अपोलो मेडिक्स सुपर स्पेशलटी हॉस्पिटल में हुआ कैसंर का सफल उपचार

अपोलो मेडिक्स सुपर स्पेशलटी हॉस्पिटल

प्रदेश में पहली बार साइटो-रिडक्टिव सर्जरी और हाईपेक विधि से अपोलो मेडिक्स सुपर स्पेशलटी हॉस्पिटल में हुआ कैसंर का सफल उपचार

लखनऊ। अपोलो मेडिक्स सुपर स्पेशलटी हॉस्पिटल (Apollo Medics Super Specialty Hospital) के ओंकोसर्जरी विभाग के डाक्टरों की टीम ने Successful treatment of cancer कैसंर का सफल उपचार के लिये नवीन पद्धति साइटो-रिडक्टिव सर्जरी और हाइपर थर्मिक इन्ट्रापेरिटोनियल कीमोथेरेपी का प्रयोग करते हुए कैंसर सफल उपचार किया।

43 वर्षीय रजनी खरे, लखनऊ निवासी, म्यूसिनस एडिनोकार्किनोमा अपेन्डिक्स नामक पेट के कैंसर से पीड़ित थी और वो इसके उपचार हेतु पूर्व में भी अन्य हॉस्पिटल में दो सर्जरी करवा चुकी थी। परन्तु उनका कैंसर (Cancer) पूरी तरह से ठीक नहीं हुआ कई अलग अलग हॉस्पिटल में चक्कर काटने व निराश होने के बाद अन्ततः उन्होने अपोलो मेडिक्स सुपर स्पेशलटी हॉस्पिटल से सम्पर्क किया।

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अपोलो मेडिक्स सुपर स्पेशलटी हॉस्पिटल

अपोलो मेडिक्स हॉस्पिटल (Apollo Medics Super Specialty Hospital) के सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डाक्टर कमलेश वर्मा ने बताया कि महिला रजनी खरे की स्थिति को देखते हुए हमने साइटो-रिडक्टिव सर्जरी और हाईपेक करने का फैसला किया। दो चरणों में हुए इस उपचार में पहले चरण में साइटो-रिडक्टिव सर्जरी के दौरान पेट में दिख रहे सभी कैंसर को हटाने के लिये सर्जरी की जाती है। जबकि दूसरे चरण में हाइपेक प्रक्रिया द्वारा किसी भी शेष कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने लिये कीमोथेरेपी की जाती है।

इस प्रक्रिया के दौरान हाइपेक मशीन द्वारा शरीर में एक कीमोथेराप्यूटिक एजेंट युक्त गर्म द्रव्य एक निश्चित तापमान पर पेरिटोनियल गुहा में अधिकतम दो घन्टे संचालित किया जाता है। इस प्रक्रिया द्वारा कीमोथेरेपी के सामान्य दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है। सामान्यत: इस पूरे उपचार में 6 से 18 घन्टे तक का समय लगता है लेकिन अगर कैंसर विस्तृत रूप से फैला हो तो सर्जरी का समय अधिक भी हो सकता है।

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अपोलो मेडिक्स सुपर स्पेशलटी हॉस्पिटल के डॉ सुशील गट्टानी ने इस सफल सर्जरी का श्रेय पूरी टीम को देते हुए कहा कि अपोलो मेडिक्स सुपर स्पेशलटी हॉस्पिटल में आने वाले हर मरीज को विश्व विख्यात सुविधा देना उनका पहला उद्देश्य है। प्रदेश में इस तरह की यह पहली सर्जरी है जिसमें हाइपेक विधि का प्रयोग किया गया है। रोगी को सफल सर्जरी के 10 दिन बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गयी।

वहीं अपोलो मेडिक्स हॉस्पिटल के मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, डॉ हर्षवर्धन आत्रेय ने कहा कि कैंसर के उपचार के लिये हाईपेक एक बहुत ही उन्नत तकनीक है । अपोलोमेडिक्स में इस तकनीक के उपलब्ध होने से कैंसर पीड़ितों को अपने उपचार के लिये यहाँ वहाँ भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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