प्रदेश की इकलौती देवी माँ जहा बलि चढाने की है प्रथा

गोरखपुर में एक एसा मंदिर है, जहा बलि की प्रथा है, यहा पर शहीद क्रांतिकारी बंधू सिंह और माँ के बीच एसा अटूट माँ और बेटे का रिश्ता है, जिसे पूरी दुनिया में प्रशिद्ध है

गोरखपुर । प्रदेश का इकलौता मंदिर, बलि चढाने की प्रथा, माँ तरकुलहा देवी करती है, सभी की मनोकामना पूरी, जी हां गोरखपुर में एक एसा मंदिर है, जहा बलि की प्रथा है, यहा पर शहीद क्रांतिकारी बंधू सिंह और माँ के बीच एसा अटूट माँ और बेटे का रिश्ता है, जिसे पूरी दुनिया में प्रशिद्ध है, और उनके ऊपर माँ तर्कुलहा देवी का असीम कृपा बना थाा।

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नवरात्र में भक्तों की लगी भीड़ ,सबकी मुरादें पूरी करती हैं माता तरकुल्हा देवी, शारदीय नवरात्र में गोरखपुर के चौरी चौरा मे मां तरकुलहा देवी के मंदिर पर भक्तों का ताता लगा रहता है, इस अवसर पर भक्तों ने मां तरकुलहा देवी  की आराधना की और मन्नत मांगी, आज सुबह से मां तरकुलहा देवी के मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ लगी हुई थी, दूरदराज से आए लोगों ने मां के दर्शन कर उनकी पूजा अर्चना की, वही भक्तों का कहना था।

कि मां तरकुलहा से जो भी मांगा गया है, वह मुरादे हमारी पूरी हुई हैं, यहां से कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं जाता, मंदिर के पुजारी ने बताया कि यह मंदिर सदियों वर्ष पुराना है, इस मंदिर की कहानी स्वतंत्रता सेनानी शहीद बंधु सिंह से भी जुड़ी हुई है, जो मां तरकुलहा देवी की आराधना करते थे, मां तरकुलहा देवी का आशीर्वाद उनके साथ बना हुआ था, यहां पर बलि देने की प्रथा है।

नवरात्र में भक्तों की लगी भीड़ ,सबकी मुरादें पूरी करती हैं माता तरकुल्हा देवी

आपको बतादें, स्वतंत्रता सेनानी शहीद बंधू सिंह अंग्रेजों का सर काट कर मां को बलि चढ़ाते थे, जब वह पकड़े गए, तो उनको फांसी दी जा रही थी, और 7 बार उन्हें फांसी के फंदे पर लटकाया गया, और सातों बार वह फंदा टूट गया, बाद में खुद शहीद बंधू सिंह ने मां से आराधना की और खुशी-खुशी फांसी के फंदे पर लटक गए, प्रधान पुजारी ने बताया, कि इस मंदिर पर जो भी मां से अपने इच्छा बताता है, मां उसे पूर्ण करती है।

मां तरकुलहा देवी मंदिर के दरबार में जाने के लिए हर समय साधन मौजूद हैं, गोरखपुर जिला मुख्यालय से लगभग 22 किलोमीटर देवरिया रोड पर फुटहवा इनार के पास मंदिर मार्ग का मुख्य गेट है, वहां से लगभग डेढ़ किमी पैदल, निजी वाहन या आटो से चलकर मंदिर पहुंचा जा सकता है, और इस दर पर आकर भक्तो मन चाही इच्छा पूरी हो जाती है।