हम मुसलमान और हिन्दुस्तान ही हमारा मुल्क : उलेमा-ए-किराम

तहफ़्फ़ुज मुल्क व मिल्लत सेमिनार

गोरखपुर । बेदारी-ए-उम्मत फाउंडेशन की ओर से रविवार को आइडियल मैरेज हाउस उंचवा में ‘तहफ़्फ़ुज मुल्क व मिल्लत’ सेमिनार हुआ। जिसमें निकाह-तलाक पर जागरुक करने, वसीम रिज़वी की गिरफ़्तारी, फिल्म आयशा पर प्रतिबंध लगाने, कश्मीरी अवाम, मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक-बुनकर-कुरैशी बिरादरी की समस्या आदि पर विचार-विमर्श किया गया। एनआरसी पर शिक्षक मो. कलीम अशरफ व भारतीय संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों के प्रति एडवोकेट तौहीद अहमद ने अवाम को जागरूक किया।

हमें भरोसा है अपने मुल्क के संविधान पर और अदालतों के फैसलों पर : मुफ्ती अलाउद्दीन

बतौर मुख्य अतिथि अन्तर्राष्ट्रीय वक्ता मुफ्ती अलाउद्दीन मिस्बाही ने कहा कि हम मुसलमान हैं। हम हिन्दुस्तान में पैदा हुए। यह हमारा मुल्क है। मुसलमान आतंकवादी नहीं है और जो आतंकवादी है वह मुसलमान नहीं है। इस मुल्क की आजादी के लिए हमनें और हमारे उलेमा-ए-किराम ने अपना खून दिया है, कुर्बानियां दी हैं। मुसलमानों की चर्चा के बिना आजादी का इतिहास अधूरा है। अल्लामा फज्ले हक खैराबादी, मौलाना सैयद किफायत अली मुरादाबादी जैसे सैकड़ों अज़ीम उलेमा के पास हिंदुस्तान की आजादी का ज़ज़्बा था। हमारा भी खून हिन्दुस्तान की मिट्टी में शामिल है। हम भी शहीद हुए हैं हिन्दुस्तान के लिए, हम गए नहीं, हम डरे नहीं, हम छुपे नहीं। हमें भरोसा है अपने मुल्क के संविधान पर और अदालतों के फैसलों पर।

बाबरी मस्जिद मुकदमे पर सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला होगा, हमें मंजूर है। हमारी सरकार से मांग है कि कश्मीरियों तक राशन, इलाज, दवा, दूध, फल, कपड़ा, ईंधन, अन्य खाद्य सामग्री पहुंचायी जाये। बच्चों के पढ़ाई की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। कश्मीरियों को समाज की मुख्यधारा से जल्द जोड़ा जाए। हर कश्मीरी हिन्दुस्तानी है। जिस तरह हिन्दुस्तान के हर नागरिक को मौलिक अधिकार मिला हुआ है उसी तरह कश्मीरियों के भी मौलिक अधिकार हैं। कश्मीरियों से संवाद कायम किया जाए। उन्होंने बताया कि इस साल खिलाफत आंदोलन के सौ साल पूरे हो गए हैं।

वसीम रिज़वी, तस्लीमा नसरीन जैसे लोग नफरतों के सौदागार, फ़िल्म आयशा पर लगाया जाए प्रतिबंध : मौलाना इफ्तेखार

घोसी (मऊ) से आए विशिष्ट वक्ता मौलाना इफ़्तेखार नदीम ने कहा कि हमें न डराया जाए, हमें न सताया जाए। मुल्क विभाजन के समय हमारे पूर्वजों ने पाकिस्तान जाने से साफ इंकार कर दिया था। हमारे पूर्वजों का कहना था कि हम इस सरज़मीन पर हमेशा रहेंगे। अब आप ही बताईए जहां मेरे बुजुर्गों ने जिंदगी गुजारी है, जहां मस्जिदें, खानकाहें बनाईं हैं। उसे हम कैसे छोड़ सकते हैं। इस मुल्क व यहां के संविधान से हमें मोहब्बत है। हिंदुस्तान ही मेरा मुल्क है। वसीम रिज़वी, तस्लीमा नसरीन, सलमान रुश्दी, तारिक फतेह जैसे लोग मौकापरस्त व नफरतों के सौदागार हैं, क्योंकि उनकी बातें समाज को तोड़ने का काम कर रही हैं।

उक्त लोग दीन-ए-इस्लाम की मुकद्दस हस्तियों, उलेमा, मदरसों आदि पर अनापशनाप बोलकर मुसलमानों की भावनाएं आहत करते हैं। हजरत आयशा पैगंबर-ए-आज़म हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम की पत्नी और मुसलमानों की मां हैं, जिन पर वसीम रिज़वी फिल्म बना रहा है। यह फिल्म अपमानजनक है। इससे मुसलमानों की भावनाएं आहत हुई हैं। हमारी सरकार से मांग है कि निर्माणाधीन फिल्म आयशा पर प्रतिबंध लगाकर वसीम रिज़वी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तार किया जाए। हिन्दुस्तान में मजहबी भावनाएं भड़काने वालों पर लगाम लगाने के लिए सख्त कानून बनाया जाए।

न ही दीन-ए-इस्लाम मिट सकता है और न ही कलमा पढ़ने वाले, मॉब लिंचिंग पर सख्त कानून वक्त की जरुरत : मौलाना जहांगीर

