इस उर्स का आयोजन सही ढंग से हो सके।

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