राज ठाकरे की रणनीति पर उठे सवाल

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अजय त्रिपाठी /मुंबई।महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के बाद अब नगर महापालिका चुनावों में भी राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को करारी हार का सामना करना पड़ा है। नगर निकाय चुनावों के नतीजों ने साफ कर दिया है कि शहरी राजनीति में मनसे का जनाधार लगातार कमजोर होता जा रहा है। इन नतीजों के बाद एक बार फिर राज ठाकरे की राजनीतिक रणनीति और भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं।मनसे ने इस बार कई नगर महापालिकाओं में पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ा था। पार्टी ने स्थानीय मुद्दों, मराठी अस्मिता और विकास के वादों को लेकर मतदाताओं को साधने की कोशिश की, लेकिन नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं आए। अधिकांश जगहों पर मनसे उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा, जबकि पार्टी कहीं भी निर्णायक स्थिति में नजर नहीं आई।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव में मिली हार का असर नगर महापालिका चुनावों में भी साफ देखने को मिला। मतदाताओं ने एक बार फिर बड़े दलों पर भरोसा जताया और मनसे को विकल्प के तौर पर स्वीकार नहीं किया। इससे यह संकेत भी मिलता है कि पार्टी का संगठनात्मक ढांचा कमजोर पड़ा है।चुनाव से पहले कयास लगाए जा रहे थे कि राज ठाकरे, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के साथ मिलकर चुनाव लड़ सकते हैं। हालांकि यह गठबंधन जमीन पर आकार नहीं ले सका। माना जा रहा है कि यदि मनसे और शिवसेना (उद्धव गुट) एक साथ चुनाव लड़ते, तो मराठी वोटों का बंटवारा रुक सकता था। लेकिन गठबंधन न होने का सीधा नुकसान मनसे को उठाना पड़ा।नतीजों के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि राज ठाकरे को अब अपने राजनीतिक रुख और रणनीति पर दोबारा विचार करना होगा। लगातार चुनावी असफलताओं से पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल भी प्रभावित हुआ है। कई जगहों पर मनसे के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने नतीजों पर निराशा जताई है।वहीं, विपक्षी दलों ने मनसे की हार को जनता का स्पष्ट संदेश बताया है। उनका कहना है कि मतदाता अब भावनात्मक मुद्दों से ज्यादा स्थिर नेतृत्व और विकास को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे में मनसे का पुराना एजेंडा असरदार साबित नहीं हो पा रहा।फिलहाल राज ठाकरे की ओर से हार को लेकर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि जल्द ही संगठन की समीक्षा बैठक बुलाई जाएगी। इस बैठक में चुनावी हार के कारणों और भविष्य की रणनीति पर मंथन किया जाएगा।कुल मिलाकर, नगर महापालिका चुनावों के नतीजे मनसे के लिए एक बड़ा झटका साबित हुए हैं। अब देखना यह होगा कि राज ठाकरे इस राजनीतिक चुनौती से कैसे निपटते हैं और क्या आने वाले चुनावों में पार्टी खुद को नए सिरे से खड़ा कर पाती है या नहीं।

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