पैगंबर-ए-आज़म के यौमे पैदाइश की खुशी पूरी कायनात मनाती है

जटेपुर उत्तरी में जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी जलसा

गोरखपुर । मोहल्ला जटेपुर उत्तरी में गुरुवार को जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी जलसा हुआ। जिसमें मुंबई से आये हुए मौलाना सैयद अब्दुल हबीब रज़वी ने बतौर मुख्य वक्ता कहा कि अल्लाह फरमाता है “बेशक तुम्हारे पास अल्लाह की तरफ़ से एक नूर आया और रौशन किताब”। यहां नूर से मुराद पैगंबर-ए-आज़म हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम हैं और किताब से मुराद क़ुरआन-ए-मुक़द्दस है। ‘मिलाद’ अरबी लफ़्ज है। जिसका अर्थ विलादत और पैदाइश होता है। पैगंबर-ए-आज़म की सीरत, सूरत, किरदार, व्यवहार, बातचीत व अन्य क्रियाकलाप, मेराज, मोज़ज़ों का बयान ही मिलाद-ए-पाक में होता है। पैगंबर-ए-आज़म तमाम पैगंबरों से अफ़ज़ल व आला हैं, बल्कि अल्लाह के बाद आपका ही मर्तबा है।

विशिष्ट वक्ता हाफिज अली अहमद ने कहा कि पैगंबर-ए-आज़म की विलादत (जन्मदिवस) की ख़ुशी मनाना ये सिर्फ इंसान की ही खासियत नहीं है बल्कि तमाम कायनात उनकी विलादत की खुशी मनाती है बल्कि खुद अल्लाह पैगंबर-ए-आज़म का मिलाद बयान फरमाता है। पूरा क़ुरआन ही मेरे आका की शान से भरा हुआ है। अल्लाह ने पैगंबर-ए-आज़म हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम की बैअत को अपनी बैअत, आपकी इज्जत को अपनी इज्जत, पैगंबर-ए-आज़म की ख़ुशी को अपनी ख़ुशी, आपकी मोहब्बत को अपनी मोहब्बत, आपकी नाराजगी को अपनी नाराजगी क़रार दिया है।

 जटेपुर उत्तरी में जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी जलसा।
जटेपुर उत्तरी में जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी जलसा।

तिलावत-ए-कुरआन हाफिज अब्दुल लतीफ निज़ामी ने किया। नात शरीफ मौलाना शादाब अहमद रज़वी ने पेश की। अंत में दरुदो सलाम पढ़कर मुल्क में अमन व सलामती की दुआ मांगी गई। संचालन तामीर अजीजी ने किया। जलसे में अली हुसैन, अहमद हुसैन, अब्दुल कादिर, मो. अरशद कादरी, सज्जाद निज़ामी, अरफात सहित तमाम अकीदतमंद शामिल रहे।

ईद मिलादुन्नबी के मौके पर पौधा लगाएं, न डीजे बजे न ही आतिशबाजी हो

पैगंबर-ए-आज़म हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने इंसानों को जीने का सलीका बताया। लोगों को सही रास्तें पर चलने की तालीम दी। सारी दुनिया पैगंबर-ए-आज़म के तुफैल बनायी गई। जीवन का ऐसा कोई पहलू नहीं जिसे बेहतर बनाने, अच्छाई को स्वीकार करने के लिए पैगंबर-ए-आज़म ने कोई संदेश न दिया हो। कायनात का जर्रा-जर्रा पैगंबर-ए-आज़म को आखिरी नबी व रसूल मानता है। पैगंबर-ए-आज़म की बातें इंसानों को सच की राह दिखाती हैं। ईद मिलादुन्नबी की खुशियां अदब व एहतराम के साथ मनाएं। इबादत करें, कुरआन-ए-पाक पढ़े, दरूदो-सलाम का नजराना पेश करें।

महफिल-ए-सीरतुन्नबी’ का आठवां दिन

उक्त बातें गुरुवार को मौलाना मकसूद आलम मिस्बाही ने तंजीम उलेमा-ए-अहले सुन्नत की ओर से नार्मल स्थित हजरत मुबारक खां शहीद मस्जिद में आयोजित ‘महफिल-ए-सीरतुन्नबी’ के आठवें दिन कहीं।

उन्होंने अपील किया कि ईद मिलादुन्नबी के मौके पर हर कमेटी व हर शख्स 12 पौधा लगाकर पर्यावरण को हरा भरा करे। जुलूस-ए-ईद मिलादुन्नबी में शहर की तमाम कमेटियां डीजे, बैंड बाजे या ढ़ोल बिल्कुल न बजवाएं और न ही आतिशबाजी की जाए। जुलूस में म्यूजिक वाली नात या कव्वाली भी न बजायी जाए। जुलूस में हुड़दंग बिल्कुल भी न हो, बल्कि शांति व अमन के साथ जुलूस निकाला जाए और प्रशासन का सहयोग किया जाये। जुलूस में दीनी पोस्टर या किसी मजार जैसे गुंबदे खजरा की बेहुरमती न हो इस बात का पूरा ख्याल रखा जाये। जुलूस की समाप्ति पर होर्डिंग्स व झंडे सुरक्षित स्थानों पर रख दिए जाएं। जुलूस में लोग इस्लामी लिबास, अमामा शरीफ व इस्लामी टोपी में सादगी के साथ शिरकत करें।

इस मौके पर सनाउल हक, शाह आलम, जमशेद अहमद, मो. अली, सदरे आलम, मो. सुहेल, अब्दुर्रहमान, शाहिद रज़ा, मो. आतिफ रज़ा, हाफिज शहाबुद्दीन, अशरफ, नबी हुसैन सहित तमाम लोग मौजूद रहे।

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