विशिष्ट वक्ता मौलाना जहांगीर अहमद अज़ीज़ी ने कहा कि हमने बड़े जालिम हाकिमों का भी दौर देखा है। किसी कौम को काटने और मारने से उसे ख़त्म नहीं किया जा सकता। न ही दीन-ए-इस्लाम मिट सकता है और न ही कलमा पढ़ने वाले मिट सकते हैं और न मदरसों का वजूद खत्म किया जा सकता है। हिन्दुस्तान में मॉब लिचिंग की घटनाएं तेजी के साथ बढ़ रही हैं। जो चिंताजनक है। इसे रोका जाना बेहद जरुरी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मद्देनजर मॉब लिंचिंग पर हर राज्य में सख्त कानून जल्द बनाया जाना बेहद जरुरी है। कानून बनाकर दोषियों को कड़ी सजा दी जाए। हमारी मांग है कि मॉब लिंचिंग से पीड़ित प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी व दस लाख रुपया मुआवजा दिया जाए।

इस्लामी शरीयत मुसलमानों की आन, बान और शान : मुफ्ती अजहर

विशिष्ट वक्ता मुफ्ती मोहम्मद अज़हर शम्सी (नायब काजी) ने कहा कि इस्लामी शरीयत मुसलमानों की आन, बान और शान है। शरीयत पर मुसलमानों की जान कुर्बान है। मुसलमान शरीयत से कोई समझौता नहीं कर सकता है। अवाम को चाहिए कि दीन-ए-इस्लाम के साथ मजबूती से जुड़े रहें। निकाह-तलाक के मसले पर उलेमा की राय लेकर ही कोई फैसला किया करें। पारिवारिक विवाद सुलह समझौता से निपटाइए ताकि तलाक की नौबत न आने पाए और न ही कोर्ट कचहरी का चक्कर काटना पड़े। अगर पति पत्नी में नहीं निभती हो तो तलाक के विभिन्न नियम कुरआन व हदीस में दिए गए हैं उन पर अमल व जागरुक किया जाए। शादियों में होने वाली खुराफातों-फिजूल खर्ची, दहेज मांगने के रिवाज, बैंड-बाजा, खड़े होकर खाने-पीने पर पाबंदी लगाने की अपील करते हुए कहा कि निकाह शरीयत के मिजाज से करें। दहेज लिए बिना शादी करें। बेटी को बचाईए भी और पढ़ाईए भी। हर हाल में औरतों का सम्मान कीजिए।

दीनी तालीम हासिल कीजिए : मुफ्ती अख्तर

अध्यक्षता करते हुए मुफ्ती अख्तर हुसैन मन्नानी (मुफ्ती-ए-गोरखपुर) ने कहा कि दीन का इल्म हासिल कर दीन-ए-इस्लाम के साथ रिश्ता मजबूत किया जाए। दीनी तालीम हासिल करने पर जोर दीजिए। दुनियावी तालीम भी हासिल कीजिए। हलाल कमाई से खुद की और बच्चो की परवरिश कीजिए। मुसलमानों को चाहिए कि वह अपनी जिंदगी पैगंबर-ए-आज़म हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम की सुन्नतों पर चलकर गुजारें। पड़ोसियों का हक, आम इंसानों और मजदूरों का हक अदा कीजिए। यतीमों, बेसहारा, विधवाओं पर रहम कीजिए। गरीबों को खाना खिलाइए, कपड़ा पहनाइए। मरीजों का हालचाल पूछिए। सच बोलिए, ईमानदार बनिए।

कश्मीरी बच्चों व बिहार बाढ़ पीड़ितों के लिए जुटाया गया चंदा

सेमिनार में बच्चों ने कश्मीरी बच्चों व बिहार बाढ़ पीड़ितों के लिए गुल्लक के जरिए चंदा जुटाया। बच्चों ने कहा कि हर कश्मीरी व बिहारी हमारा भाई है। उनकी मदद करना हमारा कर्तव्य है। बच्चों के इस गुल्लक अभियान में उलेमा व अवाम ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। सभी ने बच्चों के गुल्लक अभियान की तारीफ की। इस गुल्लक को सोमवार को जिला प्रशासन को सौंपा जायेगा ताकि गुल्लक की राशि जरुरतमंदों तक पहुंच सके।

सेमिनार में बड़ी तादाद में लोग हुए शामिल

सेमिनार का आगाज तिलावत कुरआन-ए-पाक से हाफिज रहमत अली निजामी ने किया। नात शरीफ भी रहमत अली ने पेश की। अंत में सलातो-सलाम पढ़कर मुल्क व मिल्लत में अमनों सलामती व तरक्की की दुआ मांगी गई। सेमिनार में मस्जिदों के इमाम, मदरसों के शिक्षक, सामाजिक तंजीमों के लोग व अवाम ने बड़ी संख्या में शिरकत की।

इस मौके पर मो. शादाब, हाफिज नजरे आलम कादरी, मौलाना नूरुज़्ज़मा मिस्बाही, मौलाना शौकत अली नूरी, हाजी मो. फैज अली, साबिर अली, अतहर अंसारी, अब्दुल समद, हाजी अब्दुल्लाह, गजनफर अली शाह, जमशेद जिद्दी, नूर मोहम्मद दानिश, मुनाजिर हसन, मो. अफरोज, अलाउद्दीन निज़ामी, मनोव्वर अहमद, आदिल अमीन, अब्दुल्लाह, सैयद इरशाद अहमद, मो. आज़म, नवेद आलम, मौलाना फैजुल्लाह कादरी, मौलाना असलम, हाफिज महमूद रजा सहित तमाम लोग मौजूद रहे।

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