ईरान में विरोध-प्रदर्शन और अमेरिकी सेना की तैयारी: युद्ध की आशंका बढ़ी

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी युद्धपोत और मिसाइलें ईरान के पास तैयार खड़ी हैं, जिससे क्षेत्र में युद्ध की आशंका पैदा हो गई है। अमेरिका ने अपने काफिले और नौसैनिक ताकत को ईरान की सीमा के नजदीक तैनात किया है। अमेरिकी अधिकारी इसे “रक्षात्मक तैयारी” बता रहे हैं, लेकिन विश्लेषक इसे ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के संकेत के रूप में देख रहे हैं।ईरान में फिलहाल बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। नागरिक सरकार की नीतियों और आर्थिक संकट के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। विरोध प्रदर्शन में हजारों लोग शामिल हैं और कई शहरों में पुलिस और सेना को प्रदर्शनकारियों पर काबू पाने के लिए भेजा गया है। प्रदर्शनकारियों ने प्रमुख सड़कों और सरकारी इमारतों के सामने विरोध प्रदर्शन किया, और कई जगहों पर हिंसक झड़पें भी हुई हैं।इन प्रदर्शनों के बीच ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई सार्वजनिक रूप से नहीं दिख रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, खामेनेई अपनी सुरक्षा को लेकर छिपे हुए हैं और देश की स्थिरता बनाए रखने के लिए गुप्त रूप से परामर्श कर रहे हैं। उनका लंबे समय तक नजर न आने से राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ रही है।विश्लेषकों का कहना है कि ईरान में आर्थिक मंदी, बढ़ती बेरोजगारी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने नागरिकों में नाराजगी बढ़ा दी है। विरोध प्रदर्शन न केवल आर्थिक मुद्दों पर केंद्रित हैं, बल्कि राजनीतिक स्वतंत्रता और सरकार के निर्णयों को लेकर भी हैं।दूसरी ओर अमेरिका ने कहा है कि वह क्षेत्र में अपने हितों की रक्षा करेगा। अमेरिकी नौसैनिक बल और मिसाइल तैनाती के साथ-साथ उनके वरिष्ठ अधिकारी ईरान से किसी भी संभावित खतरे के लिए सतर्क हैं। अमेरिका के विदेश विभाग ने बयान जारी किया है कि अमेरिका शांतिपूर्ण समाधान चाहता है, लेकिन “अपने नागरिकों और साझेदार देशों की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा।”ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने क्षेत्रीय देशों में भी चिंता बढ़ा दी है। खाड़ी देशों और इराक़ में सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने चेतावनी दी है कि कोई भी सैन्य कार्रवाई पूरे मध्य पूर्व में संकट बढ़ा सकती है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई अप्रत्याशित घटना होती है, तो इससे तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और व्यापारिक मार्गों पर अवरोध जैसी चुनौतियां सामने आ सकती हैं।इस समय ईरान में विरोध प्रदर्शन लगातार जारी हैं और अमेरिकी सेना की तैयारी बढ़ी हुई है। राजनीतिक विश्लेषक कह रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं की भूमिका अब और महत्वपूर्ण हो गई है। सभी की नजरें अब इस पर टिकी हैं कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच तनाव सैन्य संघर्ष में बदल सकता है, या कूटनीतिक प्रयासों से इसे शांतिपूर्ण तरीके से हल किया जा सकेगा।

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