रेलवे में नौकरी दिलाने का झांसा,एसटीएफ ने सात को दबोचा

यह गिरोह बड़ी संख्या में बेरोजगारों को शिकार बना चुका है।

गोरखपुर । रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का एसटीएफ ने  पर्दाफाश कर दिया। इस गिरोह के सात सदस्य गिरफ्तार किए गए हैं। उनके पास से कई विभागों के फर्जी नियुक्ति पत्र, विभिन्न अधिकारियों के फर्जी मुहर, लाइसेंसी पिस्टल, दो लग्जरी कार और 11 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। पूछताछ में पता चला कि यह गिरोह बड़ी संख्या में बेरोजगारों को शिकार बना चुका है।

एसटीएफ को सूचना मिली थी कि नौकरी के नाम पर ठगी करने वाला एक गिरोह गोरखपुर, लखनऊ, आजमगढ़, मऊ, गाजीपुर और बलिया सहित प्रदेश के कई जिलों में सक्रिय है। सूचना के आधार पर एसटीएफ के एसएसपी ने वाराणसी यूनिट के इंस्पेक्टर अमित श्रीवास्तव के नेतृत्व में टीम गठित की थी। इस टीम में गोरखपुर फील्ड यूनिट के सिपाही अभिमीत कुमार तिवारी, अनूप राय, महेंद्र सिंह, सुमित सिंह व उमेश सिंह शामिल थे। इस टीम ने बुधवार को दिन में तीन बजे के आसपास गोरखपुर रेलवे स्टेशन के गेट नंबर तीन के पास से सात संदिग्धों को हिरासत में लिया। पूछताछ में उन्होंने बेरोजगारों से ठगी करने की बात कबूल कर ली।

इनकी हुई है गिरफ्तारी

मनोज कुमार सिंह निवासी लक्ष्मीपुर, गोला गोरखपुर

नरेंद्र शुक्ल निवासी परड़ी, गोला

विजय कुमार तिवारी निवासी असौजी, सिकरीगंज

वेदांती मिश्र निवासी भिटी खोरिया, खजनी

अखिलेश सिंह निवासी सिलहटा मुंडेरा, झंगहा

विशाल कुमार निवासी हलधरपुर, मऊ

दयानिधि निवासी मुस्तफाबाद निवासी मऊ यह हुई बरामदगी

वन विभाग का एक, रेलवे का आठ, लखनऊ सचिवालय का 10 और लखनऊ नगर निगम दो फर्जी नियुक्ति पत्र।

छह फर्जी मेडिकल रिपोर्ट व तीन अधिकारियों की फर्जी मुहर।

6410 रुपये नकद, एक लैपटाप और 11 मोबाइल फोन।

एक लाइसेंसी रिवाल्वर, एक मारुति कार व एक स्कार्पियो।

चार आधार कार्ड व एक फर्जी परिचय पत्र। ग्रामीण इलाकों के बेरोजगारों को बनाते थे शिकार : बेरोजगारों को जाल में फंसाने के लिए इस गिरोह के लोगों ने बकायदा एजेंट रखा था। गिरोह से जुड़े एजेंट ग्रामीण इलाकों में सक्रिय थे। बेरोजगारों को वे झांसे में लेकर गिरोह के सदस्यों के पास ले आते थे। गिरोह के लोग सात से 10 लाख रुपये के बदले में उन्हें नौकरी दिलाने का भरोसा देते थे। रकम मिलने के बाद फर्जी नियुक्ति पत्र देने के बाद प्रशिक्षण के नाम पर किसी निजी कारखाने में उन्हें भेज देते थे। इसके बाद वे फरार हो जाते थे।

भरोसे में लेने के लिए विभाग के परिसर में लेते थे इंटरव्यू

इस गिरोह के लोग जिस विभाग की नौकरी दिलाने का झांसा देते थे। उसी विभाग के परिसर में उनका फर्जी इंटरव्यू लेते थे। जैसे रेलवे में नौकरी दिलाने के लिए रेलवे परिसर में ही स्थित किसी कार्यालय में अवकाश के दिन इंटरव्यू का आयोजन करते थे। इतना नहीं वे जो नियुक्ति पत्र देते थे, उसकी छपाई संबंधित विभाग के दस्तावेज छापने वाले प्रेस में ही होती थी।

एसटीएफ की छानबीन में पता चला है कि रेलवे और प्रदेश सचिवालय के कुछ कर्मचारी भी इस गिरोह से जुड़े हैं। जालसाजों से पूछताछ में इन कर्मचारियों के बारे में पता चला है। उनकी गिरफ्तारी के लिए एसटीएफ नए सिरे से प्रयास कर रही है।

मऊ का दयानिधि है गैंग सरगना

गिरफ्तार किए गए जालसाजों में शामिल मऊ जिले का दयानिधि इस गैंग का सरगना है। उसके खातों की छानबीन में पता चला है कि हाल के दिनों में 3.50 करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन हुआ है।