सफ़ेद कबूतर से हूआ प्यार!

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नमस्कार, आप पड़ रहे हैं ‘इति इतिहास’। आज हम बात करेंगे एक ऐसे वैज्ञानिक की, जिसका नाम सुनते ही विज्ञान जगत चमक उठता है—निकोला टेस्ला।टेस्ला ने बिजली और ऊर्जा के रहस्यों को समझने की हिम्मत की। उन्होंने Alternating Current यानी एसी बिजली की खोज की, और भविष्य की तकनीकों की कल्पना की—जैसे वायरलेस ऊर्जा और वैश्विक संचार। उनके बिना आज दुनिया वैसी नहीं होती जैसी हम जानते हैं।लेकिन टेस्ला की ज़िंदगी सिर्फ आविष्कारों तक सीमित नहीं थी। उनके जीवन का आखिरी हिस्सा रहा—अकेलापन। छोटे-छोटे होटल के कमरे, खाली सड़कें, कोई परिवार, कोई स्थायी दोस्त नहीं। सिर्फ उनके विचार, उनका दिमाग, और उनकी खोजें।और तभी उनकी ज़िंदगी में आया एक अनोखा साथी—एक सफ़ेद कबूतर। वह कबूतर टेस्ला के अकेलेपन की चुपचाप साथी बन गई। वह उसे खिलाते, उसके साथ समय बिताते, और जैसे वह कबूतर उनकी भावनाओं को समझ रहा हो। कहा जाता है कि टेस्ला ने उस सफ़ेद कबूतर में एक ऐसा प्रेम महसूस किया, जो उन्होंने किसी इंसान से नहीं किया।टेस्ला का जीवन विज्ञान और भावनाओं का मिश्रण था। उन्होंने भविष्य को देखा, उसे समझा, और उसे दुनिया के सामने पेश किया। लेकिन अपने भीतर, वह एक साधारण इंसान थे—जो प्यार और सुकून की तलाश में थे।आज हम उन्हें उनके आविष्कारों के लिए याद करते हैं। लेकिन यह कहानी हमें यह भी सिखाती है कि महानता के साथ अकेलापन भी आता है। और कभी-कभी, सबसे अनोखे साथी—जैसे एक सफ़ेद कबूतर—हमें उस अकेलेपन में सुकून दे सकते हैं।टेस्ला की ज़िंदगी हमें याद दिलाती है कि चाहे हम कितने भी महान क्यों न हों, हमें भावनाओं की ज़रूरत होती है। कभी खोजों में, कभी किताबों में, और कभी—एक सफ़ेद कबूतर में।

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