रसूल हम तेरे प्यारों का गम मानते हैं, हर एक हाल में फर्श ए अज़ा बिछाते हैं : नफीस हल्लौरी

 

पांचवी मुहर्रम के मातमी जुलूस को देख कर नम हुई आंखें

गोरखपुर । रसूल हम तेरे प्यारों का गम मानते हैं, हर एक हाल में फर्श ए अज़ा बिछाते हैं। नफी़स हल्लौरी के इसी नौहे पर मातम करते हुए अंजुमन हैदरी हल्लौर का पांचवी मोहर्रम का जंजीरी मातमी जुलूस मरहूम मोजिज़ा हुसैन रिज़वी के ख़ूनीपुर आवास से अपनी पुरानी रवायतों के साथ निकाला। यह जुलूस पिछले लगभग 50 सालों से हल्लौर एसोसिएशन के बैनर तले अपनी परम्परा को कायम रखते हुए निकाला जाता है। इससे पहले महिलाओं द्धारा मजलिस व माताम किया गया। लोग सड़को, गलियों और छतों पर जंजीर और कमा (छोटी तलवार) का मातमी जुलूस देखने के लिए जमें रहे। ज़जीरी मातम और कमां का मातम देख कर अकीदत मन्दों की आखें नम हो गयी। हर तरफ या हुसैन, या हुसैन की सदा गूज़ रही थी।

मातमी जुलूस खूनीपुर चौराहे से अंजुमन इस्लामिया पहुचा तो वहां हल्लौर से आये नफीस एडवोकेट ने इमाम हुसैन की शहादत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मात्र अपने घर के कुछ लोगों को लेकर इमाम हुसैन मदीने के लिए निकल पड़े और 2 मोहर्रम को इराक के करबला पहुचे। यजीद जो कि मुल्के शाम जिसे अब सीरिया कहते हैं, का जालिम तानाशाह था और इस्लाम को अपनी मर्ज़ी से चलना चाहता था, जिसके लिए वह पैगम्बर मोहम्मद (स0अ0) के नवासे इमाम हुसैन से बैयत (सन्धि) चाहता था लेकिन इमाम हुसैन ने यज़ीद से बैयत नही किया ।

ज़जीरी मातम और कमां का मातम देख कर अकीदत मन्दों की आखें नम हो गयी। हर तरफ या हुसैन, या हुसैन की सदा गूज़ रही थी

इसलिए यज़ीद ने कर्बला में रसूल के नवासे व उनके घराने के लोगों पर पानी बन्द कर दिया और नहर ए फरात पर पहरा बिठा दिया । 10 मोहर्रम सन् 61 हिजरी को इमाम हुसैन और उनके साथियों को शहीद कर दिया गया। यह दुनिया की पहली आतंकी कार्यवाही थी जिसमें शहीद हुए 72 लोगों में 6 माह के बच्चे से लेकर 78 साल के बुर्जुग शामिल थे। हुसैन शहीद तो हो गये लेकिन दुनिया को सब्रो-इन्सानियत का पैगाम दे गये और यह बता गये की इस्लाम सब्र व शहादत से फैला इसके लिए कुर्बानियां दी गयीं।

जुलूस में हल्लौर से आये नौहाखां नफीस सैयद, कमियाब बब्लू, मोहम्मद हैदर शब्लू, ने अपने कलाम से माहौल को गमगीन बना दिया। जुलूस में कस्बा हल्लौर से आये तमाम लोगों ने कमां और जंजीरों का मातम किया। मातमी जुलूस अंजुमन इस्लामिया से होता हुआ नखास चौक से रेती चौक होते हुए गीताप्रेस रोड स्थित इमामबाड़ा रानी आश्रफुन्नीश खानम मे पहुंचा जहां हल्लौर एसोसिएशन की जानिब से मजलिसे हुई।

जुलूस के समापन पर एसोसिएशन के सचिव ने इमामबाड़ा के निगरां आगा अली मोहम्मद , पुलिस-प्रशासन के अलाव मीडियाकर्मीयों तथा जूलूस में शामिल आम नागरिकों को उनके सहयोग के लिए शुक्रिया अदा करते हुए समापन की घोषणा की।

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