मध्यस्थता से नहीं अध्यादेश से बने श्रीराम मंदिर-चन्द्रपाल प्रजापति

- in Article, नोएडा
Ram Mandir

आलेख – चन्द्रपाल प्रजापति

India's Uday Chandrapal Prajapati Noida under the leadership of Modi
चन्द्रपाल प्रजापति

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति ए.ए.बोबडे, न्यायमूर्ति डी.वाई.चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण व न्यायमूर्ति एस.अब्दुल नजीर की खंडपीठ ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद अयोध्या विवाद मामले को सुलझाने के लिए तीन सदस्यीय समिति द्वारा मध्यस्थता का आदेश दिया है। इस समिति के अध्यक्ष सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एफ.एम.आई कलीफुल्ला होंगे और उनके साथ आर्ट ऑफ लीविंग के संस्थापक श्री श्री रवि शंकर व वरिष्ठ वकील श्रीराम पंचू इसके सदस्य होंगे। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का संतों ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए मामले को लटकाने वाला बताया है।

 

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जबकि मुस्लिम पक्षकारों ने कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय का फैसला उन्हें मंजूर होगा। रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत कमलनयन दास ने भी कहा है कि मुस्लिमों से कतई कोई समझौता नहीं हो सकता है। भगवान राम हिन्दुओं के आराध्य हैं। और वहां भगवान श्रीराम की जन्मभूमि है। उस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता है।

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इससे पहले भी हिन्दू और मुसलमानों की ओर से मिल बैठकर विवाद सुलझाने की पहल हुई थी। आर्ट आफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने दोनों पक्षों को बिठाकर रास्ता निकालने की पहल की थी। परन्तु नतीजा वही ढाक के तीन पात रहा था।

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के प्रयास को लेकर तूफान खड़ा किया जा रहा है कि यदि मन्दिर बना तो देश टूट जाएगा। देश के कोने-कोने में साम्प्रदायिक उन्माद बढ़ेगा। देश रक्त की नदी में डूब जाएगा। श्रीराम मन्दिर का निर्माण भारत के सेकुलर चरित्र के विरुद्ध है, इसके कारण अल्पसंख्यक सम्प्रदाय देश से अलग हो जाएगा। इन सेकुलरिस्टों को केवल अयोध्या ही दिखाई देती है। इनकी दृष्टि कश्मीर, पंजाब, असम, आंध्र, तमिलनाडु आदि राज्यों में व्याप्त आतंकवाद नहीं देख पाती। ये बंगलादेशी घुसपैठियों की सरपरस्ती तो करते हैं, किन्तु कश्मीर से भगा दिए, लाखों हिन्दू विस्थापितों की पीड़ा का इनके लिए कोई महत्व नहीं है। कांग्रेस अपनी साजिश में कामयाब हो रही है।

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श्रीराम मंदिर को चुनाव तक टलवाने का काम किया जा रहा था। कपिल सिब्बल यही चाहते थे और उन्होंने चक्रव्यूह रचकर चुनाव तक राम मंदिर को टलवा दिया है। सरकार से अनुरोध है कि वो सोमनाथ मंदिर की तर्ज़ पर कानून लाकर मंदिर बनाये। तभी विवाद समाप्त हो पायेगा। मुस्लिमों के आराध्य जब मक्का है, इसाइयों का वेटिकन है तो फिर हिन्दुओं के अराध्य देव पर हंगामा क्यों किया जा रहा है। हिन्दुओं के लिए इस पवित्रतम स्थान पर मुसलमानों को अपना दावा छोड़ देना चाहिए।

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