मुफ्ती-ए-आज़म हिंद के उर्स-ए-नूरी पर हुई कुरआन ख्वानी

आला हजरत इमाम अहमद रज़ा खां अलैहिर्रहमां के छोटे बेटे मुफ्ती-ए-आज़म हिंद हजरत मो. मुस्तफा रज़ा ने पूरी जिंदगी मजहब, मसलक और कौम की खिदमत की : मौलाना मकसूद आलम मिस्बाही

गोरखपुर । आला हजरत के छोटे साहिबजादे मुफ्ती-ए-आज़म हिंद हजरत मुफ्ती मो. मुस्तफा रज़ा खां नूरी अलैहिर्रहमां का 39वां ‘उर्स-ए-नूरी’ शनिवार को दारुल उलूम अहले सुन्नत फैजाने मुबारक खां शहीद नार्मल में अदबो एहतराम के साथ मनाया गया। कुरआन ख्वानी व फातिहा ख्वानी की गई।

मदरसे के प्रधानाचार्य मौलाना मकसूद आलम मिस्बाही ने मुफ्ती-ए-आज़म हिंद की जिंदगी व योगदान पर रोशनी डालते हुए कहा कि आला हजरत इमाम अहमद रज़ा खां अलैहिर्रहमां के छोटे बेटे मुफ्ती-ए-आज़म हिंद हजरत मो. मुस्तफा रज़ा ने पूरी जिंदगी मजहब, मसलक और कौम की खिदमत की। आपकी पैदाइश 22 जिलहिज्जा 1310 हिज़री बमुताबिक 18 जुलाई 1892 को बरेली शरीफ के मोहल्ला सौदागरान में हुई। आप कुरआन, हदीस, तफ़्सीर, फ़िक़्ह, सर्फ, अकाइद, तारीख, रियाज़ी, तौकीत, इल्मे ज़फर जैसे बहुत सारे विषयों के माहिर थे। आपने अपनी 92 साल की ज़िंदगी मे करीब एक लाख फतवा लिखा। पहला फतवा 13 साल की उम्र में लिखा। आपने तीन बार हज अदा किया। पहला हज 1905, दूसरा हज 1945 और तीसरा हज 1971 में किया। आपने बगैर फोटो के हज अदा किया। मुल्क विभाजन के समय मुरीदीन ने पाकिस्तान चलने पर बहुत मजबूर किया, लेकिन आपने पाकिस्तान जाने से साफ इंकार कर दिया। आपका कहना था कि मैं इस सरज़मीन पर हमेशा रहूंगा, जहां मेरे बुजुर्गों ने जिंदगी गुजारी है, जहां मस्जिदें, खानकाहें बनाईं हैं। इस मुल्क से मुझे मोहब्बत है। हिन्दुस्तान ही मेरा मुल्क है। उन्होंने बताया कि मुफ्ती-ए-आज़म हिन्द ने 1978 को गोरखपुर में नूरी मस्जिद तुर्कमानपुर व मदरसा मजहरुल उलूम घोसीपुरवा की संगे बुनियाद रखी थी।

शिक्षक मौलाना कैसर रज़ा अमज़दी ने कहा कि मुफ्ती-ए-आज़म हिंद ने तकरीबन 40 किताबें लिखीं। हिज़री 1312 में आपको हजरत शेख सैयद शाह अबुल हसन अहमद नूरी ने अपने सिलसिले में दाखिल फरमाया। आपने 18 साल की उम्र में तालीम मुकम्मल की। 1910 में सबसे पहला फतवा दिया। करीब 72 साल तक लगातार फतवा देने का काम अंजाम देते रहे। शेरों शायरी में भी आपको महारत हासिल थी। आपका दीवान ‘सामाने बख्शिश’ बहुत मशहूर है। आपकी ‘फतावा मुस्तफविया’ बहुत उम्दा किताब है। आपने 92 साल की उम्र में 14 मुहर्रम 1402 हिज़री मुताबिक 12 नवम्बर 1981 जुमेरात की रात 1 बजकर 40 मिनट पर इस दुनिया को अलविदा कहा। उन्होंने छात्रों से कहा कि हमें मुफ्ती-ए-आज़म की सादगी व पाकीजगी से प्रेरणा लेते हुए उनके नक्शे कदम पर चलना चाहिए।

मदरसा दारुल उलूम अहले सुन्नत फैजाने मुबारक खां शहीद नार्मल में 'उर्स-ए-नूरी' मनाया गया। तिलावत करते छात्र।
मदरसा दारुल उलूम अहले सुन्नत फैजाने मुबारक खां शहीद नार्मल में ‘उर्स-ए-नूरी’ मनाया गया। तिलावत करते छात्र।

मदरसे के छात्रों ने नात-ओ-मनकबत पेश की। अंत में सलातो सलाम पढ़कर मुल्क में अमन व भाईचारगी की दुआ मांगी गई। इस मौके पर मो. आतिफ रज़ा, मो. असलम, मो. अकरम, मो. अली, गुलाम वारिस, अनस रज़ा सहित तमाम छात्र मौजूद रहे।

स्कूल बैग बंटा तो खिल गए चेहरे, ड्रेस का इंतजार

मदरसा जियाउल उलूम पुराना गोरखपुर गोरखनाथ के करीब 100 छात्रों में शनिवार को बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा मिला स्कूल बैग बांटा गया। बैग मिलते ही छात्रों के चेहरे खिल गए। मदरसा के प्रधानाचार्य मौलाना नूरुज़्ज़मा मिस्बाही ने बताया कि विभाग द्वारा करीब 400 स्कूल बैग उपलब्ध कराया गया है। रविवार को भी बैग बांटा जायेगा। उन्होंने सरकार से मांग किया है कि जिस तरह सरकार द्वारा नि:शुल्क बैग व किताब दिया गया है।

मदरसा जियाउल उलूम पुराना गोरखपुर में स्कूल बैग बांटा गया।
मदरसा जियाउल उलूम पुराना गोरखपुर में स्कूल बैग बांटा

उसी तरह मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों को ड्रेस भी उपलब्ध कराया जाए। बैग बांटने के वक्त मौलाना जमील मिस्बाही, इसराक अहमद, मो. अंजुम नदीम, हाफिज शम्सुद्दीन, कारी नजरुल हसन, कारी अबूज़र नियाज़ी, मुजफ्फर हुसैन आदि शिक्षक व छात्र मौजूद रहे।

बस 1 क्लिक पर जानें देश-दुनिया की ताजा-तरीन खबरें Download करें संस्कार न्यूज़ चैनल की Application नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें या फिर play store पे sanskarnews सर्च करें- लेटेस्ट न्यूज़ अपडेट के लिए लाइक करें हमारा फेसबुक पेज- https://fb.com/sanskarnewslko/
Loading...