कबूतरबाज़ी का मुकाबला 10 मई से, दर्जनों कबूतरबाज़ होंगे शामिल

10 मई को होने वाले मुकाबले में 20 और 13 मई को होने वाले मुकाबले में 13 कबूतरबाज लेंगे हिस्सा

गोरखपुर। इस बार अपनी स्थापना का सिल्वर जुबली वर्ष बना रहा रहमत पिजन्स फ्लाइंग क्लब कबूतरों को जोरदार मुकाबले कराएगा। 10 मई को होने वाले मुकाबले में 20 और 13 मई को होने वाले 13 कबूतरबाज हिस्सा लेंगे। विजेताओं को 15 मई को नगद पुरस्कार मिलेगा।

रहमत पिजन्स फ्लाइंग क्लब के खादिम 55 वर्षीय आफताब दादा बताते हैं कि उन्होंने वर्ष 1993 में क्लब की शुरूआत की। तब से साल में 2 बार टूर्नामेंट कराया जाता है। मुकाबले वाले दिन सभी प्रतिभागी अपने-अपने घरों की छतों से 11 कबूतर उड़ाते हैं। इस दौरान अम्पायर प्रतिभागियों के घर पर उपस्थित रहता है। निर्णय के लिए 7 ऐसे कबूतरों का चुनाव किया जाता जो 4 घंटे से ऊपर उड़ान भरते हैं।

सबसे ज्यादा देर तक उड़ने वाला विजेता और प्रथम तीन एवं सांत्वना पुरस्कार भी प्रदान किए जाते हैं। मुकाबले के लिए प्रतिभागियों को प्रवेश शुल्क देना पड़ता है। शहर में इन दिनों तीन कबूतर फ्लाइंग क्लब रहमत पिजन्स फ्लाइंग क्लब, गोरखपुर पिजन्स फ्लाइंग क्लब, सिराज खान गोरखपुर फ्लाइंग क्लब सक्रिय है।

शहर के मशहूर पुराने कबूतर उड़ाने वाली शख्सियत

पुराने कबूतर उड़ाने वाली शख्सियतों में हाजी शाबान कुरैशी, मोहन बाबू, पुरूषोत्तम दास रईस शमिल है। पुरूषोत्तम दास रईस ने 1962 में पिजन्स फ्लाइंग क्लब खोला था। हकीम बदरूद्दीन, हकीम वसी अहमद, नवाब अली असगर भी इसके लिए मशहूर थे।

मौजूदा दौर में कबूतर उड़ाने में लोकप्रिय नाम

आफताब अंसारी गाजी रौजा, हसन जमाल उर्फ बबुआ कवलदह खूनीपुर, सिराज खान रायगंज, विकास कुमार नरसिंहपुर, अनिल जायसवाल बसंतपुर नरकटिया, अशफाक अहमद हुमायूंपुर, रामजी भाई खूनीपुर, राजू समानी खूनीपुर, शकिब उर्फ गुल्लू बनकटीचक लोकप्रिय हैं।

ऐसे तैयार करते हैं मुकाबले वाले कबूतर

मुकाबला केवल नर कबूतरों के बीच होता है। देशी कबूतर इस खेल में हिस्सा लेते है। इन कबूतरों को मादा से अलग रखा जाता है। आफताब अंसारी ने अपने कूबतरों का नाम टाइगर, शेरु, डुगडु, अबाबील, शहाबुद्दीन आदि रखा है। कबूतर भी अपना नाम पहचान जाते हैं। मुकाबले वाले कबूतर पूरे साल तैयारी करते हैं लेकिन मुकाबले के तीन माह पूर्व उनका शेड्यूल काफी सख्त हो जाता है। हर दिन कबूतरों की रियाज कराई जाती है।

कबूतरों की खुराक और देखभाल

कबूतरों को चना, गेहूं, सरसों समेत प्रतिदिन 10 बादाम भी मिलते हैं। नीलोफर, कासनी, सौंफ, धनिया, पुदीना, बेहाना की पोटली बनाकर उसका अर्क निकाल कर कबूतरों को दिया जाता है। सफेद मिर्च और गुड़ भी दिया जाता है। सर्दी के मौसम में गर्म चीज खिलायी जाती है। जाफरान भी घी में मिला कर एवं काली मिर्च के दाने दिए जाते है। कबूतरों पर चालीस से पचास हजार रुपया वार्षिक रखरखाव पर खर्च होता है।