शस्त्र लाइसेंस मामले पर पुलिस का शिकंजा

 

फर्जी असलहे और लाइसेंस का मामला धीरे धीरे तुल पकड़ता जा रहा है, आज इसको लेकर रवि आर्म्स के सील दुकान को तीन सदसीय टीम के सामने खोला गया

गोरखपुर । शस्त्र लाइसेंस मामले पर पुलिस का शिकंजा, हर दिन नया मोड़, हर दिन पुलिस के जाँच में कुछ एहम सुराग, जी हां गोरखपुर में फर्जी असलहे और लाइसेंस का मामला धीरे धीरे तुल पकड़ता जा रहा है, आज इसको लेकर रवि आर्म्स के सील दुकान को तीन सदसीय टीम के सामने खोला गया, और उसके अंदर रखे एहम दस्तावेजो को खंगाल कर जप्त किया गयाा।

गोरखपुर फर्जी लाइसेंस और अवैध पिस्टल के मामले में प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की नकेल, मुख्य आरोपी गोपी और मालिक रवि की 2 दिन पूर्व गिरफ्तारी के बाद रवि आर्म्स कारपोरेशन का पुलिस ने सील तोड़कर जांच करने पहुंचे, एडीएम सिटी आरके श्रीवास्तव, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट प्रथमेश कुमार, सीओ कैंट रोहन प्रमोद बोत्रे सहित भारी पुलिस बल भी मौजूद. दुकान के रजिस्टर और अन्य दस्तावेज कब्जे में लेकर प्रशासन और टीम ने आगे की कार्यवाही शुरू कर दी है।

शस्त्र लाइसेंस के खेल में एक नया खुलासा हुआ है, इस पूरे फर्जीवाड़े में शहर के एक ऐसे शातिर युवक के बारे में पता चला है, जो आर्म्स पोर्टल हैक कर पहले से जारी यूआईडी पर फर्जी गन लाइसेंस बनवाने वालों के नाम चढ़ा देता है, अभी तक जिस यूआईडी पर फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनाए, जाने का पता चला है, वह एक फौजी के नाम जारी हुआ है, इस मामले में कलेक्ट्रेट के एक बाबू के भी शामिल होने की सूचना मिली है, फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले में जेल भेजे जा चुके विजय प्रताप ने उस युवक को लैपटॉप दिया था, उस युवक की तलाश की जा रही है, उसकी गिरफ्तारी के बाद पता चलेगा।

कि उसने कहां से और कितने लाइसेंसधारियों की यूआईडी पर फर्जी तरीके से नाम चढ़ाए, पुलिस इस बात से भी हैरान है, कि सरकारी पोर्टल को शातिर ने कैसे हैक कर लिया, जबकि इसकी डिटेल पब्लिक में नहीं है, यह पोर्टल कोई बाहरी नहीं खोल सकता है, यह पूरी तरह से इंट्रानेट आधारित है। इसमें एनक्वायरी की भी व्यवस्था नहीं है, जो सिस्टम है वह शस्त्र विभाग के क्षेत्राधिकार में है।

कलेक्ट्रेट का एक बाबू शामिल पूरे फर्जीवाड़े में कलक्ट्रेट के एक बाबू के बारे में पता चला है, उसे जल्द गिरफ्तार किया जाएगा, सूत्रों की माने तो लाभ पहुंचाने के बदले में प्रॉपर्टी डीलर विजय प्रताप सिंह ने उसे कार गिफ्ट की थी। इस बाबू के जरिए कई और लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं, मामला सामने आने और इसमें रवि गन हाउस की मिलीभगत की पुष्टि होने के बाद अब डीएम द्वारा गठित तीन सदस्यीय मजिस्ट्रेट टीम ने आज रवि गन हाउस का ताला खोलकर दस्तोवज जब्त कर ली।

क्या है, यूआईडी नंबर, यूनिक आईडेंटिटी (यूआईडी) एक ऐसा नम्बर है जो बायोमेट्रिक कराने के बाद शस्त्र लाइसेंस पर चढ़ाया जाता है, इस नम्बर के जरिए देश के किसी भी शस्त्र अनुभाग में जांच की जा सकती है, यूआईडी की अनिवार्यता के बाद सभी लाइसेंसधारियों को बायोमेट्रिक कराकर लाइसेंस पर यूआईडी नम्बर चढ़वाना होता है, जिन लोगों ने बायोमेट्रिक नहीं कराया और यूआईडी नहीं चढ़वाया उनका नवीनीकरण नहीं हो सकता, इसके साथ ही उनका असलहा और लाइसेंस भी रद्द माना जाता है।

इस मामले पर आरोपी रवि से जब बात की गई तो उसका कहना था, कि हमारे पास जो रिकार्ड था, उसे दे दिया गया है, हमे इस बात की जानकारी नहीं थी, कि इस तरह से फर्जी लाइसेंस बन रहे है, इसमें सारा खेल असलहा बाबू राम सिंह का है, वो अमर और कुलदीप के माध्यम से पैसे लेकर प्रधान और अजय गिरी जो कम्प्यूटर आपरेटर है, उसके माध्यमस से फर्जी लाइसेंस तैयार करवाते थे, हमारे पास लाइसेंस लेकर आता था,स हम उसे बेच देते थे, फोन करा कर सारा डिटेल्स और सेल्स का डिटेल्स था, फोन करा कर सिटी मजिस्ट्रेट ने मंगवा लिए उन्होंने फोन कहा सब लेकर आफिस लाकर पहुचो, उसके बाद उस डिटेल्स का वो इंकार कर रहे है, वो क्या किये उसका नहीं पता चला, प्रधान अमर अजय गिरी कुलदीप के माध्यम से ये रैकेट चलाया जा रहा था, अब सारे रजिस्ट्रेशन के जरिये सब पता चल जाएगा कि इसमें और कौन कौन लोग है, असलहा बाबू की पूरी भूमिका है, सारे दस्तावेज हमने हैंन्डोवर कर दिया है।

जैसे –जैसे पुलिस की जांच आगे बढ़ रहा है, कई नाम इसमें आगे आते जा रहे है, अब जब पुलिस के पास दस्तावेज मिल गए है, तो दस्तावेज के जरिये कुछ और नए नाम आने की संभावना भी सामने आ रही है, फिलहाल कुछ चार नाम आरोपी रवि के द्वारा सामने ये है, और असलहा बाबू जो की पुरे खेल के जरिये रैकेट को चलाते थे, फिलहाल पुलिस अब इस मामले में किसी को बख्शने के मुड में नजर नहीं आ रह है।