
अजय त्रिपाठी /मुंबई में 45 साल में पहली बार ऐसा हुआ है कि बीजेपी ने शहर की सत्ता पर कब्जा कर लिया है। पिछले 25 सालों से उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना मुंबई महापालिका में हावी रही थी, लेकिन हाल के निकाय चुनावों में बीजेपी ने भारी जीत दर्ज की है। यह बदलाव शहर की राजनीतिक दिशा को पूरी तरह बदल सकता है।अब सवाल यह है कि बीजेपी किसे मुंबई का मेयर बनाएगी। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि बीजेपी अपनी पसंद को लेकर रणनीतिक रूप से सोच रही है, ताकि शहर की प्रशासनिक और विकास योजनाओं पर उसका प्रभाव मजबूत बना रहे। मुंबई जैसी महानगर में मेयर का पद केवल प्रतीकात्मक नहीं होता, बल्कि शहर के विकास और नीतियों को आकार देने में अहम भूमिका निभाता है।शहर के नागरिकों और मीडिया में इस बात को लेकर चर्चा है कि बीजेपी का चयन किस प्रकार का नेता होगा—क्या वह अनुभव के साथ प्रशासनिक कौशल में भी सक्षम होगा, या पार्टी की युवा नेतृत्व शैली को सामने लाया जाएगा। शिवसेना के लंबे समय तक कब्जे के बाद, अब मुंबई में नया राजनीतिक समीकरण बनने वाला है।विशेषज्ञों का मानना है कि बीजेपी की यह जीत केवल मेयर पद तक सीमित नहीं होगी, बल्कि यह शहर की विकास नीतियों और प्रशासनिक निर्णयों पर भी असर डाल सकती है। विपक्ष की रणनीति और शहर की जनता की प्रतिक्रिया भी अब देखने वाली होगी।इस ऐतिहासिक बदलाव ने मुंबई की राजनीति में नई उम्मीदें और बहस दोनों पैदा कर दी हैं। अब यह समय है जब बीजेपी अपने अगले कदम का ऐलान करेगी और तय करेगी कि शहर के लोगों के लिए कौन सा नेता सबसे उपयुक्त होगा।
