triple talaq bill मुस्लिम समाज बोला, तीन तलाक बिल फायदा कम जहमत ज्यादा देगा

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triple talaq bill – शरीयत में कुरआन व हदीस के मुताबिक तलाक के नियम दिए गए हैं वही कानून अगर बीजेपी सरकार बना देती तो सभी खुश होते : गृहणी फरहा

गोरखपुर। लोकसभा के बाद मंगलवार को राज्यसभा में तीन तलाक बिल (triple talaq bill) पास हो गया। मुस्लिम समाज व महिलाओं के जीवन पर इसका क्या असर पड़ेगा। सुनिए उन्हीं की जुबानी।

सिविल कोर्ट के एडवोकेट तौहीद अहमद का कहना है कि इस बिल में बहुत सारी खामियां है। जिसको लोकसभा व राज्यसभा में विपक्षी सांसदों ने बार-बार बताया लेकिन बीजेपी सरकार ने अनसुना कर दिया। इस बिल (triple talaq bill) से परिवार का तानाबाना सुधरने के बजाए बिगड़ जायेगा। पति को जेल भेजा जाना कहीं से न्याय संगत नहीं है।

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सुप्रीम कोर्ट में इस बिल (triple talaq bill) को चैलेंज किया जायेगा तो यह टिक नहीं पायेगा। अच्छा होता सभी दलों व मुस्लिम बुद्धिजीवियों के सुझाव को मानकर सहमति से बिल बनाया जाता। पति को जेल भेजना यह क्रिमिनल जुरिस्प्रूडेंस के अनुसार बिल्कुल तर्कसंगत नहीं है। इस बिल की संवैधानिकता पर प्रश्न चिन्ह इसलिए है कि यह मौलिक अधिकारों का स्पष्ट उल्लघंन करता है।

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शबनम अमीन – फरहा – गौसिया

शिक्षिका गौसिया ने कहा कि तीन तलाक बिल (triple talaq bill) का क्या परिणाम होगा यह तो आने वाला समय बतायेगा। फिलहाल सजा से बेहतर जुर्माने का प्राविधान होता तो बेहतर रहता। जब सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया किया कि तीन तलाक से शादी टूटी नहीं तो सजा कैसी। इससे फायदा कम नुकसान ज्यादा नजर आ रहा है। तीन साल जेल होने पर शौहर कैसे बीवी व बच्चों का भरण पोषण करेगा, विचारणीय बिंदु है। सजा पूरी करके जब शौहर जेल से बाहर आयेगा तो शौहर बीवी की कैसे निभेगी यह तो खुदा जाने।

जाफ़रा बाजार की शबनम अमीन ने कहा कि पहले तो लगा था कि बीजेपी सरकार जो बिल लायेगी वह महिलाओं को मजबूती प्रदान करेगा लेकिन शौहर को तीन साल की सजा का प्राविधान गैर मुनासिब है। आर्थिक दंड लगाया जाना ही काफी था। इससे बेहतर बिल बन सकता था अगर इसे सलेक्ट कमेटी में भेजा जाता। सभी दलों, मुस्लिम धर्मगुरु व महिलाओं की राय भी इस बिल को बनाने में ली जाती तो अच्छा होता है। इस बिल से परिवार जुड़ने के बजाए टूटेगा। ऐसी आशंका है।

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गृहणी फरहा इस बिल से खुश नहीं हैं। वह कहती हैं कि शरीयत में कुरआन व हदीस के मुताबिक तलाक के नियम दिए गए हैं वही कानून अगर बीजेपी सरकार बना देती तो सभी खुश होते। शौहर को तीन साल की सजा, महिला पर आरोप सिद्ध करने का भार, जेल में रहते हुए परिवार व बच्चों का भरण पोषण करना इस बिल को कमजोर बनाता है।

इसमें पुरुषों पर ज्यादती तो हुई ही है महिलाओं को क्या फायदा हुआ पता ही नहीं चल पा रहा। सुप्रीम कोर्ट जब कह चुका है कि तीन तलाक से शादी नहीं टूटी तो सजा किस बात की। यानी तीन शब्द बोलने पर तीन साल की सजा।

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