जनसंख्या (Population) नियंत्रण के लिए हो स्थाई समाधान- चन्द्रपाल प्रजापति

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बढ़ती आबादी को देखते हुए माना जा रहा है कि 2022 में ही भारत दुनिया का सर्वाधिक आबादी (Population) वाला देश बन जाएगा- आलेख – चन्द्रपाल प्रजापति नोएडा

जिस रफ्तार से जनसंख्या (Population) वृद्धि हो रही है, वह दिन दूर नहीं जब जनसंख्या की वजह से ही विकास की गति रुक जाएगी। लगभग 1.32 अरब की जनसंख्या के साथ भारत विश्व का दूसरा सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश है। 2029 में भारत के सर्वाधिक जनसंख्या (Population) वाला देश बन जाने की बात कही जा रही है।

परन्तु अब बढ़ती आबादी (Population) को देखते हुए माना जा रहा है कि 2022 में ही यह दुनिया का सर्वाधिक आबादी वाला देश बन जाएगा। भारत इस मामले में जनसंख्या (Population) वृद्धि रूपी एटम बम के ऊपर बैठा हुआ है, जिसमें कभी भी विस्फोट हो सकता है।

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भारत का हर कोना, हर नुक्कड़, ज्यादा आबादी होने का जीता जागता उदाहरण है। चाहे आप कहीं भी हों मेट्रो स्टेशन, हवाई अड्डा, रेलवे स्टेशन, सड़क, हाईवे, बस स्टॉप, अस्पताल, शॉपिंग मॉल, बाजार, मंदिर या फिर कोई सामाजिक या धार्मिक समारोह, आप इन सब जगहों को दिन के किसी भी समय भीड़ से भरा देख सकते हैं। इससे साफ पता चलता है कि देश में जनंसख्या (Population) कितनी ज्यादा है।

देश में तेजी से बढ़ रही जनसंख्या (Population) को लेकर अपनी चिंता जाहिर करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों से छोटे परिवार की अपील की है। जबकि एक दौर में कांग्रेस नेता संजय गांधी ने भी देश में जनसंख्या (Population) नियंत्रण के लिए नसबंदी अभियान चलाया था। राजनीतिक कारणों से वो अभियान आगे नही बढ़ सका।

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बढ़ती जनसंख्या (Population) के कारण राष्ट्रीय संसाधनों पर बोझ बढ़ेगा, जिससे एक तरफ स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार की समस्याएं उत्पन्न होंगी, दूसरी तरफ आवास, पेयजल और प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भरता के कारण पर्यावरणीय संकट भी उत्पन्न होगा। जनसंख्या (Population) का दबाव बढ़ने के कारण सामाजिक समरसता पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। सीमित संसाधनों के बीच जनसंख्या वृद्धि से सामाजिक न्याय का सिद्धांत भी प्रभावित होगा, जो अंतत: जातीय हिंसा एवं सामाजिक तनाव के रूप में सामने आएगा।

जनसंख्या (Population) नियंत्रण के पीछे मजहब को आधार बनाकर चलने के स्थान पर तार्किक एवं वैज्ञानिक चिंतन जो कि संविधान के 51(ए) के तहत मूल कर्तव्य तथा अनुच्छेद 38 एवं 44 के तहत राज्य के नीति निर्देशक तत्व में अन्तनिर्हित है, को अपनाने की जरूरत है। संविधान का अनुच्छेद 38 यह स्पष्ट घोषणा करता है कि राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि के लिए सामाजिक व्यवस्था बनाएगा।

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अत: सामाजिक व्यवस्था को धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि लोक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए संविधान के आधार के अनुरूप चलाने एवं नियंत्रित किये जाने की आवश्यकता है। राज्य द्वारा समान जनसंख्या (Population) नीति को लागू किया जाना चाहिए।

वोट बैंक एवं छद्म पंथनिरपेक्षता की बजाए दृढ़ इच्छाशक्ति और राजनीतिक कुशलता से राष्ट्रहित को केंद्र में रख कर नीति बनाने की आवश्यकता है। जो वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी में हैं और समस्त देश उनकी ओर देख रहा है कि कब वो धारा 370 की तरह ही जनसंख्या (Population) नियन्त्रण के लिए स्थाई समाधान इस देश को देंगें?

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