रणथंभौर नेशनल पार्क में गूंजी किलकारी, बढ़ा बाघों का कुनबा

रणथंभौर नेशनल पार्क

रणथंभौर नेशनल पार्क में बाबू के बच्चों की गूंजी किलकारी, बढ़ा बाघों का कुनबा, नए शासकों ने दी दस्तक

राजिस्थान। विश्व विख्यात रणथंभौर नेशनल पार्क (Ranthambore National Park) एक बार फिर बाबू के बच्चों की गूंजी किलकारी बाघों का बड़ा कुनबा नए शासकों ने दी दस्तक। जैसा कि रणथंबोर नेशनल पार्क (Ranthambore National Park) बाघों की स्वच्छंद विचरण के लिए विश्वविख्यात है। ऐसे में एक बार फिर बाघिन टी 73 बागी टी17 सुंदरी की बेटी ने तीन शावकों को जन्म देकर रणथंबोर नेशनल पार्क को शावकों को जन्म देकर आबाद करने में भूमिका निभाई।

रणथंभौर नेशनल पार्क

रणथंबोर नेशनल पार्क (Ranthambore National Park) के कुंडेरा वन चौकी क्षेत्र के दर्रा नॉन ट्यूरिज्म क्षेत्र में वन विभाग को सूचना मिली कि एक टाइग्रेस अपने तीन बच्चों के साथ स्वच्छंद विचरण कर रही है। ऐसे में वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और शावकों के विचरण को लेकर से पुख्ता करने के लिए क्षेत्र में फोटो ट्रेक कैमरे लगवाए गए जिसमें एक बाघ टी73 अपने तीन नन्हे शावकों के साथ जंगल में विचरण करती मिली और इस दौरान जब कैमरे के सामने से गुजरी तो बाकी के तीनों साधकों और बाघ की फोटो कैमरे में कैद हो गई जिसके बाद वन विभाग शावकों की सुरक्षा को लेकर हरकत में आया और कुंडेरा वन क्षेत्र में दर्रा में शावकों के जन्म के बाद सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई।

ये भी पढ़े: अर्जुन के साथ मलाइका निकली हॉलिडे पर, दोनों लोग दिखे मुंबई एयरपोर्ट पर

वन अधिकारियों का कहना है कि यह वन क्षेत्र  पर्यटकों के विचरण करने पर प्रतिबंधित क्षेत्र है ऐसे में बागी ने उसके शावकों की सुरक्षा को लेकर मॉनिटरिंग गार्ड तैनात किए गए हैं। इन शावकों कि रणथंबोर ने शहर में दस्तक के बाद शावकों की संख्या बढ़कर करीब दो दर्जन हो गई है। शावकों की बढ़ती हुई संख्या के साथ ही वन अधिकारियों में इनकी सुरक्षा को लेकर चिंता का विषय बना हुआ है जिसके चलते कई मॉनिटरिंग टीम अलग-अलग क्षेत्रों में जहां शावकों जन्म दिया वह जिस क्षेत्र में विचरण करते हैं उन क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

रणथंभौर नेशनल पार्क

हैरत की बात तो यह है कि पूर्व में भी रणथंभौर नेशनल पार्क (Ranthambore National Park) में वन विभाग के अधिकारियों द्वारा नन्हे शावकों की सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे किए गए थे लेकिन उनमें से अधिकांश शावक कहां और किस हालात में है यह आज तक पता नहीं चला। ऐसे में बढ़ते हुए शावकों की संख्या के साथ वन अधिकारियों को सुरक्षा व्यवस्था में विशेष तौर पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

वन अधिकारियों की मानें तो रणथंबोर बाघों से आबाद करने में लगभग 60 फ़ीसदी भूमिका बाघिन मछली की रही है जिसकी मौत करीब 2 साल पूर्व हो गई रिश्ते में कहीं तो बाग इन टी 73 मछली की नातिन है ऐसे में बागी मछली ने रणथंभौर नेशनल पार्क में 1997 में जन्मी ओर 20 साल गुजारे और 20 साल बाद रणथंभौर से बाघिन मछली 2016 में रणथंबोर नेशनल पार्क से अलविदा कह गई आज उसी की मेहरबानी है कि रणथंभौर नेशनल पार्क में बाघों की अठखेलियां देखने के लिए देसी व विदेशी सैलानी हर वर्ष लाखों की तादाद में यहां बाघों की स्वच्छंद अठखेलियां देखने के लिए आतुर रहते हैं।

ये भी पढ़े: क्रिकेटर शाकिब अल हसन ने कहा भारत को हरा सकता है बांग्लादेश

रणथंभौर नेशनल पार्क

बाघिन मछली रणथंबोर नेशनल पार्क (Ranthambore National Park) के अन्य भागों में से सबसे ज्यादा फोटो खींचे जाने वाली बागी साबित हुई और बाघिन ने 1 साल में करीब 65 करोड़ रुपए का बिजनेस देने का खिताब ने बनाया रणथंबोर नेशनल पार्क बाघों के प्रजनन का केंद्र माना जाता है ऐसे में रणथंबोर के बाघ बाघ उन्होंने अन्य कई पार्कों को आबाद करने में भी अहम भूमिका निभाई है। ऐसे में अलवर का सरिस्का जंगल जो बाघों से वीराना पड़ा हुआ था वह भी रणथंबोर नेशनल पार्क की ही देन है कि आज सरिस्का में बाघ स्वच्छंद विचरण कर रहे हैं ऐसे में रणथंबोर नेशनल पार्क इस सेवकों ने दुनिया भर में अग्नि मिसाल कायम की है।

सब्सक्राइब करें-

बस 1 क्लिक पर जानें देश-दुनिया की ताजा-तरीन खबरें Download करें संस्कार न्यूज़ चैनल की Application नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें या फिर play store पे sanskarnews सर्च करें- लेटेस्ट न्यूज़ अपडेट के लिए लाइक करें हमारा फेसबुक पेज- https://fb.com/sanskarnewslko/
Loading...