
अजय त्रिपाठी /राजधानी!भोपाल में स्लॉटर हाउस और कथित गौमांस तस्करी का मामला अब केवल प्रशासनिक या कानूनी दायरे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है। इस पूरे प्रकरण को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो रहा है कि आखिर इसकी वास्तविक जिम्मेदारी किसकी है। मामले के सामने आने के बाद शहर सरकार, नगर निगम और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं, वहीं विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाकर सत्ताधारी दल पर तीखा हमला शुरू कर दिया है।जानकारी के अनुसार, भोपाल में संचालित स्लॉटर हाउस और उससे जुड़े कथित अवैध गतिविधियों को लेकर लंबे समय से शिकायतें सामने आ रही थीं। आरोप है कि नियमों की अनदेखी कर अवैध रूप से मवेशियों का वध किया जा रहा था और गौमांस तस्करी से जुड़े नेटवर्क सक्रिय थे। कार्रवाई सामने आने के बाद यह सवाल उठने लगे कि यदि यह गतिविधियां लंबे समय से चल रही थीं, तो जिम्मेदार अधिकारी और नगर निगम प्रशासन अब तक क्या कर रहे थे।इस पूरे मामले में नगर निगम की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्लॉटर हाउस का संचालन, निगरानी और लाइसेंस संबंधी जिम्मेदारी नगर निगम की मानी जाती है। ऐसे में विपक्ष का आरोप है कि या तो प्रशासन की लापरवाही के कारण यह सब होता रहा या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गईं। विपक्षी दलों का कहना है कि यदि समय रहते जांच और सख्त निगरानी होती, तो मामला इस हद तक नहीं पहुंचता।वहीं सत्ताधारी दल का कहना है कि मामले में कानून अपना काम कर रहा है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। सरकार का दावा है कि किसी भी अवैध गतिविधि को संरक्षण नहीं दिया जाएगा और जांच के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो। सत्ताधारी नेताओं ने विपक्ष पर आरोप लगाया है कि वह इस संवेदनशील मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए भुनाने की कोशिश कर रहा है।प्रशासनिक स्तर पर भी अब सक्रियता बढ़ी है। संबंधित विभागों द्वारा दस्तावेजों की जांच की जा रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि नियमों के उल्लंघन की शुरुआत कहां से हुई। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कहीं इसमें किसी अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत तो नहीं थी।कुल मिलाकर, भोपाल स्लॉटर हाउस और कथित गौमांस तस्करी का मामला अब एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और उस पर होने वाली कार्रवाई यह तय करेगी कि यह मामला केवल बयानबाजी तक सीमित रहता है या फिर वास्तव में जिम्मेदार लोगों पर ठोस कार्रवाई होती है। फिलहाल जनता की नजर इस बात पर टिकी है कि जवाबदेही तय होगी या नहीं।
