राज्यपाल ने दिया छात्र छत्राओ को गुरु मंत्र / किया सम्मानित

गोरखपुर। राज्यपाल आनन्दी बेन पटेल ने दिया छात्र छत्राओ को गुरु मंत्र, मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) का पांचवा दीक्षांत समारोह की शुरुवात आज प्रदेश की राज्यपाल महोदया आनंदीबेन पटेल ने दीप प्रज्वलित करके किया।

कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने इसकी अध्यक्षता की, जलपुरुष राजेंद्र सिंह बतौर मुख्य अतिथि मौजूद रहें, विशिष्ट अतिथि के रूप में प्राविधिक शिक्षा एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह उपस्थित थे। मुख्य कार्यक्रम विवि के बहुउद्देशीय हाल में हुआ ।

कुलाधिपति ने कुल 1191 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की, बीटेक सिविल इंजीनियरिंग के अनूप पांडेय और प्रगति सक्सेना को कुलाधिपति स्वर्ण पदक दिया गया।

उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को कुल 36 स्वर्ण पदकों से विभूषित किया गया, इनमें 2 कुलाधिपति स्वर्ण पदक, 16 कुलपति स्वर्ण पदक सहित 18 प्रायोजित स्वर्ण पदक शामिल थे।

उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में 859 पुरुष अभ्यर्थी जबकि 332 महिला अभ्यर्थी शामिल रही, कुल सोलह विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए, जिनमें 9 छात्र और 7 छात्राएं सम्मिलित रही।

पहली बार केमिकल इंजीनियरिंग में बीटेक एवं भौतिकी में एमएससी की उपाधि प्रदान की गई, इस साल चांसलर अवार्ड (कुलाधिपति स्वर्ण पदक) के लिए टाई हो गया, सिविल इंजीनियरिंग के दो छात्रों को एक बराबर अंक मिले।

ऐसे में दोनों को चांसलर अवार्ड देने का फैसला किया गया था, उपाधि पाने वाले छात्र भी उत्तरीय और टोपी पहनें नजर आए, कुलाधिपति के उत्तरीय और टोपी का रंग गहरा लाल था, कुलपति गुलाबी, मुख्य अतिथि नीले, प्रबंध बोर्ड के सदस्यगण गहरे भूरे, कुलसचिव पीले रंग की उत्तरीय और टोपी पहनकर इस समारोह में मौजूद रहे।

समारोह में बीटेक के छात्र मैरून, एमटेक फिरोजी, पीएचडी सफेद, एमसीए ग्रे और एमबीए के छात्र नारंगी रंग के उत्तरीय व टोपी पहनकर उपाधि ग्रहण किये ।

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा, गाेद लिए गांवों की समस्याओं के हल करने की दिशा में कार्य करें विश्वविद्यालय उत्‍तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि शिक्षा हमें आदर्श नागरिक बनाती है।

यह डिग्री सिर्फ कागज का टुकड़ा नहीं है बल्कि इसमें आपका और देश का भविष्य है, आज आपने प्रौद्योगिकी में जो कुछ सीखा है उसका उपयोग समाज के लिए करिए। हमें गांव जाकर महिलाओं, बच्चों की समस्याओं को समझकर उसके समाधान का प्रयास करने की जरूरत है।

कुलाधिपति मदन मोहन मालवीय प्रौद्याेगिकी विश्वविद्यालय में पांचवें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहीं थीं, उन्होंने कहा कि यह भूमि भगवान बुद्ध की भूमि है।

महायोगी गुरु गोरखनाथ की भूमि है, संत कबीर की भूमि है। ऐसी तपोभूमि पर आकर मैं धन्य हूं। दीक्षांत समारोह में आज कई विद्यार्थियों को डिग्री व को गोल्ड मेडल प्रदान किया गया है। इसके लिए मैं छात्र-छात्राओं को बहुत-बहुत बधाई देती हूं।

और अपेक्षा करती हैं वे अपने जीवन में आगे बढ़ते रहें और साथ-साथ देश को भी आगे बढ़ाते रहें। आज के समारोह में हमारे बीच में कई छोटे-छोटे बच्चे भी आए हैं। पिछले एक साल से यह प्रयास हुआ है। इस समारोह में यही छोटे बच्चे मेरे अतिथि हैं।

इसलिए उन्हें पहली पंक्ति में बैठाया गया है। एक बच्चे से मैंने पूछा कि कहां आए हो तो उसने कहा मंच पर। यह बच्चें का सही उत्तर था। आज विवि की ओर से कई प्रकार के साहित्य दिए गए हैं। यह बच्चें उसी गांव के है जिसे विवि द्वरा गोद लिया गया है।

इन बच्चों के चेहरे पर मुस्कान देख मुझे काफी खुशी हो रही है, राज्यपाल ने कहा कि देश में नई शिक्षा नीति लागू हुई है, जिसमें प्रावधान किया गया है कि वर्ष 2030 तक 50 फीसद युवाओं को विवि व कालेज तक पहुंचाना है।

इसकी शुरुआत हमें प्राइमरी स्तर से करनी होगी। आज यह संख्या महज 15 से 20 फीसद है। इसमें हमें बढ़ोतरी करनी होगी। हमें गोद लिए गांवों में जाकर बच्चों को बढ़ाना होगा, उन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित करना होगा तभी 2030 तक हमें इस मिशन में सफल हो जाएंगे, समाज में व्याप्त कुरीतियों पर चर्चा करते हुए कुलाधिपति ने कहा कि हम कभी जेल नहीं गए।

लेकिन जेल देखने जरूर गए है। लखनऊ में मैं एक जेल देखने गई। वहां 250 महिलाएं विभिन्न कारणों से सजा काट रहीं थीं। मैंने उनसे सजा का कारण पूछा तो उन्होंने वजह बहू को जान से मारने, जला देना बताया।

मैंने पूछा ऐसा क्यों तो उन्होंने बताया कि वह दहेज नहीं लाईं। मैंने कहा कि क्या दहेज में पांच लाख रुपये व गाड़ी मिल जाती तो क्या जिंदगी कट जाती। आज उनका परिवार बिखर गया है।

गांवों में दहेज व जमीन को लेकर विवाद हो रहे हैं। भाई ने भाई को गोल से उड़ा दिया, फिर जेल चले गए। उनके बच्चों पर कैसा संस्कार मिलता होगा। यह सोचने की जरूरत है। शिक्षा हमें यह नहीं सिखाता बल्कि आदर्श नागरिक बनाता है। हमें इसी पथ पर आगे चलना चाहिए ।

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